Mindblown: a blog about philosophy.
लघुकथा: “चार बजे की माँ”
सुबह के चार बजे थे।बाहर अभी भी अंधेरा पसरा था, मगर प्रियंका की नींद खुल चुकी थी।अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँखें खुल गई थीं — जैसे उसकी जिम्मेदारियाँ अलार्म से भी पहले जाग जाती हों। बिस्तर छोड़ते ही ठंडी ज़मीन पर पैर रखते हुए एक ही ख्याल —“आज कुछ भी छूटे नहीं…” रसोई…
माँ शारदे की वंदना से सजा ‘काव्या मृत’ का विमोचन समारोह, बीसलपुर में साहित्य की अनूठी गूंज
बीसलपुर (पीलीभीत) पत्रिका काव्या मृत के संपादक टी एल वर्मा ने पत्रिका विमोचन व सम्मान समारोह का आयोजन मशहूर शायर विनय साग़र जायसवाल ( बरेली ) की अध्यक्षता में आयोजित किया। इस अवसर पर मुख्यातिथि रहे आचार्य के के चंचल (बिलसंडा) विशिष्ट अतिथि रहे गिरीश पांडेय (वाराणसी) संचालन शायर ग़ज़लराज (बरेली )ने किया। माँ शारदे…
शब्दाक्षर जिलाध्यक्ष रमाकांत सोनी को मिला मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न पुरस्कार
महान साहित्यकार उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की 145 की जयंती पर सियाम ऑडिटोरियम राज्य कृषि एवं प्रबंधन संस्थान दुर्गापुरा, जयपुर में आयोजित भव्य समारोह में शब्दाक्षर के जिला अध्यक्ष कवि रमाकांत सोनी व जिला उपाध्यक्ष तेजसिंह राठौड़ को मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न पुरस्कार 2025 शाल प्रतीक चिन्ह व सर्टिफिकेट देकर प्रदान किया गया। यह…
तुलसी कौन थी?
हमारा देश धर्म के साथ भावना प्रधान देश है जहाँ न जाने कितनी धर्म मान्यताओ और आस्थाओ में हम सब विश्वास करते है। तभी तो हमारी संस्कृति अभी तक बची हुई है। इसी के अंतर्गत तुलसी कौन थी ? तुलसी (पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी। जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में…
‘अश्लीलता’
शाम के समय पार्क में टहलते हुए, मेरी नजर अपने स्कूली मित्र उमेश पर पड़ी। उससे मेरी मुलाकात लगभग 4 वर्ष बाद हुई थी। उसके साथ उसकी दो खूबसूरत बेटियां थी, जिनकी उम्र लगभग 6 वर्ष और 4 वर्ष होगी। वह बच्चियों को पार्क में घुमाने लाया था। मेरी उससे दुआ सलाम हुई। हम दोनों…
तुलसी जयंती
(भक्ति, साहित्य और दार्शनिक चिंतन का संगम) तुलसी जयंती, भारतीय संस्कृति और साहित्य में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और पावन पर्व है। यह दिवस भक्तिकाल के अमर कवि, दार्शनिक, समाज सुधारक और कालजयी महाकाव्य रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह मात्र एक तिथि विशेष नहीं, बल्कि एक…
‘कुल की रीति’ का दार्शनिक आलोक
‘तुलसी’ कबहुँ न त्यागिए, अपने कुल की रीति।लायक ही सों कीजिए, ब्याह, बैर अरु प्रीति॥ संदर्भ :— यह दोहा गोस्वामी तुलसीदास की नीति पर आधारित रचना “रामचरितमानस” का नहीं है, बल्कि यह “विनय पत्रिका” या उनकी किसी अन्य स्वतंत्र नीति-काव्य रचना से भी नहीं लिया गया माना जाता। बल्कि यह दोहा तुलसीदास जी के नाम…
चाय
जब मैं छोटा था, 12 वर्ष का रहा होऊंगा। मैंने तब चाय बनाना सीखा ही था। तब घर में कोई भी मेहमान आता, चाय मैं ही बनाता था। मुझे चाय बनाने में खुशी मिलती थी, बड़ा मजा आता था। इसी बहाने मुझे भी चाय पीने को मिल जाती थी। एक दिन घर पर सीताराम अंकल…
प्रेमचंद जयंती
(साहित्य का दीप और समय का दर्पण) प्रत्येक युग में समय की धारा को दिशा देने वाले कुछ युगद्रष्टा जन्म लेते हैं, जो अपनी लेखनी से न केवल साहित्य का विस्तार करते हैं, अपितु समाज की चेतना को जाग्रत कर, उसे एक नई दृष्टि प्रदान करते हैं। मुंशी प्रेमचंद ऐसे ही कालजयी साहित्यकार थे, जिनके…
शुभम साहित्यिक संस्था ने शुभम जयंती पर कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया
बरेली- शुभम साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था ने शुभम की जयंती पर कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन मेयर कार्यालय के सभागार में उस्ताद शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित किया। इस अवसर पर मुख्यातिथि वरिष्ठ कवि रणधीर प्रसाद गौड़ धीर रहे तथा विशिष्ट अतिथि रहे अक़ीम उद्दीन बिजनौर व रईस अहमद राज़…
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