खरगोश की खरीददारी

खरगोश की खरीददारी

खरगोश की खरीददारी

*******

लाए बाजार से
शशक दो
रखा नाम काॅटन और स्नो।
व्यय किए रुपए अर्द्ध सहस्र,
बच्चे दोनों से खेलने में हैं व्यस्त।
परेशान किए थे सप्ताह भर से,
रट लगाए थे- पापा ला दो न झट से।
बाजार नहीं है इसका यहां,
भटका सप्ताह भर जहां तहां।
यीष्ट मित्रों को फोन लगाया,
रिश्तेदारों के यहां नजरें दौड़ाया।
कई जगह से निराश हो लौट आया;
अचानक एक मित्र ने एक पता बताया।
सोचा कल संडे है,जाकर देख लूंगा,
मिल जाएगा तो खरीद ही लूंगा।
आज सुबह सवेरे ही निकले घर से ,
पिता पुत्र बड़ी उत्सुकता से!
एक जगह से मिली निराशा,
लगा रखी थी जहां सप्ताह भर से आशा।
पुत्र हुआ निराश,
मैंने कहा- न हो उदास;
हम दोनों कर ही रहे हैं प्रयास।
चलो दो तीन दोस्तों को फोन मिलाते है,
देखो आज वो क्या बताते हैं?
लेकिन नहीं बनी बात,
अब तो मैं भी मन ही मन हो गया निराश!
एक ही जगह से अब बंधी थी उम्मीद-
लिए चल पड़े स्कूटर,कुछ ज्यादा थी स्पीड।
वहां पहुंच कर देखा-
दर्जन भर खरहे पड़े थे पिंजरे में
पूछा क्या रखे हैं विक्रय को?
जवाब मिला हां,
दिल बहुत खुश हुआ!
पुत्र को नहीं था खुशी का ठिकाना,
पूछा देंगे कितने में जोड़ा यह बताना?
मांगा रूपए हजार,
मैंने कहा यह तो बहुत ज्यादा है यार!
कुछ कम कीजिए?
कुछ परिचय अपना उनको दिए;
तब जाकर कुछ कम किए।
छह सौ तक आए,
फिर मैंने पांच सौ का नोट उन्हें थमाए।
कहा रख लीजिए,
ये दोनों एक डब्बे में रख दीजिए।
बेचारे थे नेक इंसान,
ली मेरी बात मान।
उन्होंने डब्बा बेटे को थमाए,
बोले ज्यादा न हिलाए डुलाए;
फिर ख़ुशी ख़ुशी हम दोनों घर लौट आए।
अब जाकर दम लिया,
वरना सप्ताह भर से परेशान था कर दिया।
कुछ इस तरह खरीददारी हुई पूरी,
बिना काव्य रचना के यह कहानी रहती अधूरी!

 

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : 

सबकी इच्छा पूर्ति मुश्किल है

Similar Posts

  • चीनी है मीठा ज़हर | Chini par Kavita

    चीनी है मीठा ज़हर ( Chini hai meetha zehar )    गुड़ सभी खाओ लेकिन यह चीनी कोई न खाओ, समझो और समझाओं यह बात सबको बताओ। यही चीनी है दुनिया मे सभी के लिए हानिकारक, बिमारियों का घर बना देती है यारों इसे छुडाओ।। यह चीनी शरीर में ट्राइ-ग्लिसराइड को बढ़ाता है, जिससे पक्षाघात…

  • लिखो एक नया इतिहास | Likho ek Naya Itihaas

    लिखो एक नया इतिहास ( Likho ek naya itihaas )   लिखो एक नया इतिहास,उत्साह उमंग जोश से अद्भुत अनूप मनुज जीवन, ईश्वर अनमोल उपहार । आर्त अनंत अलौकिकता, रग रग प्रसूनी बहार । परिश्रमी तपनें मिटाती, असंभवता जीवनकोश से । लिखो एक नया इतिहास,उत्साह उमंग जोश से ।। नतमस्तक वृहत बाधाएं, घनिष्ठ मित्र आत्मविश्वास…

  • दिल की अभिलाषा | Dil ki Abhilasha

    दिल की अभिलाषा ( Dil ki abhilasha )    चाह नहीं मैं चाहत बनकर प्रेमी-युगल को तड़पाऊं चाह नहीं, खिलौना बनकर टूटू और बिखर जाऊं चाह नहीं, पत्थर बनकर निर्मम,निष्ठुर कहलाऊं चाह नहीं, बंधन में पड़कर स्पंदन की प्रीत जगाऊं चाह मेरी है धड़कन बनकर रहूं सदा कुर्बान और तिरंगे में लिपट कर हो जाऊं…

  • शिव आरती | Shiva Aarti

    शिव आरती ( Shiva Aarti )    ओम जय डमरूधारी, तेरी महिमा अतिभारी। मात -पिता तू मेरे, मात-पिता तू मेरे, आया तेरे द्वारी। ॐ जय डमरूधारी… (2) श्वेताम्बर, पीताम्बर सोहे अंग तेरे, शिव सोहे अंग तेरे। भांग, धतूर ही लाया, भांग, धतूर ही लाया और न कुछ मेरे। ओम जय डमरूधारी…. ओम जय डमरूधारी, तेरी…

  • वृक्ष धरा के मूल | Vriksh Dhara ke Mool

    वृक्ष धरा के मूल ( Vriksh dhara ke mool )  पर्यावरण संरक्षण पर कविता  वृक्ष धरा के मूल, भूल से इनको काटो ना नदी तालाब और पूल, भूल से इनको पाटो ना।। वृक्षों से हमें फल मिलता है एक सुनहरा कल मिलता है पेड़ रुख बन बाग तड़ाग सब धरती के फूल ,भूल से इनको…

  • जिन्दगी का गुलिस्तां | Zindagi ka Gulistan

    जिन्दगी का गुलिस्तां ( Zindagi ka gulistan )    झुकता है आसमां उसे झुकाकर तो देखो, रूठने वाले को भी मनाकर तो देखो। प्यार में होती है देखो! बेहिसाब ताकत, एक बार जीवन में अपनाकर तो डेखो। सिर्फ दौलत ही नहीं सब कुछ संसार में, किसी गरीब का आंसू पोंछकर तो देखो। दुनिया की किसी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *