मैं | Main

मैं

( Main ) 

 

टूटे हुए दिल की दास्तान हूं मैं
उजड़े हुए चमन का बागबान हूं मैं
खिले तो फुल मगर , सब बिखर गए
खड़ा पतझड़ सा ,नादान रह गया हूं मैं

चले तो थे सांस मिलकर कई लोग
रह गया तन्हा छूटा हुआ कारवां हूं मैं
बट गई मंजिले भी उनकी अपनी
हारी हुई उम्मीद का बचा गुमान हूँ मैं

करें नाज किस फूल की महक पर
आंखों में जलता हुआ एक धुआँ हूं मैं
कोहरे के बीच खड़ा हूँ , जैसे ऊँचे टीले पर
तलहटी में लुढ़कता हुआ टुकड़ा सा हूं मैं

मुझे ही पता नहीं कौन हूं कहां हूं मैं
कह नहीं पाऊं की जीता या हारा हूं मैं
रहा गगन पर कभी अब टूटा हुआ तारा हूं मैं
खड़ा राह में खड़ा खुद का ही सहारा हूं मैं

जीत कर भी खेल में बाजी हारा हूं मैं
कहते हैं लोग अभी भी मुझे, प्यारा हूं मैं
करता हूं शुक्र अदा कि अभी जिंदा हूं मैं
हारा नहीं जीवन में कुछ ही थका हूं मैं

टूटे हुए दिल की दास्ताँ हूँ मैं
उजड़े हुए चमन का बाग़बा हूँ मैं

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/log/

Similar Posts

  • आधार | Aadhaar

    आधार ( Aadhaar )    मिले हुए संस्कार ही करते हैं वैचारिक सृजन सोच मे संगत का प्रभाव भी संभावित है किंतु ,यदि पृष्ठभूमि भी सुदृढ़ हो तो बारिश की बूंदें गिरकर भी बह जाती हैं जीवन की नींव मजबूत होनी चाहिए तात्कालिक हवाएं डालियों को झुका भले दें दरख़्त को उखाड़ पाना सम्भव नही…

  • Hindi kavita | Hindi Diwas Poem -और हिन्दी

    और हिन्दी ( Aur Hindi )     संस्कृत प्राकृत से पाली स्वरूप धरि, अब देवनागरी कहावति है हिंदी। छत्तीस रागिनियों के बारह सुर गाइ गाइ, चारि मिश्रित वर्ण सुहावति है हिन्दी।।   आगम -निगम के गूढ़ तत्व कहि कहि, ब्रह्म  से जीव को मिलावति है हिंदी। भारत महान की आन बान शान बनि, नभ…

  • ना ही इंकार ना ही इजहार | Na hi inkar na hi izhar

    ना ही इंकार ना ही इजहार ( Na hi inkar na hi izhar )   ना ही इन्कार किया और ना ही इजहार किया। तुझको आँखों में बसा कर सिर्फ इन्तजार किया। मै भटकता ही रहा शाख, से टूटे पत्तो की तरह, तुझमे भी प्यार जगे, वक्त का एतबार किया।   उम्मीदों से भरे कलश…

  • Jal par kavita | जल ही जीवन

    जल ही जीवन ( Jal Hi Jeevan Hai )   बूॅ॑द -बूॅ॑द  से  घड़ा  भरे, कहें  पूर्वज  लोग, पानी को न व्यर्थ करें, काहे न समझे लोग।   जल जीवन का आधार है,बात लो इतनी मान। एक  चौथाई  जल  शरीर,  तभी थमी है जान।   जल का दुरुपयोग कर, क्यों करते नुकसान। जल  से  है …

  • संसार एक जाल | Sansar ek Jaal

    संसार एक जाल ( Sansar ek jaal )   चारों तरफ फैली हुई धोखेबाजी और मक्कारी है, भोले भाले लोगों को लूटना इनकी कलाकारी है। सोच समझ करो भरोसा आज के तुम इंसानों पर, न जाने कब फेर दे पानी वो तुम्हारे अहसानों पर। जरूरतमंद जान तुम जिसका भला करने जाओगे, हो सकता है उसी…

  • बाबा रामसा पीर दरबार | Baba Ramsa Peer Darbar

    बाबा रामसा पीर दरबार ( Baba Ramsa Peer Darbar )    लोक आस्था परम केंद्र ,बाबा रामसा पीर दरबार शेखावाटी स्वर्ण नगरी नवलगढ़, शोभित लोक देवता रामदेव जी धाम। पूर्ण सर्व भक्तजन मनोकामनाएं , अनूप सांप्रदायिक सौहार्द पैगाम । भाद्रपद शुक्ल दशमी लक्खी मेला, सर्वत्र बाबा कृपा वृष्टि अपार । लोक आस्था परम केंद्र, बाबा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *