• खुद की खुद से मुलाकात

    खुद की खुद से मुलाकात जिंदगी की शाम से पहले खुद से खुद की मुलाकात बाकी है । इंतजार और नहीं फुर्सत के दो पल निकालना अभी बाकी है। आईने के सामने रोज आती हूं खुद को सजाना संवारना बाकी है । दिल को ख्वाहिश नहीं कोई ऐसा मिले जो मुझे समझ सके। अब तो…

  • परिवार का मुकुट | Laghu Katha

    अनिता ने जीवन में बहुत संघर्ष किया था। उसने व्यवसाय में कड़े संघर्ष के बाद अपने ससुर के व्यवसाय को नयी ऊंचाईयों तक पहुंचाया था। उस का सम्मान समारोह था। समारोह में विविध लोगों ने रिश्तेदारों ने अनिता को सफलता के लिये बधाइयां दी थी। उस के व्यक्तित्व की प्रशंसा की थी। अनिता के ससुर…

  • प्रगति दत्त | Tere Sahare

    तेरे सहारे ( Tere sahare ) सबके जीवन, तेरे सहारे ।सबकी नैया , तू ही संभाले । हे ईश्वर, सब कुछ तेरे सहारे ।संकट से , तू ही तो उबारे । सबकी बिगड़ी , को तू बना दे ।भव सागर से, तू ही बस तारे । अपना सब, है तेरे सहारे ।दूर कर अब, तनाव…

  • अजनबी बन के | Ajnabi Ban ke

    अजनबी बन के ( Ajnabi ban ke ) शाइरी तेरी लगे मख़मली कोंपल की तरहकूकती बज़्म में दिन रात ये कोयल की तरह अजनबी बन के चुराई है नज़र जब वो मिलेमुझको उम्मीद थी लगते वो गले कल की तरह ख्वाहिशें दफ़्न हैं साज़िश है बदनसीबी भीज़ीस्त वीरान हुई आज है मक़्तल की तरह मुस्तक़िल…

  • सितम का वार है | Sitam ka Vaar Hai

    सितम का वार है ( Sitam ka Vaar Hai ) उसकी जानिब ही सितम का वार हैआदमी जो वक़्त से लाचार है जिसको रब की नेमतों से प्यार हैवो ख़िजाँ में भी गुल-ओ-गुलज़ार है जिसके दम से हैं बहारें हर तरफ़अब उसी की सिम्त हर तलवार है लुट रही सोने की चिड़िया जा ब जाआज…

  • अपनी तकदीर | Apni Taqdeer

    अपनी तकदीर ( Apni Taqdeer ) अपनी तकदीर में जुदाई थीयार की हो रही विदाई थी आग चाहत की जो लगाई थीहमने अश्क़ो से फिर बुझाई थी हाथ हाथों में फिर आकर छूटाकैसी तेरी खुदा लिखाई थी क्यूँ करूँ याद उस सितम गर कोप्यार में जिसके बेवफाई थी एक वो ही पसंद था मुझकोअब जो…

  • आपकी आश्की | Aapki Aashiqui

    आपकी आश्की ( Aapki Aashiqui ) खुशबुओं से भरी आपकी आश्कीताजगी भर गई आपकी आश्की बात ही बात में बात बनने लगीप्यार से भर गई आपकी आश्की खूब हँसते रहे और हँसाते रहेगीत में ढल गई आपकी आश्की । हर जगह तुम दिखे नूर अपना लिएसूफियाना हुई आपकी आश्की ।। राह तकते रहे उम्र भर…

  • एक ग़ैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल | वो चाहता तो

    वो चाहता तो तसकीन उसके दिल को मिलती मुझे रुलाकेपूरी जो कर न पाऊं फरमाइशें बताके। वो चाहता तो चाहे कब उसको है मनाहीदिक्कत वो चाहता है ले जाना दिल चुरा के। मंजिल जुदा जुदा है जब उसकी और मेरीतब दिल का हाल उसको क्या फायदा सुना के। कहता है उंसियत में इज़हार है ज़रूरीरूठा…

  • सांस्कृतिक मूल्य विकसित भारत की कुंजी : प्रो. एम. एम. गोयल

    “विकास को केवल आर्थिक प्रगति से नहीं मापा जा सकता है, बल्कि यह उन मूल्यों, परंपराओं और दर्शन में गहराई से निहित होना चाहिए जो भारत के लोकाचार को आकार देते हैं।“ ये शब्द तीन बार कुलपति, जिसमें राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (आरजीएनआईवाईडी श्रीपेरंबदूर) -राष्ट्रीय महत्व का संस्थान , एवं नीडोनोमिक्स स्कूल ऑफ…

  • मन तू क्यूं ना माने ?

    मन तू क्यूं ना माने ? मन तू ,क्यूं ना माने ?सबको क्यूं , अपना माने । सब होते ना ,यहां अपने ।कुछ होते, हैं बेगाने । बनते हैं, बहुत ही अपने ।दिखाते, नित नए सपने । फिर एक दिन, रंग दिखाते ।उनके नकाब, गिर जाते । वो प्रेम ,कहीं खो जाता ।ढूंढ़े से,नज़र ना…