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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • रोगों से मुक्ति मिलती है हास्य योग से
    विवेचना

    रोगों से मुक्ति मिलती है हास्य योग से

    ByAdmin June 19, 2024

    आज का मनुष्य जीवन में बड़ा हताश निराश दिखाई पड़ता है। बचपन की उन्मुक्त हंसी जैसे उसकी जिंदगी से खो सी गई है। यही कारण है कि वह विभिन्न बीमारियों की चपेट में आता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए योग में एक हास्य योग का प्रचार प्रसार बहुत तेजी से फैल…

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  • Fiji me Hindi
    पुस्तक समीक्षा

    फ़ीजी में हिन्दी : “विविध प्रसंग”

    ByAdmin June 19, 2024

    बिहार की मिट्टी में जन्में ‘डॉ. राजेश कुमार माँझी’ का नाम गिरमिटिया लेखन के लिए साहित्य में एक जाना पहचाना नाम है। आप उप निदेशक ( राजभाषा) इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार में भी कार्यरत रहे हैं वर्तमान में आप दिल्ली के जामिया मिल्लिया में हिन्दी अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं ।…

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  • मुसाफ़िराना है | Ghazal Musafirana Hai
    ग़ज़ल

    मुसाफ़िराना है | Ghazal Musafirana Hai

    ByAdmin June 19, 2024June 19, 2024

    मुसाफ़िराना है ( Musafirana Hai ) हम ग़रीबों का यह फ़साना है हर क़दम ही मुसाफ़िराना है यह जो अपना ग़रीबख़ाना है हमको मिलकर इसे सजाना है कितना पुरकैफ़ यह ज़माना है रूठना और फिर मनाना है बीबी बच्चों की परवरिश के लिए जाके परदेश भी कमाना है सारे घर के ही ख़्वाब हैं इसमें…

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  • मैं आपकी | Kavita Main Aap ki
    कविताएँ

    मैं आपकी | Kavita Main Aap ki

    ByAdmin June 18, 2024June 18, 2024

    मैं आपकी ( Main Aap ki ) जनम -जनम का प्रीति जुड़ा है । सर्वस्व आपसे पूरा है ।। धर्म, हे प्रभु! आप निभाइए। सुमा के भी नाथ कहाइए।। मांग सिंदुरी नित सजती रहे। पाँव पैंजनियाँ बजती रहे ।। कंगन भी मैं तो खनकाऊँ। नित मैं आपकी ही कहाऊँ।। भक्ति- धारा सदा बहाइए। सुमा के…

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  • मैं गंगा हूं | Kavita Main Ganga Hoon
    कविताएँ

    मैं गंगा हूं | Kavita Main Ganga Hoon

    ByAdmin June 18, 2024

    मैं गंगा हूं ( Main Ganga Hoon ) हिमालय की गोद में बस्ती हूं काटकर पहाड़ों को अपने साहस से सरल भाव में बहती हूं ऐसी मै गंगा हूं। लेकर सबको अपने साथ चलती हूं चाहे कंकड़ पत्थर रेत या पेड़ बंजर भूमि उपजाऊ बना दुं ऐसी मै गंगा हूं। प्यासे की प्यास बुझाती बिछड़ों…

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  • अतुल्य भारत
    कविताएँ

    अतुल्य भारत | Kavita Atulya Bharat

    ByAdmin June 18, 2024June 18, 2024

    अतुल्य भारत ( Atulya Bharat ) अतुल्य भारत, हिय प्रियल छवि सर्व धर्म समभाव छटा, स्नेह प्रेम भाईचारा अनंत । विविधता अंतर एकता, जीवन शैली संस्कार अत्यंत । खेती संग खुशहाली अथाह, परिश्रमी ओज सम रवि । अतुल्य भारत, हिय प्रियल छवि ।। दक्षिणी एशिया वृहत्तर राष्ट्र, पर्यटन क्षेत्र अति उत्तम । उत्तर शोभा दिव्य…

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  • जब जब सुरसा बदन बढ़ावा | आलेख
    विवेचना

    जब जब सुरसा बदन बढ़ावा | आलेख

    ByAdmin June 18, 2024June 18, 2024

    सुरसा बाधा का प्रतीक है। जीवन में हम जब श्रेष्ठ कार्य करने चलते हैं तो अनेकानेक लोग बाधाएं उत्पन्न किया करते हैं । अब हमें चाहिए कि हनुमान जी की तरह उन बाधाओं को खत्म करके अपने लक्ष्य की तरफ कदम आगे बढ़ाएं । जीवन में आने वाले ऐसी बाधाओं से बिना घबराए उन बाधाओं…

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  • बड़प्पन से बड़े होते हैं
    कविताएँ

    बड़प्पन से बड़े होते हैं

    ByAdmin June 18, 2024June 18, 2024

    बड़प्पन से बड़े होते हैं जो बड़े कद में हो गए ऊंचे ऊंचे पद पर हो गए। अंतर्मन विकार भरा हो तो स्वार्थ में जो खो गए। दिल दरिया सा जो रखते बड़प्पन से बड़े होते हैं। औरों की मदद जो करते लाखों हाथ खड़े होते हैं। वटवृक्ष की भांति देते सबको शीतल ठंडी छांव।…

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  • महर्षि वाल्मीकि और बाल्मिकी समाज
    विवेचना

    महर्षि वाल्मीकि और बाल्मिकी समाज

    ByAdmin June 18, 2024

    आश्रम का पूरा वाल्मीकि समाज राम कथा का गायन करता था। यह समाज राम कथा गा-गाकर राममय हो गया था। दूर-दूर से श्रोतागण इस संगीत की धारा का रसास्वादन करने के लिए पहुंचते थे। एक ऐसा वाल्मीकि समाज आकार ग्रहण कर रहा था जिसमें चारों वर्णों की योग्यता समाहित थी। वाल्मीकि समाज और राम कथा…

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  • कब बरसी सवनवाँ
    कविताएँ

    कब बरसी सवनवाँ | कजरी

    ByAdmin June 18, 2024

    कब बरसी सवनवाँ टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। लुहिया के चलले से सूखेला कजरवा, ऊपरा से नीचवाँ कब बरसी बदरवा। गरमी से आवें न पजरवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। ताल-तलइया,नदिया,पोखरी सुखैलीं, अपने बलम के हम गोनरी सुतऊलीं। चिरई जुड़ाई कब खोंतनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप…

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