जल ही है जीवन का संबल

जल ही है जीवन का संबल

 

जल ही है जीवन का संबल,
जल ही जीवन का संचार!
वन्य जीव फसलें जीवित सब,
जल ही है सुख का आधार!!

जल विहीन हो जीना चाहें,
ऐसा संभव नहीं धरा पर!
जल संचय करना हम सीखें,
बर्बादी को रोकें परस्पर!!

पर्यावरण प्रदूषित ना हो,
वृक्ष से करें धारा श्रृंगार!
भावी जीवन मंगलमय हो,
आवर्षण का पड़े न मार !!

जल दोहन से बचना सीखें,
“जिज्ञासु” जन मन सोच प्रखर हो!
धरा स्वर्ग बन जाए अपनी,
नित सुवाष भूषित नभ- सर हो!!

kamlesh

कमलेश विष्णु सिंह “जिज्ञासु”

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/insaniyat-ki-raah-par/

Similar Posts

  • मां

    मां   मां एक अनबूझ पहेली है, मां सबकी सच्ची सहेली है, परिवार में रहती अकेली है, गृहस्थी का गुरुतर भार ले ली है। ऐ मां पहले बेटी,फिर धर्मपत्नी, बाद में मां कहलाती हो। पहली पाठशाला,पहली सेविका तूं घर की मालकिन कहलाती हो।। बुआ,बहन,मामी,मौसी कहलाये, माता,दादी,नानी नाम बुलवाये, परिवार की जन्म दात्री नाम सुहाये, अबला,सबला,…

  • Kavita Corona se Ladne ka Upay | कोरोना से लड़ने का उपाय

    कोरोना से लड़ने का उपाय ( Corona se ladne ka upay )   घर में रहकर ही करें मौज मस्ती, ये जिंदगी नहीं है सस्ती। करें जीवन का एहतराम, मस्ती कर मस्त रहें सुबह शाम। घर में हैं तो हैं सुरक्षित, बाहर निकलने की क्या है जरूरत? जब बदलीं बदली सी हवा है, बदली बदली…

  • मेरे हिस्से का प्रेम

    मेरे हिस्से का प्रेम मैं तुम सेदूर हूँधूप और छाँव की तरहपुष्प और सुगंध की तरहधरा और नील गगन की तरहदिवस और निशा की तरहजनवरी और दिसम्बर की तरहसाथ-साथ होते हुए भीबहुत दूर- बहुत दूर परन्तुप्रति दिन मिलता हूँतुम सेतुम्हारी नयी कविता के रूप मेंनये शब्दों के रूप में जीवन मेंकभी कोई सुयोग बना..तोमैं तुम…

  • भोर की किरण | Kavita

    भोर की किरण ( Bhor ki kiran )   भोर की पहली किरण उर चेतना का भाव है उषा का उजाला जग में रवि तेज का प्रभाव है   आशाओं की जोत जगाती अंधकार हरती जग का जीने की राह दिखाकर उजियारा करती मन का   कर्मवीरों की प्रेरणा हौसलों की उड़ान है योद्धाओं की…

  • एक अजीब लड़की | Poem ek ajeeb ladki

    एक अजीब लड़की ! ( Ek ajeeb ladki ) ***** घड़ी घड़ी कपड़े है बदलती, बिना काम बाजारों में है टहलती। अभी दिखी थी साड़ी में, अब आई है गाउन में; नयी नयी लग रही है टाउन में। अधरों पर लिए अजीब मुस्कान, कुछ खास नहीं उसकी पहचान। मुखरे पर किए अतिशय श्रृंगार, युवा धड़कनें…

  • कृष्ण | Kavita Krishna

    कृष्ण ( Krishna )     नयन भर पी लेने दे, प्रेम सुधा की साँवली सूरत। जनम तर जाएगा हुंकार,श्याम की मोहनी मूरत।   ठुमक  कर  चले  पाँव  पैजनी, कमर करधनियाँ बाँधे, लकुटी ले कमलनयन कजराजे,मोरध्वंज सिर पे बाँधे।   करत लीलाधर लीला मार पुतना, हँसत बिहारी। सुदर्शन चक्रधारी बालक बन,दानव दंत निखारी।   जगत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *