मिला था निराली मधुर जिंदगी से

मिला था निराली मधुर जिंदगी से

मिला था निराली मधुर जिंदगी से

भ्रमर बाग में जब मिला था कली से
मिला था निराली मधुर जिंदगी से

सही और प्यारी सलाह दे रहा हूं
हुनर सीख चलने का चलती घडी से

कभी मैं कभी तू कभी ये कभी वो
मिलेंगे कसम से नयी रोशनी से

जरा गौर कर तू वहां देख प्यारे
खड़ा है सफल आदमी सादगी से

अगर मन में विश्वास श्रद्धा न होंगे
मिलेगा न कुछ भी तुझे बंदगी से

कुमार अहमदाबादी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • न करे कोई | Na Kare Koi

    न करे कोई  ( Na Kare Koi )   अम्ल ऐसा हो कि रुसवा न करे कोई! सरे – राह पत्थर रक्खा न करे कोई! कहां लेके ये जाएगी नाकामियां अपनी मुल्क में इमां का सौदा न करे कोई! मसल फूलों को डाला आवेश में उसने संगदिल को चुभा कांटा न करे कोई! दर्द इसलिए…

  • वतन की आबरू हर हाल में बचानी है

    वतन की आबरू हर हाल में बचानी है सियासी नफ़रतों की आग ये बुझानी हैख़ुलूस प्यार वफ़ा से ही जीत पानी है ये धर्म मज़हबों की जंग अब तो बंद करोहरेक शख़्स में इंसानियत जगानी है इरादे हमने ज़माने में कर दिये ज़ाहिरवतन की आबरू हर हाल में बचानी है सबक ये हमको बुजुर्गों से…

  • वो मिलें जो मुझे | Wo Mile jo Mujhe

    वो मिलें जो मुझे हो गई आँख़ नम फिर हँसाने के बाद ।वो मिलें जो मुझे इक ज़माने के बाद ।।१ गीत जिनकी विरह में लिखे थे कभी ।दौड़ आए वही गुनगुनाने के बाद ।।२ खुश बहुत था जिन्हें साथ पाकर यहाँ ।चल दिए आज वो जुल्म़ ढा़ने के बाद ।।३ क्या क़मी थी वफ़ा…

  • ज़िन्दगी खत्म हुई | Poem Zindagi Khatam hui

    ज़िन्दगी खत्म हुई ( Zindagi khatam hui )    जिंदगी खत्म हुई उन्हें पुकारते हुए उनको जीतते हुए हमको हारते हुए क़ौल वो क़रार जो उन्हें तो याद भी नहीं बस उसी क़रार पर उमर गुज़ारते हुए । चार दिन के प्यार का चढ़ा हुआ जो कर्ज़ था हाथ कुछ बचा नहीं उसे उतारते हुए।…

  • कहानी प्यार की | Kahani Pyar Ki

    कहानी प्यार की ( Kahani Pyar Ki ) कहानी प्यार की हर एक ही नमकीन होती है मगर जब ख़त्म होती है बहुत ग़मगीन होती है ज़माने से यही हमने सुना है आजतक लोगो किसी के प्यार से ही ज़िन्दगी रंगीन होती है बदल लेती है कपड़ों की तरह यह दिल की चाहत को जवानी…

  • ह़ाजत तुम्हारी | Ghazal Hajat Tumhari

    ह़ाजत तुम्हारी ( Hajat Tumhari ) मयस्सर हो गर हमको उल्फ़त तुम्हारी। करेंं हर घड़ी दिल से मिदह़त तुम्हारी। न छूटेगी अब हमसे संगत तुम्हारी। हमें हर क़दम पर है ह़ाजत तुम्हारी। हमारी शिकस्ता सी इस अन्जुमन में। मसर्रत की बाइ़स है शिरकत तुम्हारी। जहां भर की दौलत का हम क्या करें,जब। ख़ुशी दिल को…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *