Khoobsurati ki Tareef par Kavita

खूबसूरत | Khoobsurati ki Tareef par Kavita

खूबसूरत

( Khoobsurat ) 

 

खूबसूरत नज़र आती हो,
अदाओं से भी लुभाती हो,
आती हो जब भी सामने
सच में कयामत ढाती हो।

माथे पर बिंदी सजाती हो,
आँखों में कजरा लगाती हो,
महकाती हो बालों में गजरा
सच में कयामत ढाती हो।

हाथों में मेहंदी रचाती हो,
चूड़ी कंगना खनकाती हो,
ओढ़ती हो जब तुम दुपट्टा
सच में कयामत ढाती हो।

मोतियों का हार सजाती हो,
पायल अपनी बजाती हो,
करते हैं घुँघरू छम छम
सच में कयामत ढाती हो।

नैनो के तीर चलाती हो,
घायल तुम कर जाती हो,
आती हो जब भी सामने
सच में कयामत ढाती हो।

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

यह भी पढ़ें :-

वाह रे टमाटर | Wah re Tamatar

 

Similar Posts

  • झरती बुंँदियों संग आखरों की जुगलबंदी

    झरती बुंँदियों संग आखरों की जुगलबंदी…   सावनी सहर का आलम गर्म चाय की प्याली और हम पसंदीदा पुस्तक का साथ नर्म – नम बूंँदों की तुकबंदी ऐसी बंदिश इस उजास में रच देती है सबसे सुहाने पल। आंँगन बुहारती बूँदें आनंद वर्षा में भिगो भावों की तपिश को शीतल कर देती है कि नई…

  • Hindi kavita : मेरी इच्छा

    मेरी इच्छा ( Meri ichha : Kavita )    काश हवा में हम भी उड़ते तितलियों से बातें करते नील गगन की सैर करते अपने सपने को सच करते बादलों को हम छू लेते चाँद पर पिकनिक मनाते  मनचाही मंजिल हम पाते पेड़ो पर झट चढ़ कर हम जंगली जानवरों से बातें करते पंछियों से…

  • खुद भी हिंदी बोलिये | 14 September Hindi diwas par kavita

    खुद भी हिंदी बोलिये ( Khud bhi hindi boliye )   खुद भी हिंदी बोलिये, औरों को दो ज्ञान। हिंदी में ही है छिपा, अपना हिंदुस्थान।।   चमत्कार हर शब्द में, शब्द शब्द आनंद। विस्तृत है साहित्य भी, दोहा रोला छंद।।   सब भाषा का सार है, सबका ही आधार। माँ हिंदी की वंदना, सुधि…

  • फासला | Phasala

    फासला ( Phasala )   सोचता हूं उकेरूं आज आपका चित्र या लिखूं अनाम कुछ भाग्य का लेखा लिखा तो बहुत कुछ अब तक हमने फिर भी लगता है की कुछ नही लिखा रख लिया हूं स्मृतियों को सहेजकर मिले थे आप जब हमसे पहली बार हुई न कुछ बातें ,तब भी बहुत हो गईं…

  • अमर

    अमर दुनिया की हरवस्तु जन्म लेती हैऔर मरती हैइस मरणधर्माजगत में अमर कीकल्पना करने वालाकोई महान हीकल्पनाकार होगाकर्मों के सही सेक्षयोपशम होने परमनुष्य भव मेंसही से कर्मों काक्षयकर संपूर्णज्ञान प्राप्त होनेपर मिलन जबआत्मा से स्वयं काहोता तो आत्माके शुद्ध रूप सेफिर कोई भेदभेद न रहताज़िंदगी का सफ़रआयुष्य जितनाकेवली का होताधर्म का हीउस अवस्था मेंपहुँचने का…

  • आजादी का अमृत उत्सव | Poem azadi ka amrit utsav

    आजादी का अमृत उत्सव (  Azadi ka amrit utsav )   आजादी का अमृत उत्सव, घर में चलो मनायेंगे। पापा ला दो एक तिरंगा, गीत वतन के गायेंगे।। वीर शहीदों की कुर्बानी, फिर से याद करेंगे हम भारत माँ की जय जयकार, मिलकर आज कहेंगे हम रंगोली तोरन हारों से, आँगन खूब सजायेंगे। पापा ला…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *