• जिन्दगी पहलू नहीं पहेली है

    जिन्दगी पहलू नहीं पहेली है जिन्दगी परिणाम कम परीक्षा ज्यादा लेती है, खुशियों से खेलती बहुत, दुख ज्यादा देती है। इरादों पर बार बार चोट कर निराशा जगाती , जब हों हताश, निराशा में आशा उपजा देती है। कभी निहारती अपने को, कभी भूल जाती श्रृंगार करती हो बेखबर, प्रेम जगा देती है वक्तव्य कब…

  • दर्द के दौर में | Dard Ke Daur Mein

    दर्द के दौर में  ( Dard Ke Daur Mein ) मौत थीं सामने ज़िन्दगी चुप रही दर्द के दौर मैं हर खुशी चुप रही जिसकी आँखों ने लूटा मेरे चैन को बंद आँखें वही मुखबिरी चुप रही दीन ईमान वो बेच खाते रहे जिनके आगे मेरी बोलती चुप रही बोलियां जो बहुत बोलते थे यहाँ…

  • कामना | Kamna

    कामना ( Kamna ) हर व्यक्ति की कामना होती है इसके लिए अपनी सोच होती है हमें लक्ष्य समझना चाहिए सफलता के यत्न करने चाहिए। चाह के प्रति यकीन होना है पाने के लिए श्रम करना है इससे उन्नति शिखर पाती है जीवन में श्रेष्ठता लाती है। विकास के लिए कार्य करो उन्नति के लिए…

  • उसके इज़हार पे | Uske Izahaar Pe

    उसके इज़हार पे ( Uske Izahaar Pe ) उसके इज़हार पे दो घड़ी चुप रही मुझ पे लाज़िम था मैं लाज़िमी चुप रही लब पे पहरा लगा था तमद्दुन का जो ख़ामुशी ही रही सरकशी चुप रही ज़ुल्म करता रहा ये जहाँ हम पे और हर बशर चुप रहा आश्ती चुप रही साँस थमसी गई…

  • सरोज कौशिक की कविताएं | Saroj Koshik Poetry

    क्या तुमने क्या तुमने झरना देखा है? देखी है उसकी यात्रा? तुम्हें तो सिर्फ अपने सुख से मतलब है। बताती हूं उसकी यात्रा का दुख। तुम्हारी तरह मैंने भी चाहा था मेरा जीवन झरने सा बहता रहे,हर,हर। लेकिन, जब चुल्लू में उसका जल भरा तो रंग मिला लाल रक्त रंजित सा। एक घायल चेहरा कहता…

  • वो लाजवाब है | Ghazal Wo Lajawab Hai

    वो लाजवाब है ( Wo Lajawab Hai ) जहाने – हुस्न में उस जैसा है शबाब नहीं वो लाजवाब है उसका कोई जवाब नहीं पसंद करते हैं घर के तमाम लोग उसे वो सिर्फ़ मेरा अकेले का इंतिखाब नहीं हाँ एक दूजे से मिलते हैं बेतकल्लुफ़ हम हमारे बीच रहा है कभी हिजाब नहीं जिये…

  • अ से अ : गुरु का महत्व

    अ से अ :  गुरु का महत्व अज्ञान दूर करता गुरु है । आत्माविश्वास बढ़ाता गुरु है । इनाम को बांटता गुरु है । ईमानदारी से पाठ बोलता गुरु । उत्साह भर सकता गुरु है । ऊंच नीच भेद समझाता गुरु है । ऋषियों की कथा सुनाता गुरु है । एकाग्रता का उपाय कहता गुरु…

  • अफवा | Kavita Aphava

    अफवा ( Aphava ) कभी तेरे लौट आने की खबर आई थी, दिल ने उसे सच मानकर ख़ुशी मनाई थी। पर हर बार वो एक अफवा ही निकली, तेरी यादों से फिर दिल ने उम्मीद की लो जलाई थी। इस अफवा में भी इक हसरत थी, शायद कभी ये हकीकत में बदल जाए। तेरी बातों…

  • मुस्कान ढूंढती है | Muskan Dhundhati Hai

    मुस्कान ढूंढती है ( Muskan Dhundhati Hai ) जो लुट चुका है अब वो सम्मान ढूँढती है । नन्ही कली चमन में मुस्कान ढ़ूढती है । काँटों के वास्ते वो गुलदान ढूँढ़ती है नादान है जहाँ में इन्सान ढूँढती है बेबस है ज़िन्दगी और गर्दिश में भी सितारे अब मौत का वो अपने परवान ढूँढती…

  • रिवाज़ दुनिया के | Ghazal Rivaaz Duniya Ke

    रिवाज़ दुनिया के  ( Rivaaz Duniya Ke ) रिवाज़ दुनिया के इतने सुनों ख़राब नहीं शराब पीता है हर आदमी जनाब नहीं अभी तो दिल पे भी मेरे कोई अज़ाब नहीं । हुई क्या बात जो रुख पे रुका हिज़ाब नहीं । करूँ न ख़ार से मैं दोस्ती कभी यारो पिये मैं रहता हूँ हरदम…