कविता

Kavita | कविता क्या है

कविता क्या है 

( Kavita Kya Hai )

 

आज कविता दिवस है इसका नहीं था मुझे ध्यान
मेरे मित्र ने याद करा कर मुझे कराया अभिज्ञान

 

कविता क्या है कुछ कविता के बारे में लिखो
केवल  चार  पंक्तियां ही नहीं कुछ और लिखो

 

मैंने   भी   सोचा   पहले   कवि  है  या  कविता  है
या कविता द्वारा कवि है मुझको यह जानना अभी है

 

तब मैंने भी कविता के बारे में लिखना किया शुरू
दस  मिनट  में  ही  मुझे  यह  ज्ञान  दिया  गुरु

 

फिर मैं कुछ लिख पाया कविता क्या है यह सीख पाया
कविता  सुर  है  साज है जीवन का कविता हर राज है

 

यह गीत है नई नीति है प्रेमियों के दिल की प्रीत है
दिलों   को   भाने   वाली   सुर   और   संगीत  है

 

कविता   जीवन   की   तान   है  विरह  का  बान  है
मिलन की मस्ती है प्रेम को समझने का दिव्य ज्ञान है

 

कविता कवि की कल्पना है जीवन की संकल्पना है
जीवन  में  मिलने  वाला  हर  दुख दर्द ही अपना है

 

कविता जीवन का अंग है कभी ना उड़ने वाला रंग है
दो   प्रेमियों   के   बीच  उठने  वाली  नई  उमंग  है

 

कविता  प्रक्रति  श्रृंगार  है  जीने  का हर आधार है
पल-पल अनुभव करने वाला जीवन का व्यवहार है

 

भाषा की शान है कविता  हिंदी की जान है कविता

तन मन और जीवन ‘रूप’की पहचान है कविता

 

?

कवि : रुपेश कुमार यादव ” रूप ”
औराई, भदोही
( उत्तर प्रदेश।)

यह भी पढ़ें :

Bhojpuri Vyang | प्रधानी

Similar Posts

  • तभी बचेगा लोकतंत्र

    तभी बचेगा लोकतंत्र   आओ हम संकल्प सभी लें , जन गण मन को जगानेका ! भारत मांता की गरिमा संग , लोकतंत्र बचाने का !! रावण ने की थी जो गल्ती , उसका क्या परिणाम हुआ ! धृतराष्ट्र में मोह के कारण , उसके कुल का नाश हुआ !! जयचंद की ईर्ष्या द्वेष के…

  • कई उलझने हैं सुलझाने को | Poem Kai Uljhane hai Suljhane ko

    कई उलझने हैं सुलझाने को ( Kai uljhane hai suljhane ko )    नये रास्ते हैं आगे बढ़ जानेको सुंदर नजारे दिल मे समानेको नजर उठती है ठहर जाने को बेखौफ नदी जैसे बहजाने को रंजो गम को दबा जाने को महफूज जगह रुक जाने को बेपनाह मोहब्बत पा जाने को नैनों में ख्वाब सजा…

  • अवध के धाम जाएंगे

    अवध के धाम जाएंगे   अवध के धाम जाएंगे, राम के दर्शन पाएंगे। उत्सव मिल मनाएंगे, झूम-झूम नाचे गाएंगे। अवध के धाम जाएंगे शब्दाक्षर मंच पावन, संगम होने वाला है। मनोरम छटा भावन, मोती पिरोने वाला है। राष्ट्र के गीत गुंजेंगे, राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। कवि मुखर सुनाएंगे, फनकार मिलन होगा। शब्दाक्षर हुआ सिरमौर, पदाधिकारी आएंगे।…

  • सबके राम | Sabke Ram

    सबके राम ( Sabke Ram )   मेरी राम ,तुम्हारे राम कौशल्या सुत राज दुलारे राम पधार रहे फिर अवध की नगरी कर लो दर्शन आठों याम सीताराम जय जय सीताराम मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ऋषि मुनियों के उद्धारक श्री राम सनातन धर्म के प्रतिपालक श्री राम हममें राम तुममे राम हृदय में सबके बसते…

  • बेटे भी दहलीज छोड़ चले

    बेटे भी दहलीज छोड़ चले ऊंची शिक्षा पाने को जो रुख हवा का मोड़ चले। बेटियों की बात नहीं बेटे भी दहलीज छोड़ चले। कोचिंग क्लासेज हॉस्टल शिक्षा का ठिकाना है। कड़ी मेहनत रातदिन कर मंजिल तक जाना है। घर आंगन दीवारें दहलीज सूना सूना सा लगता है। मात पिता की याद सताती दीप प्रेम…

  • चरित्रहीन | Charitraheen

    चरित्रहीन ( Charitraheen ) “घर आकर बताता हूँ”जब जब उसने कुछ पूछना चाहाहमेशा यही उत्तर मिलाऔर फिर कभी ना वो समय आयाना ही उसे कुछ बताया गया।उसे कभी नहीं लगा किवह भी किसी की ज़िंदगी का हिस्सा है।दोनों कभी नहीं बन पायेएक दूसरे के सहभागी,बस एक दूसरे को ज़िम्मेदारी बनढोते रहे।बिना ये सोचे किएक समय…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *