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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल
    आलेख

    आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी आलोचना के शिल्पकार और विचारक

    ByAdmin April 24, 2025April 24, 2025

    अनुसंधानकर्ता नाम: अमरेश सिंह भदौरियापद: हिंदी प्रवक्तासंस्थान: त्रिवेणी काशी इंटर कॉलेज, बिहार, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)शोध-वर्ष: 2025 शोध-पत्र हिंदी साहित्य का आलोचना-परिदृश्य यदि आज एक सुसंस्कृत, तर्कसंगत और ऐतिहासिक चेतना से समृद्ध अनुशासन के रूप में देखा जाता है, तो इसका श्रेय आचार्य रामचंद्र शुक्ल को जाता है। उन्होंने न केवल हिंदी आलोचना की आधारशिला रखी,…

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  • अमरेश सिंह भदौरिया की कविताएं | Amresh Singh Bhadauriya Poetry
    कविताएँ

    अमरेश सिंह भदौरिया की कविताएं | Amresh Singh Bhadauriya Poetry

    ByAdmin April 20, 2025August 31, 2025

    अमलतास चुपचाप झरता है अमलतास,जैसे पीली चूड़ियाँगिर रही हों किसी दुल्हन की कलाई से। गाँव की पगडंडी परजब धूप भी सो रही होती है,तब वहरंग भरता है उदासी में। न फूलों का शोर,न ख़ुशबू का घमंड—बस पीली परतों मेंएक ऋतु की मुस्कान ओढ़ेवह खड़ा रहता है। लड़कियाँ उसके नीचेखेल जाती हैं ब्याह-बनाव की कल्पनाएँ,बुजुर्ग उसकी…

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  • ये गूंगी शाम
    कविताएँ

    ये गूंगी शाम

    ByAdmin April 19, 2025April 19, 2025

    ये गूंगी शाम ये गुंगी शाम मेरे कानों में कुछ कहती है, तु है कहीं आसपास ये अहसास मुझे दिलाती है,बेशक तू मुझे छोड़ गया, वादा अपना तोड़ गया, किया था वादा तूने ता-उम्र साथ निभाने का, हर ग़म मेरा बांट कर मुझे खुशी के फूलों की लड़ियां दिखाने का, दे गया तू ग़म उम्र-भर…

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  • जीवन-भाग-2
    कविताएँ

    जीवन-भाग-2

    ByAdmin April 19, 2025April 19, 2025

    जीवन-भाग-2 हारना कब जितनाकब मौन रखना कबबोलना कब संतुलितहोंना कब विनम्रतापूर्वकपेश आना आदि – आदितब कहि जाकर हमइस जीवन रूपी नोकाको पार् पहुँचाने कीकोशिश कर सकते हैअतः हमनें आवेश मेंअपने आप को समनही रखा और अनियंत्रितहोकर बिना सोचें आक्रमकहोकर कुछ गलत सब्दोंका प्रयोग कर दिया तोइस जीवन रूपी नोका कोटूटने से वह डूबने से कोईभी…

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  • जीवन-भाग-1
    कविताएँ

    जीवन-भाग-1

    ByAdmin April 19, 2025April 19, 2025

    जीवन-भाग-1 हम अपने जीवन मेंचले जा रहें है कोईदौड़े जा रहे तो कोईदिशाहीन से भटक रहे हैआखिर हम सब जाकहां रहे हैं? मंज़िल कीतलाश है राह दिखती नहींराह तो है पर मंजिलनिश्चित नहीं राह औरमंज़िल दोनों है पर गति नहींआखिर क्या करे ?कैसी ये पहेली है किजीवन जीते सब हैंपर विरले ही जीवनअपना सार्थक जीते…

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  • प्रदीप छाजेड़ जी की रचनायें
    कविताएँ

    प्रदीप छाजेड़ जी की रचनायें

    ByAdmin April 16, 2025September 1, 2025

    ध्यान (Meditation) की शक्ति भारतीय संस्कृति का दर्शन कहता है कि जीवन का सार अपने भीतर की सच्चाई को खोजना है । वह इसके लिए हमको दैनिक कार्यक्रम को भी उस ओर मोड़ना जरूरी है । आज हर कोई बाहर की दुनिया को आकर्षक बनाने में लगा है । वह तन से लेकर सदन सभी…

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  • तेरी याद
    कविताएँ

    तेरी याद – मेरी कविता

    ByAdmin April 16, 2025April 16, 2025

    तेरी याद – मेरी कविता सुनो दिकु… आज जब तेरी खबर मुझ तक आई,आँखें भीग गईं, रूह मुस्काई।सुना — आज भी वही जज़्बा है,दिकुप्रेम तेरे दिल में भी ज़िंदा है। रोक रखा है तुझे वक़्त और क़समों ने,तेरे फ़र्ज़ और रिश्तों ने।तू चाहकर भी कुछ कह नहीं पाती,पर तेरी ख़ामोशी मुझसे बात है कर जाती।…

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  • वामा साहित्य मंच इंदौर की अध्यक्षा ज्योति जैन ने लुधियाना की कवयित्री डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक को किया सम्मानित
    साहित्यिक गतिविधि

    वामा साहित्य मंच इंदौर की अध्यक्षा ज्योति जैन ने लुधियाना की कवयित्री डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक को किया सम्मानित

    ByAdmin April 15, 2025April 15, 2025

    साहित्य आत्मीयता भरे रिशते बनाता है । इन्दौर यात्रा के दौरान श्री मती ज्योति जैन जी मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी पुरस्कार (2021) प्राप्त प्रतिष्ठित कवयित्री द्वारा लुधियाना की चर्चित कवयित्री डा जसप्रीत कौर फ़लक जी को अपनी संस्था की ओर से स्मृति चिन्ह प्रदान कर के सम्मानित किया । ज्योति जैन जी ने अपने वक्तव्य…

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  • मुक्तिपथ
    कविताएँ

    मुक्तिपथ

    ByAdmin April 15, 2025April 15, 2025

    मुक्तिपथ चल पड़ा हूँ मैं,बंधनों की राख से उठकर,स्वप्नों के नभ को छूने जहाँ विचार, वाणी और विवेकस्वाधीन साँसें लेते हैं। नहीं चाहिए अबवह शांति,जो चुप्पियों की बेड़ियों में बंधी हो,न वह प्रेम,जो स्वार्थ के कटघरों में सज़ा काटे। मैं चाहता हूँएक उजासजो भीतर से फूटे,एक सत्यजो भय से नहीं, आत्मा से उपजे। संस्कारों की…

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  • कर भला, हो बुरा
    कहानियां

    कर भला, हो बुरा

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    टिंकू एक पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय हैं। उनकी शादी अब से 5 वर्ष पहले प्रिया कुमारी से हुई थी। प्रिया शादी के बाद भी पढ़ना चाहती थी, तो टिंकू ने बिना किसी हिचकिचाहट के 2.5 लाख का लोन लिया और शकुंतला नर्सिंग कॉलेज में उसका एडमिशन करवा दिया। टिंकू ने सोचा कि कुछ पैसे लगेंगे तो…

    Read More कर भला, हो बुराContinue

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