Kavita kamare ki ghutan

कमरे की घुटन | Kavita kamare ki ghutan

कमरे की घुटन

( Kamare ki ghutan )

 

बंद कमरे में सिमट कर रह गई दुनिया सारी
टूट रहे परिवार घरों से बिखर गई है फुलवारी

 

मनमर्जी घोड़े दौड़ाए बड़ों का रहा लिहाज नहीं
एकाकी सोच हो गई खुलते मन के राज नहीं

 

बंद कमरों की घुटन में नर रहने को मजबूर हुआ
टूट रही रिश्तो की डोर घुटन से चकनाचूर हुआ

 

अब ना कोई हाल पूछता राय मशवरा भी क्यों दे
प्रेम दिलो में रहा नहीं सब दूर दूर बस दूर रहे

 

वो भी एक जमाना था खत दूर तलक से आते थे
बार-बार समाचार पढ़ते हम फूले नहीं समाते थे

 

घर के सारे आपस में मिल दुख दर्द बांटने थे
खेतों में मिल काम करते सुख के दिन काटते थे

 

घुटन भरे माहौल से निकल खुली हवा में सांस लो
प्यार के मोती लुटाओ मन में अटल विश्वास भर लो

 

काम औरों के भी आओ स्वार्थ का परित्याग कर
खुशहाली का जीवन जिए दुनिया में अनुराग भर

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

शबरी के प्रभु राम | Kavita Shabri Ke Prabhu Ram

Similar Posts

  • कान्हा | kaanha

    कान्हा हे ! मेरे कान्हा तुम कहां बसने लगे सुना है तु जल में सुना है तु थल में तुम नज़र नहीं आते । हे ! मेरे कान्हा सभी तुम को कहते कृष्ण काला दिल से साफ हो तुम यह मैं कहता हूं आप महान हो इस जग में तुम नज़र नहीं आते ‌‌। हे…

  • रेशम धागा पहन कर

    रेशम धागा पहन कर पांच बहनो का भईया सजता धजता आज, रेशमी धागा पहन कर ,करता कितना नाज। बचपन की खुशबू भरी,बिखराए सरस धार, पावन सावन पूर्णिमा,नित रक्षा हो हर काज।।1। रिश्तों का बंधन पावन,छलकाता उर प्यार, कच्चे धागे में दिखता, खुशियॉ अपरम्पार। चावल रोली थाली रख, बहना है तैयार, भईया गेह खुशहाल हो,लगे उमर…

  • भ्रमित इंसान | Kavita Bhramit Insaan

    भ्रमित इंसान ( Bhramit insaan )    जाने किस वहम में खोया क्या-क्या भ्रम पाले बैठा है। जाने किस चक्कर में वो औरों के छीनें निवाले बैठा है। भाति भाति सपने संजोए झूठ कपट का सहारा क्यों। मोहमाया के जाल में फंसता पैसा लगता प्यारा क्यों। रिश्ते नाते छोड़ चला नर अपनापन वो छोड़ दिया।…

  • आज जी भर के गाने दो | Gane do

    आज जी भर के गाने दो ( Aaj ji bhar ke gane do )   है कल का क्या विश्वास समय का साथ निभाने दो। आज जी भर के गाने दो। क्षण क्षण बदल रहा है किस क्षण, क्या होगा क्या जाने, पल पल में परिवर्तन होता, प्रकृति बदलती बाने, अंतर का आवेग निकल कर…

  • आदमी है जो | Aadmi hai Jo

    आदमी है जो ( Aadmi hai jo )   आदमी है जो  सबको हॅंसाता रहे खुद भी हॅंसता रहे मुस्कराता रहे।   दूर कर दे हर दुखड़े हॅंसी प्यार से जीत ले सारी मुस्किल सदाचार से   लाख बाधाएं आए उसे भूल कर आगे बढ़ते कदम को बढ़ाता रहे, आदमी है जो  सबको हॅंसाता रहे…

  • घड़ी | Bal kavita

    घड़ी ( Ghadi )   टिक टिक टिक कर यह घड़ी बोलती इसके भीतर अलग-अलग तीन छड़ी घूमतीं सेकेंड, मिनट, घंटे से जो समय तोलतीं टिक टिक टिक कर यह घड़ी बोलती । बच्चों झटपट हो जाओ तुम सब तैयार मात-पिता, बड़ों को करो नमस्कार जल्दी पहुँचो स्कूल-तुमसे ये घड़ी बोलती शिक्षा ही सबकी उन्नति…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *