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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • गौर किया कर
    कविताएँ

    गौर किया कर | Kavita Gaur Kiya Kar

    ByAdmin August 3, 2024

    गौर किया कर ( Gaur Kiya Kar ) जुमला है ये कठिन मगर कर, सोच समझ अपनाया कर, किसी को हानि न पहुचे वो कर, खुद को भी हर्षाया कर, जोड़ के अपने दोनो कर, सदा बड़ों का आदर कर, कहा गया जो सदा ही कर, प्रभु सम्मुख शीश झुकाया कर, मत औरों की निंदा…

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  • मोहन सी प्रीति
    कविताएँ

    मोहन सी प्रीति | Kavita Mohan see Preeti

    ByAdmin August 3, 2024August 3, 2024

    मोहन सी प्रीति ( Mohan see Preeti ) मन का भोलापन कैसे बताए, कभी खिला-खिला कभी मुरझाए। कहता नहीं फिर भी कहना चाहे, बिन जाने सुने तर्कसंगत बन जाए। गम का छांव लिपटस सा लिपट ले, तो अनमना मन कभी रूदन को चुन ले। संघर्ष से डरता नहीं फिर भी अग्रसर नहीं, तूफानो से भिड़ता…

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  • टूट जाता है
    ग़ज़ल

    टूट जाता है | Ghazal Toot Jata Hai

    ByAdmin August 3, 2024August 3, 2024

    टूट जाता है ( Toot Jata Hai ) बिना जज्बात के रिश्ता सभी का टूट जाता है अगर मतभेद हो घर में सयाना टूट जाता है खिलौना दिल बनाकर जो किया था पेश दिलवर को कहा उसने तुम्हारा ये खिलौना टूट जाता है नही है शौक दर्पण को कि पत्थर से कभी खेले उसे मालूम…

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  • मनुष्य जीवन | Kavita Manushya Jeevan
    कविताएँ

    मनुष्य जीवन | Kavita Manushya Jeevan

    ByAdmin August 3, 2024

    मनुष्य जीवन ( Manushya Jeevan ) मानव जीवन की गाथा तुमको सुनता हूँ। जीवन का एक सत्य तुमको बताता हूँ। मानवता का दृश्य भी तुमको दिखता हूँ। किस्मत का भी खेल तुमको बताता हूँ।। आया हो संसार में लेकर मानव जन्म। पूरब भव में तुमने किये थे अच्छे कर्म। इसलिए तो तुमको मिला है मानव…

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  • नहीं संभलते हैं | Ghazal Nahi Sambhalte Hai
    ग़ज़ल

    नहीं संभलते हैं | Ghazal Nahi Sambhalte Hai

    ByAdmin August 3, 2024

    नहीं संभलते हैं ( Nahi Sambhalte Hai ) हसीन ख़्वाब निगाहों में जब से पलते हैं क़दम हमारे हमीं से नहीं संभलते हैं इसी सबब से ज़माने के लोग जलते हैं वो अपने कौल से हरगिज़ नहीं बदलते हैं छुपाये रखते हैं हरदम उदासियाँ अपनी सितम किसी के किसी पर नहीं उगलते हैं रह-ए-हयात में…

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  • बरसात का आगमन
    कविताएँ

    बरसात का आगमन | Kavita Barsaat ka Aagman

    ByAdmin August 3, 2024August 3, 2024

    बरसात का आगमन ( Barsaat ka Aagman ) एक गौरैया बारिश में अपने पंख फैलाकर जब नहाती है तब सूचना देती है वह बारिश के आगमन का। और बादल आपस मे टकराकर टूटते है, बिखरते ही अपनी बूंदो को इस धरा पर दूर किसी बस की खिड़की में तब झाँकता दिखलाई देता है एक धुंधला-सा…

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  • वर्जिन सुहागन
    कविताएँ

    वर्जिन सुहागन | Kavita Virgin Suhagan

    ByAdmin August 2, 2024August 2, 2024

    वर्जिन सुहागन ( Virgin Suhagan ) कब मेरा अस्तित्व, वेदनाओं, संवेदनाओं,दर्दो ओ ग़म का अस्तित्व बना पता ही न चला। एहसासों के दामन तले जीते गए भीतर और भीतर मेरे समूचे तन ,मन प्राण में, उपजे मासूम गुलाबों को, कब हां कब तुमने कैक्टस में बदलना शुरू किया, हमें पता ही न चल पाया। अहसास…

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  • छेंड़
    कविताएँ

    छेंड़ कर | Kavita Chhed Kar

    ByAdmin August 2, 2024

    छेंड़ कर ( Chhed Kar ) छेंड़ कर इस तरह न सताया करो, रूठ जाऊॅ अगर तो मनाया करो, दिल मेरा तेरी यादों की है इक गली, याद बनकर कभी इनमे आया करो। गीत कारों ने नज्में लिखे हैं बहुत, गीत मेरे लिए भी कोई गाया करो, इस तरह से मेरी कट पाएगी नहीं, दर्दे…

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  • मुहब्बत हो गई | Ghazal Muhabbat Ho Gayee
    ग़ज़ल

    मुहब्बत हो गई | Ghazal Muhabbat Ho Gayee

    ByAdmin August 2, 2024August 2, 2024

    मुहब्बत हो गई ( Muhabbat Ho Gayee ) मुहब्बत हो गई तो क्या बुरा है मुहब्बत ही ज़मानें में ख़ुदा है कभी मिलकर नहीं होना जुदा है मेरे मासूम दिल की यह दुआ है तुम्हारे प्यार में पीछे पड़ा है करो अब माफ़ भी जिद पर अड़ा है ज़माना इस तरह दुश्मन हुआ यह सभी…

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  • कजरी महोत्सव के आगाज के साथ हृदयांगन संस्था के उत्तराखंड अंचल का श्रीगणेश
    साहित्यिक गतिविधि

    कजरी महोत्सव के आगाज के साथ हृदयांगन संस्था के उत्तराखंड अंचल का श्रीगणेश

    ByAdmin August 2, 2024

    ह‌दयांगन साहित्यिक सांस्कृतिक सामाजिक तथा आध्यात्मिक संस्था (पंजीकृत) , मुम्बई का उत्तराखंड में विस्तार, श्रावण मास में तीज कजरी तथा गीत ग़ज़ल मल्हार की एक आन‌ लाइन काव्य गोष्ठी 31 जुलाई को सायं 4 बजे के आयोजन के साथ हुआ। यह कार्यक्रम हृदयांगन संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष डा० विद्युत प्रभा चतुर्वेदी मंजू जी की अध्यक्षता…

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