• सांप तुम सभ्य कब हुए

    सांप तुम सभ्य कब हुए   सांप तुम सभ्य कब हुए तुम विश्वास दिलाते हो मेरी विष थैली में अब भरा हुआ है अमृत दंश करना छोड़ दिया है मैंने लोग गाते हैं जीवन-गीत सांप तुम पर भला कभी भरोसा किया जा सकता है बेफिक्र जीया जा सकता है नहीं बिल्कुल नहीं हंसुआ टेंढ़ का…

  • सबको ही बहलाती कुर्सी | Poem in Hindi on Kursi

    सबको ही बहलाती कुर्सी   सबको ही बहलाती कुर्सी अपना रंग दिखाती कुर्सी दौड़ रहे हैं मंदिर-मस्जिद कसरत खूब कराती कुर्सी ख्वाबों में आ-आ ललचाऐ आपस में लड़वाती कुर्सी पैसे से है हासिल डिग्री कितनों को अब भाती कुर्सी ऊँचे- नीचे दम-खम भर कर मन-मन आग लगाती कुर्सी :सड़को से संसद तक वादे खूब उन्हें…

  • बंजारा के दस कविताएं

    1 प्रवाह ——- सोचता हूं कि दुनिया की सारी बारूद मिट्टी बन जाये और मैं मिट्टी के गमलों में बीज रोप दूं विष उगलती मशीनगनों को प्रेम की विरासत सौप दूं . पर जमीन का कोई टुकड़ा अब सुरक्षित नहीं लगता . कि मैं सूनी सरहद पे निहत्था खड़ा अपने चश्मे से, धूल -जमी मिट्टी…

  • डॉ.भीमराव अम्बेडकर जयंती

    डॉ.भीमराव अम्बेडकर जयंती ( 2 ) चौदह अप्रेल अम्बेडकर जयंती है जशन मनायें संविधान निर्माता की जयंती है जशन मनायें अभावों में जीवन बसर कर आगे बढ़े पग पग पर अपमान झेल आगे बढ़े मां बाप का चौदहवां रतन अनमोल हीरा चौदह अप्रैल जयंती भारत रतन अनमोल हीरा विदेश में शिक्षा अर्जित की इकलोता शेर…

  • माता रानी की महिमा

    माता रानी की महिमा   मां की महिमा अपरंपार हो जाए सबका बेड़ापार कर लो माँ के जगरात्रे पूजा व्रत पाठ नहीं आने देंगी मां तुम पर कोई आंच शक्ति संप्रदाय की देवी दुर्गा आदि शक्ति भवानी अंधकार अज्ञानता रूपी राक्षसों से रक्षा करने वाली ममतामयी मोक्षदायिनी जगत कल्याणकारी मां भवानी शांति समृद्धि धन-धान्य देने…

  • गरीबों के मसीहा देशरत्न डॉ.भीमराव अम्बेडकर !

    भारतवर्ष की पावन भूमि पर कई महान विभूतियों ने जन्म लिया है। अपने सत्कर्मों से देश को एक नई रोशनी भी दी है। इन्हीं महान विभूतियों र्मेे से देश रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर भी एक थे। बाबासाहब का जन्म १४ अप्रैल, १८९१ ई. को एक दलित अतिसाधारण परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम…

  • सदाचार | Kavita Sadachar

    सदाचार ( Sadachar )   आए हो दुनिया में तो, दुनियादारी भी निभाओ, ऐ इंसानों थोड़ा तो सदाचार का गुण अपनाओ, आकर जहाने-फ़ानी में न अपना फ़र्ज़ भूलाओ, ऐ इंसानों थोड़ा तो सदाचार का गुण अपनाओ, भूखे,बिलकते बच्चों से ना तुम मुँह फेर जाओ, ऐ इंसानों थोड़ा तो सदाचार का गुण अपनाओ, अपनी भरी प्लेट…

  • नियति चक्र | Kavita Niyati Chakra

    नियति चक्र ( Niyati Chakra )   टूट जाते हैं तारे भी लगता है ग्रहण चाँद और सूरज को भी बंधे हैं सभी नियति चक्र के साथ ही रहा यही नियम कल भी आज भी हो सकते हैं कर्म और धर्म झूठे परिणाम कभी गलत नहीं होता जीवंत जगत में मिले छुट भले प्रारब्ध में…

  • जो अम्बेडकर को पढ़ेगा

    जो अम्बेडकर को पढ़ेगा   पूरी ईमानदारी से- जो गाँधी और मार्टिन को पढ़ेगा, वो सत्य-अहिंसा का मार्ग चुनेगा; जो भगत और चे को पढ़ेगा वह निश्चित ही क्रांति करेगा; जो लोहिया व लेनिन को पढ़ेगा वो समाजवाद की दुनिया रचेगा; जो सावित्रीबाई-टरेसा को पढ़ेगा वो शिक्षा-सेवा का पथ चुनेगा; जो सुकरात-पेरियार को पढ़ेगा, वह…

  • आंखों से करती जादू है | Ghazal Aankhon se

    आंखों से करती जादू है आंखों से करती जादू है दिल होता यूं बेकाबू है सांसें महके तुझमें हर पल उड़ती जो तेरी ख़ुशबू है देख रहा है दूर खड़ा वो आ के बैठा कब पहलू है कब फ़ूल दिया है उल्फ़त का मारा नफ़रत का चाकू है बात न की आज़म यूं तुझसे कड़वी…