• कविता कैसे लिखूं | Kavita Kaise Likhun

    कविता कैसे लिखूं ( Kavita Kaise Likhun )   कविता कैसे लिखूं मन तो हजारों गोते लगा रहा कविता कैसे लिखूं ? मन कभी घर के अंदर लगा रहता तो कभी घर के बाहर कविता कैसे लिखूं ? मन कभी माता-पिता में लगा रहता तो कभी बच्चों में कविता कैसे लिखूं ? मन में उठती…

  • आग | Kavita Aag

    आग ( Aag ) आग में हि आग नहीं होती पानी में भि होता है दावानल धातुयें भी बहती हैं जमीं मे धारा की तरह आसमान से भी बरसती है आग धूप बनकर आग का होना भी जरूरी है हिम्मत, हौसला, जुनून के लिए बिना ऊर्जा के शक्ति मिलती नही बिना आग के ज्योत जलती…

  • हम दिल से हारे | Hum Dil se Hare

    हम दिल से हारे ( Hum Dil se Hare )   दुनिया को देखने का अपना नुक़्ता-ए-नज़र है मेरा, मोम के लिए मोम हूँ वरना हर लफ़्ज़ खंजर है मेरा, हम दिल से हारे दिमाग़ करता ना ऐसी बेवकूफ़ियाँ, रिश्ते निभाने की ख़ातिर ज़िंदगी हुआ ज़हर है मेरा, मोहब्बतों की..बेपनाह गुल खिलाने की आरज़ू थी,…

  • तुम क्या कहोगे | Geet Tum kya Kahoge

    तुम क्या कहोगे ( Tum kya Kahoge )   हम हलकानी में जी लेते हैं, तुम क्या कहोगे हम आग-पानी में जी लेते हैं, तुम क्या कहोगे। बोते हैं गेहूंँ काटते हैं गेहूंँ बटाई के खेत लिए हम फूसपलानी में जी लेते हैं, तुम क्या कहोगे। हमारे बच्चे होटल में धोते हैं प्लेट पेट के…

  • नालायक | Laghu Katha Nalayak

    “अंकल, हम आपकी बेटी जैसी नहीं लगती जो आप इस घर में इतना तनाव बनाए हुए हैं? पापा मेरे, आपकी बेटी की शादी के लिए प्रतिबद्ध थे कि भाई की बेटी हमारी बेटी होती है। हम किसी भी हाल में अलग नही होंगे। जब आपकी बेटी की शादी हो गई तो आप अलग होने के…

  • छोटा सा बस्ता | Kavita Chhota sa Basta

    छोटा सा बस्ता ( Chhota sa Basta )   मांँ मुझे छोटा सा बस्ता दिला दे मांँ मुझे छोटा सा बस्ता दिला दे बस्ता दिला दे मांँ,बस्ता दिला दे बस्ता ले जाऊंगी मैं स्कूल जाऊंगी मां मुझे छोटा सा बस्ता दिला दे मां मुझे छोटा सा पेन दिला दे मां मुझे छोटा सा पेन दिला…

  • तारों की महफ़िल | Kavita Taaron ki Mehfil

    तारों की महफ़िल ( Taaron ki Mehfil )   जब शाम होने को होती है एक एक तारा निकल आता है, ज्यों ज्यों रात की शुरुआत होती इनका झमघट हो जाता है। रात का नया पड़ाव ऐसे सजाती तारें जैसे रोज दिवाली है, दीपों जैसी सुन्दरता इठलाती बलखाती रात सुहानी है। जब लेटा किसान मजदूर…

  • उजाला | Kavita Ujala

    उजाला  ( Ujala )   रहती तो है कोशिश यही कि रहूँ मुकम्मल बात पर अपने कर देते हैं लोग हि मजबूर इतना कि फिर ख्याल बदल जाते हैं शिला पर भी यदि गिरती रहे धार तेज जल के प्रवाह की, तो निशान की पड़ हि जाती है छाप संगत बेअसर नही हो पाती होती…

  • हकीकत की भूल | Kavita Haqeeqat

    हकीकत की भूल ( Haqeeqat ki Bhool )    संवरती नही कभी हकीकत की भूल नुमाइश की जिंदगी कागज के फूल बंजर जमीं के नीचे व्यर्थ बीज की गुणवत्ता लोभी नेता के हाथों फली कब देश की सत्ता भरते हैं उडान हरे परिंदे सभी को आसमान नहीं मिलता और की उम्मीद पर गुल नही खिलता…

  • संघर्ष पथ पर | Kavita Sangharsh Path par

    संघर्ष पथ पर, मानव सदा अकेला   स्वार्थी रिश्ते नाते परिवार समाज, सफलता संग अपनत्व भाव । विपरित कटु वचन प्रहार, शत्रुवत आचरण बर्ताव । आलोचना तीर अवरोध पर्याय, कदम कदम कंटक मेला । संघर्ष पथ पर,मानव सदा अकेला ।। लक्ष्य राह दिग्भ्रमित युक्ति, प्रेरणा अनुग्रह विलोपन । दमन आशा उमंग उल्लास, नैराश्य बीज घट…