खोखले शब्द | Khokhale Shabd

खोखले शब्द

( Khokhale shabd )

 

शब्द कोष मे ऐसे शब्द हैं ही नहीं की
जो भूख से ऐंठती अंतड़ियों के दर्द
भूख से रोते बिलखते बच्चों की याचना भरी दृष्टि
खाली पड़े बर्तनों की खन खनाहट को
शब्दों में व्यक्त कर सकें

वो शब्द ही नही बने
जो ऐसी स्थिति में मां को ढांढस बंधा सकें
जो मदद की अपेक्षा से जाए
और लोगों की आंखों मे देखे
जरूरत के बदले जरूरत की पूर्ति की शर्त

वो शब्द ही नही बने
जिसे आत्मा सह न सके कह भी न सके
बच्चों की मजबूरी के आगे
निभा न सके अपना धर्म
न बच्चों का न समाज का

शब्द तो केवल वे ही बने हैं
जो दिला सकें मौखिक संतुष्टि
कर सकें व्यक्त खोखले दुःख और संताप
या फिर अपनी इच्छा की पुष्टि की मंजूरी
एक मां के सामने जो
सिर्फ खोखले और घिनौने ही हैं

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

लक्ष्य तक | Lakshya Tak

Similar Posts

  • नेह शब्द नही | Neh Shabd Nahi

    नेह शब्द नहीप्रसंग का विषय नहीयह दृष्टिगोचर नही होतायह कहा भी नही जातायह सिर्फ और सिर्फअनुभूत करने का माध्यम हैयह अन्तरतम मेंउठा ज्वार हैनितान्त गहराजिसमें केवल समाहित होना हैउसके बाद फिर होश ही कहाँ रहता हैयह एक ऐसा आल्हाद हैजिसको शब्दातीत, वर्णातीतनही किया जा सकता।यह शब्दों के बंधनों में नहीं बंधतासिर्फ अनुभूत किया जा सकता…

  • चक्र सुदर्शन धारी | Poem chakra sudarshan dhari

    चक्र सुदर्शन धारी ( Chakra sudarshan dhari )   चक्र सुदर्शन धारी केशव लीला अपरंपार तेरी मंझधार में डूबी नैया आकर करना पार मेरी   मुरली मोहन माधव तेरी मधुर मनोहर शान है सकल चराचर के रखवाले जन करे गुणगान है   संकट मोचन मोहिनी मूरत मुरली अधर सुहानी कृष्ण कन्हैया दीनदयाला भजन करते सुरज्ञानी…

  • बात बात में अलगाव की | Kavita baat baat mein algav ki

    बात बात में अलगाव की ( Baat baat mein algav ki )  #JNU बात बात में अलगाव की भाषा बोल रहे हो तुम। शिक्षा के मंदिर में नित,विष को घोल रहे हो तुम।।   कैसी आजादी की तुमने, मांग करी है पढ़ने में। बुद्धि कौशल लगा घूमते, षड़यंत्रों को रचने में।।   आजादी की मांग…

  • वही खत वही दीवानगी चाहिए

    वही खत वही दीवानगी चाहिए वही खत वही दीवानगी चाहिए दोस्त बचपन का वह सादगी भरी जिंदगानी चाहिए खेल सकुं गुल्ली डंडा, छुपन छुपाई, गुड्डे गुड़ियों के साथ ऐसी वर्दान कि रब से मेहरबानी चाहिए वही खत वही,,,,,,, नहीं चाहिए माया ममता नहीं मकड़जाल कि जिंदगानी चाहिए वह खेल वह बचपन वह गांव कि हावा…

  • चुनाव

    चुनाव सही व्यक्ति को – – – – – – ज्यों ज्यों चुनाव आ रहे हैं।नेताजी लाड़ जता रहे हैं। जातिवाद की दुहाई दे रहे ।खुद चरित्र की सफाई दे रहे । वाणी में मधु घुल गया है।ओठों पै गुलाब खिल गया है। दुखती रगें पहचानते हैं।कैसे संतुष्ट करें जानते हैं ? मर्यादाऐं तोड़ रहे…

  • नये साल में | Kavita naye saal mein

    नये साल में! ( Naye saal mein )   आओ मोहब्बत का फूल खिलाएँ नए साल में, बहे न कहीं इंसानियत का लहू, नए साल में। अंधेरे न लूट पाएँ अब उजालों की दौलत, कोई गमगीन लम्हा न फटके नये साल में। धरती भी महके और ये फिजायें भी महकें, उगेंगे ख्वाबों के दरख्त देखो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *