वह खेल रहा था
खेले ही जा रहा था
सांप हिरण शेर हाथी और जिब्रा से
बिना डरे बिना थके बिना रूके
कभी उनके लिए घर बनाता
तो कभी छत पर चढ़ाता
कभी झूला झुलाता
कभी गिराता उठाता
फिर बंद पिंजरे में कर उन्हें सुलाता!
ठहाके लगाता
दिखाने मुझे पास ले जाता
ना जाऊं तो चिल्लाता
चलो ना चलो ना की रट लगाता
बेमन से ही सही जाता
देखता
फिर सोचता
कितना निडर है ये बच्चा?
शेर सांप से है खेलता!
उठा उठाकर है पटकता।
एक हम हैं
शेर नाम के आदमी से डरते हैं,
अपना हक भी उनके लिए छोड़ते हैं।
पीढ़ियों से यही होता आया है,
अदृश्य भय मन में गया समाया है।
जबकि सच ये है कि
शेर चौपाया और निरक्षर होता है
लिखना पढ़ना नहीं जानता
उसे जंगल ही भाता है
इसलिए सर्वत्र जंगल ही बनाता है
जंगल रहेगा, तो राज करेगा!
तू कब इसे समझेगा?
पढ़-लिख तो गए हो
समझोगे कब?
वो बच्चा बड़ी होशियार है
जानता है
जंगली जानवर के लिए जंगल ही ठीक है
इसलिए खेल खाल कर तोड़ ताड़कर
कूड़े पर फेंक आता है
और सदा मुस्कुराता है।
मां नवदुर्गा ( Maa Navdurga ) ( 1 ) नौ रूप में नौ दिनों तक होती माता की आराधना, जो भी पूजे इनको होती उसकी पूरी हर मनोकामना। समूचे जगत में फैली हुई है तेरी अनुपम महिमा, न होता कल्याण किसी का तेरी कृपा के बिना। हे माता शेरावाली हे माता जोतावाली, पूरी कर…
एक रचना देश के नाम ( Ek rachna desh ke naam ) तिरंगा हमारी आन बान व शान है, अपने देश के प्रति हमें अभिमान है, जो कहीं देखने को भी नहीं मिलती, हमारे पास वह संस्कृति की खान है।-1 परंपरा और इतिहास देश की शान है , भारत की खातिर शहीदों ने दी…
ऊन का चोला ( Oon ka chola) यह बदन है सभी का भैया मिट्टी का ढेला, ना जानें कब हो जाऍं किसका फिसलना। शर्म ना कर प्राणी पहन ले ऊन का चोला, बिठूर रहा है बदन जरा संभलकर चलना।। पहनकर घूमना फिर चलना चाहें अकेला, हॅंसना-हॅंसाना पहनकर फिर तू उछलना। न करना…
अवशेषी पुस्तिका ( Avsheshi Pustika ) ना सारांश ना ही उद्धरण; ना प्रतिमान ना ही प्रतिच्छाया छोटी सी स्मृति भरी अशुद्ध संवेदी अवधारणा हूँ… अप्रचलित परिच्छेदों; त्रुटियों से पूर्ण परित्यक्ता कही जाने वाली अधुरी सी गूढ़ कहानी हूँ… मेरे घटिया शब्दों के प्रत्युत्तर में तुम्हारी सभ्य खामोशी के अर्थ ढूँढने की कोशिश करती सस्ती…
तेरा इंतज़ार ( Tera intezaar ) आ गया मधुमास सुहाना, चलने लगी बयार। मोती बरसे प्रेम के, उमड़ रही रसधार। आ जाओ प्रियतम प्यारे, कुदरत ने किया श्रंगार। हमें तेरा इंतजार, हमें तेरा इंतजार। दमक उठा मन का कोना, हृदय उमड़ता प्यार। फागुन का महीना आया, प्रीत भरा इजहार। होली के रंगों में…