कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

चलो थपकी देकर सुलाओ हमें तुम
कोई प्यारी लोरी सुनाओ हमें तुम

नहीं याद आये कभी माँ की हमको
वो स्वादिष्ट व्यंजन खिलाओ हमें तुम

रहें जीते हम बस तुम्हें देखकर ही
कभी रूप ऐसा दिखाओ हमें तुम

किया प्यार तुमसे यहाँ हमने जितना
वही हो सके तो जताओ हमें तुम

नहीं रोक सकती हमें बेड़ियां ये
कभी अपने घर पर बुलाओ हमें तुम

बहुत चाह थी की ज़माने से लड़कर
छुपा प्यार दिल का दिखाओ हमें तुम

चुभा दिल में जो भी है काँटा तुम्हारे
प्रखर पीर वो अब दिखाओ हमें तुम

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

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