Lagaav

लगाव | Lagaav

लगाव

( Lagaav )

 

यदि आप अपनी श्रेष्ठता को
सिद्ध करते हुए किसी पर
अपना अधिकार जमाना चाहते हैं

या रुआब में उसे दबाना चाहते हैं
तो निश्चय ही वह झुक जाएगा
कर देगा स्वीकार्य आपको किंतु

आपको अपनापन नहीं दे पाएगा
लगाव की डोर से बंध नहीं पाएगा

सम्मान खरीद कर मांग कर या रुआब से
हासिल नहीं किया जा सकता
वह तो एक अपन्त्वता का एहसास है
बिना आपके कमी का अनुभव है
भावनात्मक आकर्षण है
जो दोनों को करीब ले आता है

रिश्ते बनाने से बनते हैं और
निभाने से निभते हैं
उस पर किसी भी प्रकार की
शर्त या अंकुश
उसमें दरार ही पैदा करते हैं दूरियां ही बढ़ते हैं

जहां विश्वास और कोमलता की जरूरत हो
वहां लगाम या चाबुक की उपयोगिता नहीं होती
लगाव तो आत्मिक होता है
उसे बंधक नहीं बनाया जा सकता

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

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