Shyam Base Ghat Ghat

कृष्ण लला | मत्त गयंद सवैया

कृष्ण लला

कृष्ण लला अवतार लिए चॅंहु ओर बजे दिन रैन बधाई।
सोहर गाय रहीं ब्रज नार सुहासित नंद जसोमति माई।
अंबर से अवनी तक आज सभी नर नार रहे मुसकाई।
खेल रचा बिधना चुपचाप निहार रहे क्षण मंगलदाई।।

केशव बेटिन को दुख कष्ट निवार धरा पर लाज बचाओ
घूम रहे चॅंहु ओर दुशासन चीर हरें प्रभु चीर बढ़ाओ।
रास बिसारहु त्याजहु बांसुरि चक्र सुदर्शन आज चलाओ ।
रोइ पुकार रही अबला मधुसूदन देर करो नहिं आओ।।

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

है डर क्या | Ghazal Hai Dar Kya

Similar Posts

  • समांं महका दो आज | Chhand

    समांं महका दो आज (  मनहरण घनाक्षरी छंद )   गीतों का सजाओ साज समां महका दो आज झड़ी बरसाओ ऐसी धूम होनी चाहिए   खूब गाओ छंद गीत मुक्त कंठ नव गीत रस बरसे प्रेम का भाव होना चाहिए   शौर्य पर लिखो गीत योद्धा जंग जाए जीत हिम्मत हौसला मिले ओज होना चाहिए…

  • सतरंगी फाग | Chhand Satrangi Fag

    सतरंगी फाग ( Satrangi fag )    इंद्रधनुषी रंगों का, सतरंगी फाग छाया। बसंत बहारें चली, मस्त लहर लहर। प्रियतम भीगा सारा, सजनी भी भीग गई। रंगीला फागुन आया, बरसा पहर पहर। गाल गुलाबी महके, रंग गुलाल लगाके। फाग गाते नर नारी, गांव शहर शहर। झूमके नाचे रसिया, सुरीली धमाल बाजे। बांसुरी की तान छेड़े,…

  • शालीनता | देव घनाक्षरी | Chhand Shalinta

    शालीनता ( Shalinta )   शालीनता सुशीलता सौम्य स्वभाव बनाए संस्कार हमारे शुभ हो कीर्ति पताका गगन   विनय धीरज धर भाव विमल धार लो उर आनंद बरसे हरसे मन का चमन   बहती पावन गंगा प्रेम सिंधु ले हिलोरे सत्कार मिले सबको, कर जोड़ करें नमन   सुंदर सी सोच रख विनम्र हो भाव…

  • प्यारे राम | Poem on Shree Ram

    प्यारे राम ( Pyare Ram )  हरिहरण घनाक्षरी आराध्य हमारे राम, जन जन प्यारे राम। दीन रखवारे राम, भजे राम राम सब। कौशल्या के तारे राम, दशरथ प्यारे राम। सबके सहारे राम, आओ मेरे राम अब। सीताराम सीताराम, रघुपति राजा राम। अवध विराजे राम, पीर हरे राम सब। दीनबंधु दुखहर्ता, दया सिंधु प्यारे राम। जग…

  • भक्त प्रह्लाद | Bhakt Prahlad

    भक्त प्रह्लाद ( Bhakt prahlad )     होलिका भी जल गई, प्रह्लाद को भर गोद, हर्ष जग में छा गया, सब होली मनाइए।   सद्भाव की घटाएं भी, लाई रंगों की बहार, घट घट हर्ष छाया, मस्त होकर गाइए।   सच्चे भक्त प्रह्लाद जो, प्रभु का करते ध्यान, दीनानाथ रक्षा करें, हरि ध्यान लगाइए।…

  • जय हिंद जय भारत | लावणी छन्द

    जय हिंद जय भारत इस माँ से जब दूर हुआ तो , धरती माँ के निकट गया । भारत माँ के आँचल से तब , लाल हमारा लिपट गया ।। सरहद पर लड़ते-लड़ते जब , थक कर देखो चूर हुआ । तब जाकर माँ की गोदी में , सोने को मजबूर हुआ ।। मत कहो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *