माँ क़रीब है यहाँ | Maa Kareeb hai Yahan

माँ क़रीब है यहाँ

( Maa kareeb hai yahan ) 

 

न कोई मेरे माँ क़रीब है यहाँ
सभी इस नगर में रकीब है यहाँ

किसी पर यहाँ तो यकीन हो न हो
न माँ से ही अच्छा हबीब है यहाँ

सभी माँ अधूरे वफ़ा मुहब्बत से
ऐसा कौन जो खुशनसीब है यहाँ

ख़ुदा से दुआ की बहुत मगर मैंने
न बदला मगर माँ नसीब है यहाँ

मुझे कौन देगा अनाज बस्ती से
बहुत लोग ऐ माँ ग़रीब है यहाँ

करे ग़म का आज़म इलाज़ जो मेरे
न कोई माँ ऐसा तबीब है यहाँ

 

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

देश में | Desh Mein

Similar Posts

  • रह गए हम | Rah Gaye Hum

    रह गए हम हम नज़र होते होते रह गए हमहमसफ़र होते होते रह गए हम शब में लगने लगा मुकम्मल हैऔर सहर होते होते रह गए हम हमने सोचा किसी के हो जाएँहाँ मगर होते होते रह गए हम बस कहानी थी यूँ तो कहने कोचश्मे-तर होते होते रह गए हम साथ हमने बाताए सात…

  • यह हा़ल है हमारा | Ye Haal Hai Hamara

    यह हा़ल है हमारा ( Ye Haal Hai Hamara ) यह हा़ल है हमारा मुरव्वत के बाद भी।तन्हा खड़े हैं सबसे मुह़ब्बत के बाद भी। अल्लाह जाने किसकी लगी है नज़र हमें।अफ़सुर्दगी है रुख़ पे मुसर्रत के बाद भी। रह-रह के उनकी याद सताती है इस क़दर।आती नहीं है नींद मशक्कत के बाद भी। लाया…

  • जो यहाँ | Ghazal Jo Yahan

    जो यहाँ ( Jo Yahan ) हमनशीं हमनवा दिलदार हुआ करते थे इश्क़ के वो भी तलबगार हुआ करते थे लूट लेते थे वो पल भर में ही सारी महफ़िल शेर ग़ज़लों के असरदार हुआ करते थे चंद सिक्को में ये अख़बार भी बिक जाते अब जो कभी सच के तरफ़दार हुआ करते थे सबको…

  • सब अदा हो गये

    सब अदा हो गये प्यार के वादे जब सब अदा हो गयेसारे शिकवे गिले ख़ुद हवा हो गये इस इनायत पे मैं क्यों न क़ुर्बान हूँएक पल में वो ग़म आशना हो गये उनकी क़ुर्बत से आता है दिल को सुकूंँदर्द- ओ- ग़म की वही अब दवा हो गये दिल के मुंसिफ का हर फ़ैसला…

  • ज़िन्दगी ले हमें जिधर आई | Zindagi Shayari Life

    ज़िन्दगी ले हमें जिधर आई ज़िन्दगी ले हमें जिधर आईएक वो ही हमें नज़र आई इस तरफ जो अभी नज़र आईहर कली देख अब निखर आई उसकी हालत को देखकर यारोआज यह आँख मेरी भर आई जिस गली को भुला दिया कब केफिर वहीं पे लिए डगर आई दोनों हाथो से जब दुआ दी तोज़िन्दगी…

  • सभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले

    सभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले सितम ही सहते रहे वो तो ला-मकाँ निकलेसभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले न कल ही निकले न वो आज जान-ए-जाँ निकलेकि चाँद ईद के हैं रोज़ भी कहाँ निकले तबाही फैली कुदूरत की हर तरफ़ ही यहाँकहाँ कोई भी मुहब्बत का आशियाँ निकले रहे-वफ़ा में न…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *