• नहीं ह्रदय स्वीकार | Nahi Hriday Swikar

    नहीं ह्रदय स्वीकार ( Nahi Hriday Swikar ) ओ प्राणों के प्राण तेरे बिन, जीवन है निस्सार। धड़कन निरपराध है बंदी ,तन बस कारागार।। सांसों सांसों में जलती है ,अखंड प्रेम की ज्योति। कह देती हूं आज तेरे बिन, नहीं ह्रदय स्वीकार। ओ प्राणों के प्राण तेरे बिन जीवन है निस्सार। याद तुम्हारी बनी है…

  • बहकी-बहकी सी | Ghazal Behki Behki Si

    बहकी-बहकी सी ( Behki Behki Si ) बहकी-बहकी सी वो रहती तो है कब से, मन ही मन में कुछ वो कहती तो है कब से ! चल रहा है क्या ना जाने दिल में उसके, बन शिला सी सब वो सहती तो है कब से ! राज कुछ तो है छुपा दिल में दबाये,…

  • जो ख़त पढ़ो | Ghazal Jo Khat Padho

    जो ख़त पढ़ो  ( Jo Khat Padho ) जो ख़त पढ़ो तो इबारत पे ग़ौर मत करना हमारा ज़िक्र किताबों में और मत करना छुपाये बैठे हैं दिल में ख़िजां के ज़ख़्मों को हमारे फूल से चेहरे पे ग़ौर मत करना हरेक सिम्त ही रुसवाइयों के चर्चे हैं यूँ अपना ज़िक्र मेरे साथ और मत…

  • ए.आई.लेस युवा बाबा | नाटिका

    पात्र परिचय 1) रिच मनन्त बाबा ( ब्वॉय) – आयु 25 वर्ष। 2) 5 ए. आई . ( आर्टिफिशियल इंटेलि टिजेंट) महिला रोबोट। 3) 1 ए. आई. ( आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट)पुरुष रोबोट। 4 ) इंजीनियर धर्मेन्द्र कुमार (दुकानदार ए. आई. मेकर)- आयु 30 वर्ष। 4) 1 ग्रामीण आदमी- आयु 30 वर्ष। 5) 1 ग्रामीण गायक ।…

  • पिकनिक | वनभोज

    पिकनिक  ( Picnic ) जाता नहीं कोई रोज, मनाने को वनभोज, करते मुझे क्यों हो तंग, चलो पिकनिक हर रोज, बच्चों जरा पढ-लिख लो, खुल गई है स्कूल, फिर छुट्टी के दिन चलेंगे, करेंगे छुट्टी वसूल, बड़े-बूढ़े और बच्चे खुश, हो जाते हैं पिकनिक से, सारी चिंताएं वो भूल, वहीं हो जाते हैं मसगूल, जाते…

  • नजारा | Kavita Nazara

    नजारा ( Nazara ) रंग बिरंगी प्रकृति देखो, यौवन के मद मे झूमे, पर्वत पेंड़ों की ये श्रंखला, आकाश नारंगी को चूमें, हरित धरा पर सुमन खिले हैं, बनी मेखला गलियारा, कौन भला इस यौवन पर नही है अपना हिय हारा, अरुणोदय मे अस्ताचल का, अद्भुत देख नजारा, कुछ और देर को ठहर मै जाऊं,…

  • क्या भारत यूरोप का गोदाम था

    क्या भारत यूरोप का गोदाम था भावार्थ लेखक – कुमार अहमदाबादी रुबाई का भावार्थ समझने से पहले कवि अकबर इलाहाबादी के जीवनकाल के बारे में थोडी सी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। अकबर इलाहाबादी का जन्म १६ नवंबर १८४६ के दिन हुआ था। अवसान १५ फरवरी १९२१ के दिन हुआ था।बालपन में उन्हों ने मुगल…

  • झमाझम बारिश | Jhamajham Barish

    झमाझम बारिश ( Jhamajham Barish ) देखो देखो बारिश का मौसम है आया। सुहाना मौसम ये सबके मन को भाया। काले काले घनघोर बादल नभ में छाए। गर्मी से व्याकुल पशु पक्षी देख हर्षाए। पेड़ पौधे नव पुष्पों से हुए आच्छादित। जीव जगत के हृदय देख हुए हैं पुलकित। बारिश की बूंदें तन मन को…

  • मोह | Kavita Moh

    मोह ( Moh ) दौड़ रहा वीथिका-वीथिका, सुख सपनों की मृगमरीचिका, थोड़ी देर ठहर ले अब तू, कर ले कुछ विश्राम। भले पलायनवादी कह दें, रखा नहीं कुछ मोह में। सारी दुनिया नाच रही है, जग के मायामोह में। मोह बिना अस्तित्व नहीं है, बात पुरानी नई नहीं है। सारा जगत इसी पर निर्भर, कितनों…

  • आम फल | Kavita Aam Fal

    आम फल ( Aam Fal ) मेरी क्या गलती थी जो मुझे छोड़ दिया। मेरे रस का रसपान बहुत तुमने कर लिया। जब-जब तेरा मन हुआ तब-तब तुमने मुझे चूसा। अब जाने का समय हुआ तो आम से मुँह मोड लिया।। जब आता हूँ तो गुण गान करते हो। मेरी प्रसन्नता के लिए क्या क्या…