• सादगी | Laghu Katha Saadgi

    निशांत आज अपनी मां के साथ लड़की देखने गया उसकी मां ने निशांत के कहने पर मॉर्डन दिखने वाली लड़की की खोज पूरी कर ली थी। निशांत की मां ने आज उसे लड़की से मिलने के लिए मना ही लिया था ताकि वो भी शादी करके अपना घर बसा ले पर मामला यहां तो उल्टा…

  • जवानी | Ghazal Jawani

    जवानी ( Jawani ) जब जवानी ने खेल खेले थे हर तरफ फूल थे व मेले थे हम कभी भूल ना सकेंगे की फूल के साथ हम अकेले थे हां, झमेले भी थे मगर यारों वे सुगंधित हसीं झमेले थे काम था नाम था जवानी थी जेब में लाख लाख धेले थे वास्ता सिर्फ था…

  • फूलों का रंग | Kavita Phoolon ka Rang

    फूलों का रंग  ( Phoolon ka Rang ) फूलों का रंग लाल होता है। खुशबू का रंग नही होता है। बागो का रंग हरा होता है। पर मोहब्बत का रंग नही होता।। दिल का रंग लाल होता है। करने वालों का रंग नही होता। प्रेम दिवस का रंग लाल होता है। लेकिन प्यार का रंग…

  • न्याय चले खाट~खट

    न्याय चले खाट~खट भरे बाजार न्याय बिकने तैयार l पहन काला कोट दलाल खड़े दो~चार l मस्त ग्राहकों की है मगर दरकार l जिनकी जेब में हो दौलत बेशुमार l भ्रष्टाचारी~ माफिया, नेता इनके हैं यार l मुंह मांगी कीमत दे ऐसा हो खरीददार l ऐसा पापी न्याय बिके सरे बाजार l जनता हो खबरदार…

  • होता वही भगवान को जो मंजूर

    होता वही भगवान को जो मंजूर होता वही है, हे भगवान! जो मंजूर आपको होता है। किसी के कुछ भी चाहने से, किसी के ना कुछ चाहने से, क्या होता है? होता वही है, हे भगवान ! जो मंजूर आपको होता है। हे सर्वेश्वर ! हे सर्वशक्तिमान! हे सर्व समर्थवान ! हे पालनहार !सब जग…

  • उमर लडकइयाॅ

    उमर लडकइयाॅ उमर लडकइयाॅ मे नशा है तमाम, का जानी कारण का है मेरे राम, चिंता मे चैन नहीं दिन रातन के, आबा लगाई पता इन बातन के, फेर कसी उनके नशा मा लगाम, का जानी कारण का है मेरे राम, उमर लडकइयाॅ मे नशा है तमाम, का जानी कारण का है मेरे राम, सबहि…

  • सताता है बहुत | Ghazal Satata hai Bahot

    सताता है बहुत ( Satata hai Bahot ) है तबीयत में बला की ज़िद सताता है बहुत फिर भी जाने क्यों मुझे वो शख़्स भाता है बहुत। अब तवक्को ही नहीं उससे किया करती कोई कर के कुछ एहसान वो मुझपे जताता है बहुत। बेवफ़ाई से रुलाना शग़्ल है उसका मगर महफ़िलों में वो वफ़ा…

  • बोलचाल भी बंद | Kavita Bolachaal hi Band

    बोलचाल भी बंद ( Bolachaal hi Band ) करें मरम्मत कब तलक, आखिर यूं हर बार। निकल रही है रोज ही, घर में नई दरार।। आई कहां से सोचिए, ये उल्टी तहजीब। भाई से भाई भिड़े, जो थे कभी करीब।। रिश्ते सारे मर गए, जिंदा हैं बस लोग। फैला हर परिवार में, सौरभ कैसा रोग।।…

  • घुमड़ घुमड़ घन अंगना आए

    घुमड़ घुमड़ घन अंगना आए घुमड़ घुमड़ घन अंगना आए। रिमझिम रिमझिम बुंदे लाए। ताल तलैया सब भर गए सारे। कारे बदरा घने गगन में छाए। धरा हर्षित हो झूमी भारी। धानी चुनरिया ओढ़े सारी। वृक्ष लताएं पुष्प सब महके। बारिश में भीग रहे नर नारी। कड़ कड़ दमक उठी दामिनी। मस्त बहारें हुई पुरवाई…

  • बादल प्यारे | Kavita Badal Pyare

    बादल प्यारे ( Badal Pyare )   जल मग्न होती यह धरती घिर आए जब जून में बादल काले काले बदरा प्यारे प्यारे उमड़ घुमड़ जब छाए बादल।। अंबर से जब बरसे मेघ अमृत खुशहाली छाए झूम के आए बरखा की बहार संग ये सावन पुकारे धरती तुमको प्रिय बादल।। त्राहि त्राहि जब होता जग…