Kavi Satya Bolta hai

कवि सत्य बोलता है | Kavi Satya Bolta hai

कवि सत्य बोलता है

( Kavi satya bolta hai )

 

हर बात वो क़लम से लिख देता है,
और सभी तक फिर पहुँचा देता है।
क़लम ही है कलमकार की ताकत,
बेबसी व लाचारी भी लिख देता है।।

लिख देता वो कविता और कहानी,
सोच-समझकर सुना देता ज़ुबानी।
हर एक शब्द का करके माप-दण्ड,
कवि की ज़ुबानी सत्य की कहानी।।

कल्पनाओं का भी भण्डार है कवि,
सोए हृदय को भी जगा देता कवि।
नक़ाब दूसरे चेहरों का हटा देता है,
लिखता व सत्यता दर्शाता ये कवि।।

सत्य ही बोलता एवं सत्य लिखता,
मातृ-भाषा हिन्दी राष्ट्र को जगाता।
हंसना हंसाना इनमें ये भी है कला,
बुझते चिरागों की बाती बन जाता।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • सब ढूंढते ही रह जाओगे | Kavita Sab Dhoondte Hi Reh Jaaoge

    सब ढूंढते ही रह जाओगे ( Sab dhoondte hi reh jaaoge )    आगे आनें वालें वक़्त में सब ढूंढ़ते ही रह जाओगे, इस उथल पुथल के दौर में ख़ुद को भूल जाओगे। एक जमाना ऐसा था दूसरे की मदद को‌ भागतें थेंं, धैर्य रखना विश्वास करना सब-कुछ भूल जाओगे।। गलतफहमी में उलझकर ये परिवार…

  • कृष्ण कन्हैया | Muktak krishna kanhaiya

    कृष्ण कन्हैया ( Krishna kanhaiya )   मदन मुरारी मोहन प्यारे, हे जग के करतार। मोर मुकुट बंसीवाला, तू गीता का है सार। चक्र सुदर्शन धारी माधव, मीरा के घनश्याम। विपद हरो हे केशव आकर, कर दो बेड़ा पार।   नटवर नागर नंद बिहारी, अधर मुरलिया सोहे। रुनक झुनक बाजे पैजनिया, वैजयंती मन मोहे। यशोदा…

  • प्रेयसी सी लगती मधुशाला

    प्रेयसी सी लगती मधुशाला   दुःख कष्ट पीड़ा संग, परम मैत्री अनुभूति । असफलता बिंदु पर , नवल प्रेरणा ज्योति । सघन तिमिर हरण कर , फैलाती अंतर उजाला । प्रेयसी सी लगती मधुशाला ।। तन मन पट नव चेतना, उत्साह उमंग अपार । अपनत्व सा मृदुल स्पर्श , अंतर्द्वन्द अवसानित धार । अदम्य हौसली…

  • न जाने क्यूॅं | Na Jane Kyon

    न जाने क्यूॅं? ( Na Jane Kyon )  आज भी जब निकलता हूॅं ब्राह्मणों की गली में तो अनायास ही खड़े हो जाते हैं कान चौकस मुद्रा में और चारों ओर दौड़ती हुईं अपलक आकार में बड़ी हो जाती हैं ऑंखें भौंहें तन जाती हैं फड़कने लगते हैं हाथ-पाॅंव और रगों में चोट-कचोट की मिश्रित…

  • पिता का अस्तित्व | Kavita Pita ka Astitva

    पिता का अस्तित्व ( Pita ka Astitva )   पिता पी ता है गम जिंदगी के होती है तब तैयार कोई जिंदगी गलकर पी जाता है स्वप्न पिता बह जाती है स्वेद मे हि जिंदगी औलाद हि बन जाते उम्मीद सारे औलाद पर हि सजते है स्वप्न सारे औलाद मे हि देता है दिखाई जहाँ…

  • साथ

    साथ * कहते हैं वो हम साथ हैं साथ हैं ? तो कहने की क्या बात है? साथ! एक एहसास है। जो न आपके न मेरे पास है! फिर कहिए कौन किसके साथ है? एहसास ही जज़्बात है जहां जज़्बात है वहीं साथ हैं बाकी सब बात है। और , बात की क्या औकात है?…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *