• नाकाम | Kavita Nakaam

    नाकाम ( Nakaam ) दुनिया की उम्मीदों पर खरा ना उतर सका मैं। ज़िंदा रहते खुद को मरा ना समझ सका मैं। अपने कद का अंदाज़ा सदा रहा मुझे। अफसोस है कि खुद से बड़ा ना बन सका मैं। एक उनके लिए, और दूसरा अपने लिए ऐसे दोहरे चरित्र का प्रहसन ना पहन सका मैं।…

  • सावन मनभावन | Sawan Manbhavan

    सावन मनभावन ( Savan Manbhavan ) झूम झूम के सावन आया, घूम-घूम के खुशियां लाया। झन~झन करे झंकार , आवारा बदरा बरसाया। घन-घन गरजती बौछारें धूम धड़का कर धमकाए l गर्जन-तर्जन करे दामिनी, पुलक-पुलक पुलकाए l चढ़ गई मौज बदरा को, तो नदिया भर-भर लाये। नाले-डबरे सारे भर गए, गली में पानी बहता जाए l…

  • कविता तू | Kavita tu

    कविता तू ( Kavita tu ) कविता, तू शब्दों की माला, भावनाओं का रंग, तेरे बिना दिल की गहराई, रहती है सुनी और थकी। तू लफ्जों में छुपी, सजीवता की छाया, हर स्वर में बसी, प्रेम और स्नेह की माया। तेरे हर पंक्ति में बसी, दिल की अनकही बात, हर छंद में छुपा है, जीवन…

  • बस थोड़ा सा प्यार चाहिए | Bas Thoda sa Pyar Chahiye

    बस थोड़ा सा प्यार चाहिए ( Bas Thoda sa Pyar Chahiye ) बस थोड़ा सा प्यार चाहिए। जीने का ही आधार चाहिए। बहती रहे अनुरागी सरिता। प्रीत फुहार रसधार चाहिए। मधुरम बहती बहार चाहिए। खुशियों की भरमार चाहिए। दिल तक दस्तक दे जाए वो। हमको ऐसा दिलदार चाहिए। भाव जड़ित हमें हार चाहिए। सुरभित भीनी…

  • चौहान शुभांगी मगनसिंह जी की कविताएँ | Chauhan Shubhangi Poetry

    हर युग में चलते चलीं कविता हर युग मेंचलते चलीं कवितालोग क्या कहेंगेयह नहीं सोचतीं कभीहाशिए पर फेंक दिए घटक को प्राथमिक स्थान दिलाती कवितामेघों को अपना दूत बनाकरभावों को व्यक्त करतें कालीदासरामायण के रचयितावाल्मिकीहो या राम के दास तुलसीदासलहर लहर पर लहरातेकामायनी लिखते जयशंकर प्रसादमैं अकेलामैं अकेला…गाते हुए निराले से निरालादुख की बदलीअधूनिक मीरा…

  • स्नेह से प्रेम | Kavita Sneh se Prem

    स्नेह से प्रेम ( Sneh se Prem ) स्नेह से प्रेम जताया जाना उपहार में गुलाब दिया जाना सूर्य का उदय होना यां शिशु का जन्म लेना सब संकेत प्यार को परिभाषित करते हैं गहरा लाल रंग फूलों पर कोमल दिखता है वही लाल रंग आंखों में आकर उग्र होता है मन के भाव और…

  • गुरु ज्ञान की ज्योत | Guru Gyan ki Jyoti

    गुरु ज्ञान की ज्योत ( Guru Gyan ki Jyoti ) हे गुरुवर तू मेरे देश में ज्ञान की ज्योत जगा दे ! बल बुद्धि विद्या वैभव से अंधकार को दूर भगा दे । मोह माया की सुरा को पीकर सोया है जो राष्ट्र छेड़ ज्ञान की तान यहां तू भ्रष्टाचार मिटा दे ।। हे गुरुवर…

  • उबारो गणपति | Ubaro Ganpati

    उबारो गणपति ( Ubaro Ganpati ) हे गणपति बप्पा!गणनायक। विघ्नहर्ता सिद्धि विनायक।। हम तो हैं भक्त प्रभु नादान। आए हैं शरण दयालु जान।। रखिए प्रभु हमारा भी मान। दीजिए हमारी ओर ध्यान।। हमको निहारिए सुखदायक। हे गणपति बप्पा!गणनायक ।। भटक रहे जग की माया में । मैल चढ़ रहा इस काया में ।। अंधकारमय है…

  • हसरत | Kavita Hasrat

    हसरत ( Hasrat ) मेरे दिल की किसी धड़कन में तेरी याद रहती है। कहीं जिंदा हैं वो लम्हे जिन्हें पल पल ये कहती है। चले आओ जरा बैठें हम उसी घाट पे चलके ! जहां की लहरों में अब भी तेरी तसवीर रहती है ।। के मुझको तो गिला कोई नहीं तेरी रुसवाई का…

  • भाव भक्ति के मारे | Bhav Bhakti ke Mare

    भाव भक्ति के मारे  ( Bhav Bhakti ke Mare ) त्रिदेव तुम्हारी महिमा का, रस पीकर मतवारे, घूम रहें हैं गाते महिमा, गली-गली द्वारे-द्वारे, ढोलक झांझ म॔जीरा लेकर, नाचें भजन कीर्तन गाकर, भाव भक्ति के मारे, गली-गली द्वारे-द्वारे, जल नारियल बेलपत्र धतूरा, जिसके बिन अनुष्ठान अधूरा, चलें सभी सामग्री साजे, गली-गली द्वारे-द्वारे, चंद्र नाग डमरू…