जब से तेरी पायल छनक गयी

पैरों की पायल | Kavita Pairon ki Payal

पैरों की पायल

( Pairon ki Payal )

तेरे पैरों की पायल मुझे,
दिन रात सताती है !
घुँघरू की लगा ठुमका,
फिर मुझे बुलाती है !!

सुनने पर बढ़ती बेचैनी,
बिन सुने चैन नहीं आती !
प्रतिपल बढ़ती बेचैनी,
चैन नहीं दे पाती !!

रातों की निंद मेरी,
लेकर उड़ जाती है !
चाहत की चितवन से,
फिर तृषा जगाती है !!

रूप सजाए चाह जगाए ,
मुझको ललचातीे है !
चितवन की कंकड़ मार मार
फिर पास बुलाती है !!

तेरे पैरों की पायल मुझे,
दिन रात सताती है!

कमलेश विष्णु सिंह “जिज्ञासु”

यह भी पढ़ें :-

स्नेह सुधा बरसाने वाली

Similar Posts

  • बूँदों की सरगम | Boondon ki Sargam

    ” बूँदों की सरगम “ ( Boondon ki sargam )   बूंँदों की रुन झुन है सावन में या कहीं सरगम बज़ी। हवाओं की थिरकन है या मौसम ने नयी धुन है रची! जुगलबंदी करती हवा छेड़- छेड़ फुहारों को, दोहरा रही बंदिश वही ख़ुशामदीद है सावन की, लपक – झपक कटार सी चमकती तड़ित…

  • Hindi Diwas Poem | मेरा सम्मान – मातृभाषा हिन्दी

    मेरा सम्मान – मातृभाषा हिन्दी ( Mera samman – matribhasha Hindi )   कब तक हिंदी मंद रहेगी अग्रेजी से तंग रहेगी कब तक पूजोगे अतिथि को कब तक माँ यूँ त्रस्त रहेगी माना अग्रेजी की जरूरत सबको माना बिन इसके नहीं सुगम डगर हो माना मान सम्मान भी दिलवाती पर मातृ भाषा बिन कैसी…

  • अधिकार | Chhand adhikar

    अधिकार ( Adhikar ) जलहरण घनाक्षरी   अधिकार पहचानो, कर्तव्य को खुद जानो‌। परिवार में प्रेम का, करो मधुर संचार।   प्रीत रंग झोली भरो, मतभेद मत करो। जीवन में उन्नति को, स्वप्न करें साकार।   अपने अधिकारों की, धीरज धर्म नारों की। यश कीर्ति चहूंओर, बहाइये रसधार।   मान सम्मान वैभव, मिलते जो अधिकार।…

  • पुल- विश्वास का

    पुल- विश्वास का   पहले हमारे बीच बहुत गहरा रिश्ता था प्रेम की नदी पे बने विश्वास के पुल की तरह उस पुल से हम देखा करते थे कभी इन्द्र धनुष के रंग कभी ढलती शाम कभी दूर आलिंगन करते पंछियों को उड़ते बादलों को उसी पुल पे खड़े सुना करते थे मधुर लहरों का…

  • महाशक्ति ये देश बने | Mahashakti ye Desh Bane

    महाशक्ति ये देश बने ( Mahashakti ye desh bane )    हक की बातें कम करते हो,देखा पिछली सालों में, कितने नाम उछलकर आए स्विस बैंक,हवालों में। जिसने देश आजाद कराया क्यों जेहन से भूल गए? उनके नाम कहाँ छपते हैं आजकल अखबारों में। घर कितने जला डाले देखो आस्तीन के साँपों ने, खून से…

  • जनमत हूं शान हूं | Janamat

    जनमत हूं शान हूं ( Janamat hoon shaan hoon )    लोकतंत्र का सजग सिपाही जनमत हूं शान हूं। मैं राष्ट्र का नागरिक हूं मैं मानवों में महान हूं। लोकमत के लोकहित में लोकतंत्र गुण गाता है। प्रजातंत्र में प्रजा हित को शासन दौड़ा आता है। मैं भारतवासी जन गण संस्कृति स्वर गान हूं। राष्ट्रधारा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *