Kavita tumhare shehar ki fiza

तुम्हारे शहर की फिज़ा | Kavita tumhare shehar ki fiza

तुम्हारे शहर की फिज़ा

( Tumhare shehar ki fiza )

 

तुम्हारे शहर की अलग फिज़ा हैं
प्यार तो जैसे बिका पड़ा है …

हैं ये नीलामी अपने ही दिल की ,
जर्रे जर्रे पर फरेब छुपा पड़ा है …

हर कोई राजा है अपने दिल का
शतरंज दिल का यहां बिछा हुआ है …

हम तो मोहब्बत में मशरूफ थे ,
आज तेरी वफा का हमें पता चला है…

तुम्हारे शहर की फिज़ा अलग है
प्यार है तो जैसे बिका पड़ा हैं….

बहुत हुआ अब कत्था लगाना
ये प्रेम का पान तो बटा हुआ है….

सोच रहा हूं में टिकट कटा लूं
मेरे गांव का मुझे पता चला है….

 

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

यह भी पढ़ें :-

जाता हुआ दिसंबर | Kavita jata hua December

Similar Posts

  • कत्ल कलम से | Kavita

    कत्ल कलम से ( Qatal kalam se )   हो ना जाए कत्ल कलम से, शमशीरो सी वार सा। दोषी  को  सजा  दिलवाना, फर्ज कलमकार का।   कलम ले दिल दुखाए, तीखे शब्द बाण चलाए। खून के आंसू रुलाए, बिना बात विवाद बढ़ाए।   निर्दोषी पर आरोप लगाना, कर्म नहीं दरबार का। सच्चाई की खातिर…

  • कविता गऊ | Gau mata par kavita

    कविता गऊ gau mata par kavita   चीतो के आने से होता अगर विकास ll गायो के मरने पर उड़ता नही परिहास ll पूजते थे गाय को भूल गए इतिहास ll गोशाला मे ही अब भक्ष रहे गोमांस ll महंगाई के कारण मिलत नही है दानll भूखी गाय घूमती द्वारे द्वारे छान् ll रोटी देने…

  • घर घर बजे बधाई | Krishna Janmashtami Par Kavita

    घर घर बजे बधाई ( Ghar ghar baje badhai )   घर घर बजे बधाई लयबद्ध——ले के पहला पहला प्यार   जन्मे जग के पालनहार ,मैया करे लाल से प्यार , नाचे गाए सब नर नार, बधाई बज रही घर-घर में।।   भादो कृष्ण अष्टमी आई ,नंद बाबा घर खुशियां छाई। सखियां गावे मंगलाचार, घर-घर…

  • फुर्सत के पल | Fursat ke Pal

    फुर्सत के पल ( Fursat ke pal )    फुर्सत के पल मिल जाए आओ मीठी बात करे। हंस-हंसकर हम बतलाए एक नई मुलाकात करें। लो आनंद हंसी पलों का उमंगों का संचार करो। फुर्सत के पल सुहाने खुशियों का सत्कार करो। याद कर लो जरा उनको वक्त पड़े जो काम आए। बुलंदियों को पहुंचाया…

  • कैसे भरेंगे जख्म | Pollution poem in Hindi

    कैसे भरेंगे जख्म? ( Kaise bharenge zakhm )   ये घाटी, ये वादी, सब महकते फूलों से, काश, ये आसमान भी महकता फूलों से। फूलों से लदे मौसम ये मटमैले दिख रहे, समझ लेते प्रकृति का असंतुलन,फूलों से।   कंक्रीट के जंगल में अमराइयाँ न ढूंढों, लकड़हारे भी जाकर सीख लेते फूलों से। कटे जंगल,…

  • मां जगदंबे | Kavita Maa Jagdambe

    मां जगदंबे ( Maa Jagdambe )   मां जगदंबे प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी ************ शैलपुत्री मंगल आगमन, सर्वत्र आध्यात्म उजास । नवरात्र शुभ आरंभ बेला, परिवेश उमंग उल्लास । योग साधना श्री गणेश, साधक मूलाधार चक्र धारी । मां जगदंबे प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी।। हिमालय सुता भव्य दर्शन, मनमोहक असीम फलदायक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *