क्यों रहे कोई

क्यों रहे कोई भी ईज़ा मोजूद

क्यों रहे कोई भी ईज़ा मोजूद

क्यों रहे कोई भी ईज़ा मोजूद।
जब मसीह़ा है हमारा मोजूद।

वो ही रहता है हमेशा दिल में।
अ़क्स आंखों में है उसका मोजूद।

दिन भी दिन सा न लगेगा यारो।
दिल में जब तक है अंधेरा मोजूद।

इश्क़ ज़िन्दा है जहां में जब तक।
हुस्न तब तक है जहां का मोजूद।

जिससे रोशन है ये सारी दुनिया।
आसमां पर है वो तारा मोजूद।

कुल जहां करता है उसकी इज़्ज़त।
जिसकी फ़ितरत में है लज्जा मोजूद।

उसने बचपन में दिया था जो फ़राज़।
आज तक है वो खिलौना मोजूद।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • आरज़ू के फूल | Aarzoo ke Phool

    आरज़ू के फूल ( Aarzoo ke Phool ) बिखरे हैं मेरे दिल में तेरी आरज़ू के फूलआकर समेट ले ये तेरी जुस्तजू के फूल।। ख़ुशबू हमारे वस्ल की, फ़ैली है हर जगहहर जा बिछे हुए हैं, यहाँ गुफ़्तुगू के फूल महफूज़ रक्खे दिल में तेरी चाहतें जनाबऔर याद जिसने बख़्शे ग़म-ए-सुर्ख़रू के फूल दिल का…

  • कितने आलोक समाये हैं | Kitne Alok

    कितने आलोक समाये हैं ( kitne alok samay hai)    तुमने जो निशिदिन आँखों में आकर अनुराग बसाये हैं हम रंग बिरंगे फूल सभी उर-उपवन के भर लाये हैं हर एक निशा में भर दूँगा सूरज की अरुणिम लाली को बाँहों में आकर तो देखो कितने आलोक समाये हैं प्रिय साथ तुम्हारा मिलने से हर…

  • ज़िन्दगी ले हमें जिधर आई | Zindagi Shayari Life

    ज़िन्दगी ले हमें जिधर आई ज़िन्दगी ले हमें जिधर आईएक वो ही हमें नज़र आई इस तरफ जो अभी नज़र आईहर कली देख अब निखर आई उसकी हालत को देखकर यारोआज यह आँख मेरी भर आई जिस गली को भुला दिया कब केफिर वहीं पे लिए डगर आई दोनों हाथो से जब दुआ दी तोज़िन्दगी…

  • बिगाड़ देती है | Ghazal Bigaad Deti Hai

    बिगाड़ देती है ( Bigaad Deti Hai ) बड़े बड़ों को ये चाहत बिगाड़ देती है ये होशमंदो को दौलत बिगाड़ देती है बढ़ावा दो न शरारत को तुम तो बच्चों की कि उनको बेजा हिमाक़त बिगाड़ देती है तुम्हारे दीद की हसरत हमेशा ही रहती हमें ये वस्ल की आदत बिगाड़ देती है गुज़रता…

  • मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं

    मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैंलगा के ताज को ठोकर खड़े हैं न थामा हाथ भी बढ़कर किसी नेयूँ तन्हा हम शिकस्ता-तर खड़े हैं करूँ कैसे तुम्हारा मैं नज़ाराज़माने में सौ दीदा-वर खड़े हैं शजर आता न कोई भी नज़र अबबशर सब धूप में थक -कर खड़े हैं मिरे ज़हनो गुमाँ…

  • दिल लगा मत दिल्लगी में

    दिल लगा मत दिल्लगी में है सुकूँ बस दोस्ती में ! चैन उजड़े दुश्मनी में ए ख़ुदा पैसे मुझे दे जी रहा हूँ मुफ़लिसी में कौन मिलता प्यार से है अब नहीं उल्फ़त किसी में दे ख़ुशी अब तो खुदाया ग़म भरे है जिंदगी में हिज्र बस आज़म मिलेगा दिल लगा मत दिल्लगी में शायर: आज़म…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *