lekhni ki Dhaar

लिखेंगे हम लेखनी की धार | lekhni ki Dhaar

लिखेंगे हम लेखनी की धार

( Likhenge hum lekhni ki dhaar )

 

हम पैसे देकर रचना सुनो कभी नहीं छपवाएंगे।
दम होगा लेखनी में प्रकाशक खुद चले आएंगे।

लिखेंगे हम भी लेखनी की धार लोहा मनवाएंगे।
सृजन में शक्ति बड़ी अपार वो रस धार बहाएंगे।

सजाकर पुष्प भावों के हम गुलशन महकाएंगे।
दिलों तक दस्तक दे जाए वो तराने गीत गाएंगे।

वाणी दे हमको वरदान शब्दों का जाल बिछाएंगे।
साधक गूंथ रहे सुमन हार शारदे चरण चढ़ाएंगे।

महफिल महके बारंबार शब्द वो चुनकर लाएंगे।
कविता से गूंजे दरबार मां भारती शीश नवाएंगे।

ओज की कलम भरे हूंकार वीरों में जोश जगायेंगे।
काव्य की लेकर हम फुहार गीतों का रस बसाएंगे।

भावों की बहती चले बयार शब्द जादू दिखलाएंगे।
लाए अधरों पर मुस्कान वो कविता रचकर जाएंगे।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

टूटकर फूल डाली से | Phool par Kavita

Similar Posts

  • कोरोना की बरसी !

    कोरोना की बरसी ! ***** सुन आई हंसी देखा केक काट थी रही! किसी ने कहा- जन्मदिन मना ली? अब जाओ इतना भी न सताओ। करोड़ों पर तेरी कृपा हुई है लाखों अब भी पीड़ित हैं इतने ही हुए मृत हैं। न दवा है न वैक्सीन और कितना रूलाएगी? ऐ हसीन! हसीन कहने पर लोग…

  • रश्मिरथी | Rashmirathi

    रश्मिरथी ( Rashmirathi )    देख सखी दिनकर नहीं आए आहट सुन रश्मि रथियों ने खोली द्वारा निशाचर डींग हांक रहे थे जो वह दुम दबाकर गये भाग कल की रात्रि अति काली जो अब ना दे दिखाई सोच सखी उनके आने पर क्या क्या देगा दिखाई तेज स्वरूप- सिंहासन संपूर्ण क्षितिज सुनहरी छाई निशाचर…

  • डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे की कविताएं | Dr. Ritu Sharma Pandey Poetry

    ये साल यह साल भी यूँ ही गुज़र जाने वाला हैचुनौतियों से भराकहीं पर युद्ध, तो कहीं बम बारीआने वाले साल में न जाने क्या होगान जाने ग़मों की अन्धेरी रात होगीया सुखों का सवेरा होगाचलो शुक्र है हमको है यह पहले से नहीं पतामिलेगा वही जो भाग्य में है लिखाकुछ न कुछ तो हर…

  • लालसा | Poem laalasa

    लालसा ( Laalasa )   लालसा न चाह का है  ,जीवन में कुछ पाने को लालसा न बड़ा बनू, न बहुत कुछ कर जाने को छीन कर खुशियां किसी की, रोटियां दो वक्त की मैं चलूं तारों को लाने,छोड़ इन्हें मर जाने को धिक्कार है जीवन को ऐसे,धिक्कारता हूं लोग को जो अपनी ही खुशियों…

  • मैं चुप हूं | Main Chup hoon

    मैं चुप हूं ( Main Chup hoon )    मेरे पास शब्दों की माला है पास मेरे संस्कारों की थाती है जानती हूं ,अच्छाई और बुराई के भेद मेरी कलम ने सिखाया है मुझे न करें मुझे बेचारी और बेबस समझने की भूल…. मैं चुप हूं ,तो महज इसलिए की मेरे संस्कार इसकी गवाही नहीं…

  • मणिपुर की व्यथा | Manipur ki Vyatha

    मणिपुर की व्यथा ( Manipur ki vyatha )   मूक बधिर हुआ धृतराष्ट्र द्वापर जैसी फिर चूक हुई सत्ताधारी अब चुप क्यों है, राज सभा क्यूं अब मुक हुई ।। लोक तंत्र की आड़ न लेना क्या वोटो के ही सब गुलाम है या द्वापर जैसी सभा हुई एक पांचाली आज भी समक्ष सबके निर्वस्त्र…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *