• उफ़! ये क्या किया | Kahani Ye Kya Kiya

    चारों तरफ पुलिस ही पुलिस दिखाई दे रही थी। शाम तक तो सब ठीक था आखिर सुबह यह क्या हो गया? कॉलोनी में आखिर कौन आया? कोई बाहरी व्यक्ति तो अभी तक तो नहीं आया? पुलिस भी कॉलोनी के गार्ड से पूछताछ कर रही थी । उसे भी कोई सुराग नहीं मिल रहा था कि…

  • परंपरा | Kavita Parampara

    परंपरा ( Parampara ) यह कैसी परंपरा आई, दुश्मन हो रहे भाई-भाई। घर-घर खड़ी दीवारें घनी, मर्यादा गिर चुकी खाई। परंपराएं वो होती, संस्कारों की जलती ज्योति थी। अतिथि का आदर, खिलखिलाती जिंदगी होती थी। होली दिवाली पर्व पावन, सद्भावो की धाराएं भावन। गणगौर तीज त्योहार, खुशियों का बरसता सावन। परंपराएं जीवंत रखती है, मान…

  • सनम का हाल | Ghazal Sanam ka Haal

    सनम का हाल ( Sanam ka Haal ) बह्र : बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम अरकान: मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मात्रा भार : 1222 1222 1222   हसीं चेहरा गुलाबी गाल अच्छा है, हाथों तूने लिया रुमाल अच्छा है ! मचलती इस जवानी पर खिला यौवन, तेरी जुल्फों का बिखरा हाल अच्छा है ! मेरे जैसे दिवाने…

  • नींबू | Kavita Nibu

    नींबू ( Nibu )   गैस एसिडिटी और पेट दर्द पलभर में दूर करता, जिसके स्वाद एवं खुश्बू से हमें ताज़गी मिलता। कहते है यह मृत-व्यक्ति को भी जिन्दा कर देता, अगर उसके अन्दर एक भी ये बीज नही होता।। ये पीले रंग का होता लगता झाड़-काॅंटों के बीच, मसूड़ों से ख़ून आने वाली समस्या…

  • जिंदगी की लघु कहानी

    जीवन में जिंदगी जीना उतना आसान भी नहीं है हर एक मोड़ पर नाना तरह की चुनौतियां, सुरसा की तरह मुंह खोल खड़ी रहती है। जीवन को चलते-चलते राहों में हर किसी से सामना करनी पड़ती है। कभी आंधी, तूफान, सुनामी जैसा लहरों से भी सामना जिंदगी को ,हर पल एक नया जंग, नया संघर्ष…

  • विद्या शंकर विद्यार्थी की कविताएं

    गीत चैती छठ के केकर कटोरवा अब खाली बाटे होभरल अंखिया में लोरमारेला रूखनिया करेजवा में होदरद उठेला पुरजोर, केकर,,,,,। निर्धन कटोरवा अब खालि बाटेभरल अंखिया में लोरमारेला रूखनिया महंगिया नू होदरद उठेला पुरजोर, केकर,,,,। आदितमल गोसंईया मनाई कइसे होछठिया करे जाई घाटछठी माई से दुखवा बताई कइसे होगड़ल गोड़वा में कांट, केकर ,,,,,। भला…

  • तेरा वोट का है अधिकार | Kavita Tera Vote ka Hai Adhikar

    तेरा वोट का है अधिकार ( Tera Vote ka Hai Adhikar )   नेता करते सभी से प्यार, अरे, रे! बाबा, न बाबा। उन्हें सौंपो फिर से कमान, अरे, रे! बाबा, हाँ बाबा। नेता करते सभी से प्यार, अरे, रे! बाबा, न बाबा। तुम पोलिंग बूथ पे जाओ, एक अपनी बटन दबाओ। तुम भी निकलो…

  • कमलेश विष्णु की कविताएं | Kamlesh Vishnu Hindi Poetry

    अंतस्तल में दीप जलाएं ज्योति जलाएं प्रज्ञा का, फिरउपवन सा घर-बार सजाएं !खुशियों की सौगात बांटकर ,हम-सब दीपावली मनाएं !! दिवाली में अबकी हम-सब ,मिलकर ये संकल्प उठाएं !घर रौशन करने से पहले ,अंतस्तल में दीप जलाएं !! कटुता त्यागें बैर मिटाएं,दीन दुखी को गले लगाएं !हम-सब मिलकर दिवाली में,विश्व शांति का अलख जगाएं !!…

  • वसुधैव कुटुंबकम् | Natak Vasudhaiva Kutumbakam

    पात्र परिचय : 1) राष्ट्रपति महोदया : उम्र 55 वर्ष। 2) मुख्यमंत्री : उम्र 45 वर्ष। 3) एजुकेशन मिनिस्टर : उम्र 42 वर्ष । 4) रामू ,कालू ,रीता, लीना : उम्र 25 से 30 वर्ष। 4) अंग्रेजी टीचर रॉक्सन उम्र 40 वर्ष । 5) हिंदी टीचर : मोहन कुमार – उम्र 45 वर्ष । 6)…

  • जब जब सुरसा बदन बढ़ावा

    सुरसा बाधा का प्रतीक है। जीवन में हम जब श्रेष्ठ कार्य करने चलते हैं तो अनेकानेक लोग बाधाएं उत्पन्न किया करते हैं ।अब हमें चाहिए कि हनुमान जी की तरह उन बाधाओं को खत्म करके अपने लक्ष्य की तरफ कदम आगे बढ़ाएं। जीवन में आने वाले ऐसी बाधाओं से बिना घबराए उन बाधाओं से दो-दो…