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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मन तू क्यूं ना माने ?
    कविताएँ

    मन तू क्यूं ना माने ?

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    मन तू क्यूं ना माने ? मन तू ,क्यूं ना माने ?सबको क्यूं , अपना माने । सब होते ना ,यहां अपने ।कुछ होते, हैं बेगाने । बनते हैं, बहुत ही अपने ।दिखाते, नित नए सपने । फिर एक दिन, रंग दिखाते ।उनके नकाब, गिर जाते । वो प्रेम ,कहीं खो जाता ।ढूंढ़े से,नज़र ना…

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  • Badhe Saurabh Pragyan
    कविताएँ

    बढ़े सौरभ प्रज्ञान | Badhe Saurabh Pragyan

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    बढ़े सौरभ प्रज्ञान ( Badhe Saurabh Pragyan ) जन्मदिन की बधाइयाँ, करें पुत्र स्वीकार।है सबकी शुभकामना, खुशियाँ मिले हजार।। बहुत-बहुत शुभकामना, तुमको प्रियवर आज।हो प्रशस्त जीवन सुखद, सुन्दर साज समाज।। जीवन भर मिलती रहें, खुशियाँ सदा अपार।मात शारदे! आपके, भरें ज्ञान भण्डार।। शुभ सरिता बहती रहे, जीवन हो सत्संग।घर आँगन खिलते रहें, प्रेम प्रीति के…

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  • Parivar Shayari
    ग़ज़ल

    परिवार अपना | Parivar Shayari

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    परिवार अपना ( Parivar Apna ) जहाँ से निराला है परिवार अपनाइसी पे लुटाता रहूँ प्यार अपना कदम बेटियों के पड़े घर हमारेमहकने लगा है ये संसार अपना ये बेटे बहू कब हुए है किसी केजो इनपे जताऊँ मैं अधिकार अपना मजे से कटी ज़िन्दगी भी हमारीचला संग मेरे जो दिलदार अपना करूँ मैं दुआएं…

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  • Khwab Shayari
    ग़ज़ल

    ख्वाबों में आ बहकाते हो | Khwab Shayari

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    ख्वाबों में आ बहकाते हो ( Khwabon mein Aa Bahakate Ho ) ख्वाबों में आ बहकाते हो फुसलाते हो।मीठी नींद से बेरहमी से उठा जाते हो। भूलना चाहा मैंने जिस ग़ज़ल कोख्यालों में आ उसे गुनगुनाते हो । जो जाते कहां लौट कर आते हैं।याद में उनकी क्यों अश्क बहाते हो। पड़ता नहीं फर्क उन्हें…

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  • पास बैठो
    ग़ज़ल

    पास बैठो | Paas Baitho

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    पास बैठो ( Paas Baitho ) पास बैठो दो घड़ी मेरे सनमगर न बैठे तो तुम्हें दूंगी कसम जिंदगी में मौज ही सबकुछ नहींध्येय को भी सामने रखना बलम खुद के पैरों पर ही चलना ताकि येकह सको इस जग को हैं खुद्दार हम मुस्कुराकर प्रेम से हर फ़र्ज़ कोगर निभाओगे सफल होगा जनम राक्षसों…

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  • To Aur Kya Karte
    ग़ज़ल

    तो और क्या करते | To Aur Kya Karte

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    तो और क्या करते ( To Aur Kya Karte ) वो अपना ग़म न छिपाते तो और क्या करतेनज़र न अपनी झुकाते तो और क्या करते अज़ल से दुश्मनी पाले थे यार हमसे वोहमारा दिल न जलाते तो और क्या करते रवानी चाहती है ज़िंदगी हमारी भीक़दम अगर न बढ़ाते तो और क्या करते क़ज़ा…

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  • Rishtey Pyaar Ke
    कविताएँ

    रिश्ते प्यार के | Rishtey Pyaar Ke

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    रिश्ते प्यार के ( Rishtey Pyaar Ke ) जबकोई रूठतारिश्ते प्यार केसलीके सेनिभाता•रिश्तेहैं अनमोलसंभाल कर रखोक्यों लगातेमोल•बहुततीखी धारकोई नहीं बचारिश्तों कीमार• निर्मल जैन ‘नीर’ऋषभदेव/राजस्थान यह भी पढ़ें :-

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  • शुभम साहित्यिक संस्था की मासिक काव्यगोष्ठी: शायर विनय साग़र की अध्यक्षता में काव्य रस की बूँदें
    साहित्यिक गतिविधि

    शुभम साहित्यिक संस्था की मासिक काव्यगोष्ठी: शायर विनय साग़र की अध्यक्षता में काव्य रस की बूँदें

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    शुभम साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा मासिक काव्यगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन संस्था की अध्यक्ष सत्यवती सिंह सत्या के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम कवि इंद्रदेव त्रिवेदी के आवास पर आयोजित किया गया, जिसमें अध्यक्षता सुप्रसिद्ध शायर विनय साग़र जायसवाल ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार…

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  • एक दिलदार अपना | Ek Dildar Apna
    ग़ज़ल

    एक दिलदार अपना | Ek Dildar Apna

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    एक दिलदार अपना ( Ek Dildar Apna ) रखा है सहेजे हुए प्यार अपनाक़िताबों में गुल एक दिलदार अपना मुहब्बत कसौटी पे बिल्कुल ख़री हैतभी तो जताया है अधिकार अपना सनम देवता मैंने माना तुम्हीं कोकरो तुम भी इक रोज़ इज़हार अपना फ़लाने की बेटी सगी से भी बढ़करजो अस्मत लुटी दिल है बेज़ार अपना…

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  • मेरे यार से तुम मुखातिब करा दो | Mere Yaar Se
    ग़ज़ल

    मेरे यार से तुम मुखातिब करा दो | Mere Yaar Se

    ByAdmin September 23, 2024September 23, 2024

    मेरे यार से तुम मुखातिब करा दो मेरी कैफ़ियत को मुनासिब करा दो,मुहब्बत का मसला है वाज़िब करा दो। रहेगा ये अहसान मुझ पर हमेशामेरे यार से तुम मुखातिब करा दो। दुआ ना दया को किसी से कहेंगेसनम बस हमारे मुसाहिब करा दो ! रहेगी शिकायत न जग से कभी फिर,ज़रा इक मुलाक़ात वाज़िब करा…

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