फुर्सत के पल | Fursat ke Pal

फुर्सत के पल

( Fursat ke pal ) 

 

फुर्सत के पल मिल जाए आओ मीठी बात करे।
हंस-हंसकर हम बतलाए एक नई मुलाकात करें।

लो आनंद हंसी पलों का उमंगों का संचार करो।
फुर्सत के पल सुहाने खुशियों का सत्कार करो।

याद कर लो जरा उनको वक्त पड़े जो काम आए।
बुलंदियों को पहुंचाया जुबां पे उनका नाम आए।

फुर्सत के पलों में संभालो अपने बूढ़े मां बाप को।
पैरों पे चलना सिखाया काबिल बनाया आपको।

परिवार में प्यार की बरसा मेघ बनकर छा जाओ‌।
फुर्सत मिल जाए तो भैया थोड़ा सा मुस्का जाओ।

फुर्सत हो तो मदद कर दो वक्त के उन मारो की।
हालातों से टक्कर ले रहे दीन हीन लाचारों की।

फुर्सत में भ्रमण पर चल दें देखे नये नजारे हम।
महकती हंसी वादियां वो पर्वत चांद सितारे हम।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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