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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • घूंघट न होता तो कुछ भी न होता
    छंद

    छंद घूंघट | मनहरण घनाक्षरी

    ByAdmin April 11, 2024

    छंद घूंघट मान मर्यादा रक्षक, लाज शर्म धर ध्यान। चार चांद सौंदर्य में, घूंघट सजाइए। प्रीत की फुहार प्यारी, सुंदर सुशील नारी। पिया मन को लुभाती, घूंघट लगाइए। गौरी का श्रृंगार सौम्य, प्रियतम मन भाए। गोरा मुखड़ा चमके, घूंघट दिखाइए। पहने परिधान वो, घर की पहचान वो। भारत की शान नारी, घूंघट हटाइए। कवि : रमाकांत…

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  • Kavita Wah Aadmi
    कविताएँ

    वह आदमी | Kavita Wah Aadmi

    ByAdmin April 11, 2024

    वह आदमी ( Wah Aadmi )   वह आदमी दो कमरों के मकान में बड़ा खुश था कि अन्ना – आन्दोलन ने उसे राजनीति के कच्चे शीशे में जड़ा सपना दिखा दिया . वह आदमी सब पर आरोप मढ़ा हुआ जा बैठा महत्वाकांक्षा के औंधे शिखर पर . वह आदमी चुंकि आम आदमी था लोगों…

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  • Kavita Aaj Bhi Betiyan
    कविताएँ

    आज भी बेटियाँ | Kavita Aaj Bhi Betiyan

    ByAdmin April 11, 2024

    आज भी बेटियाँ ( Aaj Bhi Betiyan )   सिल बट्टा घिसती है, खुद उसमे पिसती है, बूँद बूँद सी रिसती है, मगर फिर भी हँसती, आज भी बेटियाँ गाँव शहर में….!! नाज़ो से पलती है, चूल्हे में जलती है, मनचाही ढलती है, फिर भी ये खलती है, आज भी बेटियाँ गाँव शहर में ….!!…

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  • Kavita Sharmsar Manavata
    कविताएँ

    शर्मसार मानवता | Kavita Sharmsar Manavata

    ByAdmin April 11, 2024

    शर्मसार मानवता ( Sharmsar Manavata )   धधकती स्वार्थ की ज्वाला में पसरती पिशाच की चाह में भटकती मरीचा की राह में चौंधराती चमक की छ्द्म में अन्वेषी बनने की होड़ में त्रिकालदर्शी की शक्ल में, दिखता है मानव वामन बनके चराचर जगत को मापने लगायी है अनगिन कतारें शुम्भ-निशुंभों की छाया में प्रकट है…

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  • Kavita Thakan
    कविताएँ

    थकान | Kavita Thakan

    ByAdmin April 11, 2024

    थकान ( Thakan )   जरूरी नहीं कि हर अंधेरा रोशनी के साथ हि पार किया जाय हौसलों के दीये कुछ दिल में भी जलाये रखा करिये माना कि गम कम नहीं जिंदगी में आपकी जरूरते भी तो कम नहीं पैदल के सफर में लगता है वक्त भी पास की भी दूरी लगती कम नहीं…

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  • Vasantik Navratri
    कविताएँ

    वासंतिक नवरात्र द्वितीय | Kavita Vasantik Navratri

    ByAdmin April 11, 2024April 11, 2024

    वासंतिक नवरात्र द्वितीय   जीवन पथ ज्योतिर्मय, मां ब्रह्मचारिणी उपासना से नवरात्र द्वितीय परम बेला, रज रज आध्यात्म सराबोर । भक्तजन शीर्ष स्तुति भाव, भक्ति आह्लाद चारों ओर । मां ब्रह्मचारिणी वंदन अभिनंदन, मंगल पावन हिय भावना से । जीवन पथ ज्योतिर्मय, मां ब्रह्मचारिणी उपासना से ।। अमोध फलदायिनी आभा, अद्भुत अनुपम व विशेष ।…

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  • Eid Mubarak Shayari in Hindi
    शेरो-शायरी

    ईद मुबारक शायरी | Eid Mubarak Shayari in Hindi

    ByAdmin April 11, 2024

    ईद मुबारक शायरी ( Eid Mubarak Shayari ) खोल दीजिए रंजिशों की अब यह बेड़ियाँ, ख़त्म कीजिए नफ़रतों की यह सरगर्मियाँ, मिट जाने दीजिए ये फ़ासले जो हायल हैं, हासिल क्या होगा बढ़ा के दिलों में दूरियाँ, एहसासो-जज़्बात जो पड़ गए हैं, मांद से, भर दीजिए, आज इनमें ईद की रौशनियाँ, ग़ैरों को भी इस…

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  • Vote Par Bhojpuri Kavita
    भोजपुरी कविता

    वोटवा तव हर केहू चाहे | Vote Par Bhojpuri Kavita

    ByAdmin April 11, 2024

    वोटवा तव हर केहू चाहे   वोटवा तव हर केहू चाहे, आपन कहावेवाला के बा। जीतले पे उड़ि ऊ सुगनवाँ हो, चेहरा दिखावेवाला के बा। पांच साल मुड़ि-मुड़ि रहिया निहरली, परछाईं नेताजी कै नाहीं देख पउली। फिर से दिखाइहैं ऊ अंजोरिया हो, चँदनिया बिछावेवाला के बा। जीतले पे उड़ि ऊ सुगनवाँ हो, चेहरा दिखावेवाला के…

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  • ईद सबके लिए खुशियाँ नहीं लाती
    कविताएँ

    ईद सबके लिए खुशियाँ नहीं लाती | Eid Kavita

    ByAdmin April 11, 2024April 11, 2024

    ईद सबके लिए खुशियाँ नहीं लाती   रोजे हुए मुकम्मल अब ईद आई है कहाँ से लाऊँ? घी शक्कर सेवइयां नये अंगवस्त्र… बच्चों की है जिद जबरदस्त! ईदगाह जाने की है जल्दी कैसे समझाऊँ उन्हें? फाकाकशी है घर में रेशमी लिबास नहीं दाल आटा जरूरी है जिंदा रहने के लिए परवरदिगार, सब्र अता फरमा इन…

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  • Kavita Karm
    कविताएँ

    कर्म से तू भागता क्यों | Kavita Karm

    ByAdmin April 11, 2024April 11, 2024

    कर्म से तू भागता क्यों ?   क्या बंधा है हाथ तेरे कर्म से तू भागता क्यों? पाव तेरे हैं सलामत फिर नहीं नग लांघता क्यों? नाकामियों ने है डराया वीर को कब तक कहां ? हार हिम्मत त्याग बल को भीख है तू मांगता क्यों ? मानता तू वक्त का सब खेल है बनना…

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