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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • बरसो बादल
    कविताएँ

    बरसो बादल | Kavita Barso Badal

    ByAdmin June 26, 2024June 26, 2024

    बरसो बादल ( Barso Badal )   प्रतीक्षा पल पल करती अंखियां अब तो सुन लो मानसून बात हमारी, इंतजार कर अब ये नयन थक गए कब बरसोगे रे बादल तुम प्यारे।। इस धरती के तुम बिन मेघा प्यारी सारे पौधे,वन उपवन गए मुरझाये, तुम बिन नही कोयल कूके अब लता पताका पुष्प गए कुम्हलाये।।…

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  • Self respect
    कविताएँ

    मैं स्वाभिमान हूं | Kavita Main Swabhimaan Hoon

    ByAdmin June 26, 2024

    मैं स्वाभिमान हूं ( Main Swabhimaan Hoon ) मैं हर जगह दिखता नहीं हूं क्योंकि मैं बाजारों में बिकता नहीं हूं मैं कभी अभिमानी के साथ में टिकता नहीं हूं मैं स्वाभिमान हूं मैं हर व्यक्ति में होता नहीं हूं मुझे ढूंढना इतना आसान नहीं है, क्योंकि मैं इतनी आसानी से मिलता नहीं हूं मैं…

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  • ख़्याल | Kavita Khayal
    कविताएँ

    ख़्याल | Kavita Khayal

    ByAdmin June 26, 2024

    ख़्याल ( Khayal ) ढली है शाम ही अभी , रात अभी बाकी है हुयी है मुलाकात ही, बात अभी बाकी है शजर के कोटरों से, झांक रहे हैं चूजे पंख ही उगे हैं अभी, उड़ान अभी बाकी है अभी ही तो, उभरी है मुस्कान अधरों पर मिली हैं आँखें ही अभी, दिल अभी बाकी…

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  • शत: शत: प्रणाम
    गीत

    शत: शत: प्रणाम | Geet Shat Shat Pranam

    ByAdmin June 24, 2024June 24, 2024

    शत: शत: प्रणाम ( Shat Shat Pranam ) हिमालय की शान को, माँ, गंगा की आन को, सागर के सम्मान को, झरनों की मधुर तान को इंद्रधनुषी आसमान को, मेरे वतन की शान को शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! १ !! गीता और कुरआन को वेदो को और पुराण को,…

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  • Hindi Poetry of Gurudeen Verma | गुरुदीन वर्मा की कविताएं
    कविताएँ

    Hindi Poetry of Gurudeen Verma | गुरुदीन वर्मा की कविताएं

    ByAdmin June 24, 2024September 25, 2024

    मेघों की तुम मेघा रानी शेर)- जैसे जल को तरसे मछली, वैसे मेघ को तरसे धरती। मेघ बिना नहीं मिलता पानी, मेघ बिना यह बंजर धरती।। ——————————————————- मेघों की तुम मेघा रानी, मेघ तुम बरसाओ। करके वर्षा मेघों की, धरती की प्यास मिटाओ।। मेघों की तुम मेघा रानी———————–।। किसको जरूरत नहीं जल की, यह जल…

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  • अनपढ़ प्रेम
    कविताएँ

    अनपढ़ प्रेम | Kavita Anpadh Prem

    ByAdmin June 24, 2024

    अनपढ़ प्रेम ( Anpadh Prem )   प्रेम अनपढ़ होता है, न सुकुन से रहता न रहने देता है। रहता हमेशा मन के विपरीत, सिखाता तरीका प्रीति की रीत। विरोधाभास में जीवन व्यतीत होता, न हस्ताक्षर करता न सुलह ही कराता । धधकती चिंगारी जिसका नाम दिल, धड़कन की तेज रफ्तार करता उद्विग्न । चन्दन…

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  • याद आती है आशियाने की | Ghazal Yaad Aati Hai Aashiyane ki
    ग़ज़ल

    याद आती है आशियाने की | Ghazal Yaad Aati Hai Aashiyane ki

    ByAdmin June 23, 2024

    याद आती है आशियाने की ( Yaad Aati Hai Aashiyane ki ) है अदा यह भी रूठ जाने की कोई कोशिश करे मनाने की इन अदाओं को हम समझते हैं बात छोड़ो भी आने-जाने की आज छाई हुई है काली घटा याद आती है आशियाने की एक दूजे को यह लड़ाते हैं नब्ज़ पहचान लो…

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  • पीड़ित मानवता के सच्चे सपूत : डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी
    विवेचना

    पीड़ित मानवता के सच्चे सपूत : डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी

    ByAdmin June 23, 2024

    मानव पीड़ा को जिसने भी अपनी पीड़ा समझ उसके दुखों को कम करने का प्रयास किया उनमें डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी प्रमुख थें । वास्तव में दूसरों के दुःखों को कम करना ही मानव धर्म है । संसार में अपने स्वार्थ के लिए तो सभी जीते हैं परंतु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनका…

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  • राम पर पाँच दोहे | Ram Dohe in Hindi
    दोहे

    राम पर पाँच दोहे | Ram Dohe in Hindi

    ByAdmin June 23, 2024September 21, 2024

    राम पर पाँच दोहे ( Ram Par Paanch Dohe ) चाहे राजा राम हों,या वनवासी राम। उर में जन-जन के वसे,सबके ही सुख-धाम।। बल-संबल सब राम हैं, राम हमारी शक्ति। राम हमारे पूज्य हैं, राम हमारी भक्ति।। जन-जन सीखे राम से, निर्बल से अनुरक्ति। नहीं राम-सा पूज्य है, नहीं राम-सा व्यक्ति।। हुए अवतरित लोक में,किए…

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  • हम हुए अस्त
    कविताएँ

    हम हुए अस्त | Hum Huye Ast

    ByAdmin June 23, 2024June 23, 2024

    हम हुए अस्त  ( Hum Huye Ast )   ” मैं ” की वृत्ति में ” हम” हुए हैं अस्त बड़ा ही शालीन है शब्द हम समझो इसे अपनी जेहन में उतार वरना तू है बेकार धरा हुआ है हम प्रबल दिखा है मै मैं और हम की प्रतिस्पर्धा में पृथ्वी परी है बेसुध प्रकृति…

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