सादगी | Laghu Katha Saadgi

निशांत आज अपनी मां के साथ लड़की देखने गया उसकी मां ने निशांत के कहने पर मॉर्डन दिखने वाली लड़की की खोज पूरी कर ली थी।

निशांत की मां ने आज उसे लड़की से मिलने के लिए मना ही लिया था ताकि वो भी शादी करके अपना घर बसा ले पर मामला यहां तो उल्टा ही हो गया ।

मॉर्डन दिखने वाली लड़की से मिलने के बाद भी वह खुश नही लग रहा था । शायद यह निशांत के घर का परिवारिक और संस्कारिक माहौल का ही असर था जो वह उस लड़की से मिलकर भी खुश नहीं हुआ उसे सादगी की कमी खल रही थी।

निशांत को उसके विचार सुनकर और उससे वार्तालाप करके अब यह समझ आ गया था की पहनावा और शख्सियत दोनो अलग हैं।

किसी को मॉर्डन कपड़े पहना सकते हैं परंतु किसी का व्यक्तित्व नहीं बदल सकते एक साधारण दिखने वाली लड़की को आप जींस टॉप पहन कर मॉडल बना सकते हैं परंतु जींस टॉप पहनकर अपने आप को मॉर्डन होने के घमड से चूर और फूहड़ता से बात करने वाली लड़की को संस्कारिक नहीं बना सकते।

आज निशांत को सादगी का सही महत्व समझ आया। हम कुछ भी पहने कुछ भी ओढ़े पर सलीका और सादगी आपके व्यक्तित्व में दिखाई देता है । आपकी वैचारिक भाषा में दिखाई देता हैं।

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

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