• ख़्वाब में तुम | Ghazal Khwab mein Tum

    ख़्वाब में तुम ( Khwab mein Tum )   मेरे ख़्वाब में तुम आए थे या फ़क़त वहम था, तुम ही तुम दिख रहे थे ऐसा खोया ज़हन था, तुम्हारी कुर्बत का एहसास…कभी जाता नहीं, आँखें खुली तो दिल तन्हाईं से गया सहम था, ख़्वाब ही बेहतर लगते हैं मुझको हक़ीक़त से, ख़्वाब में सुकून…

  • दीवार | Kavita Deewaar

    दीवार ( Deewaar ) ( 2 ) होते थे कभी मकान मिट्टी के कच्चे मगर उनमे पलते थे प्यार पक्के आज बढ़ने लगे हैं मकान पक्के मगर रिश्ते दिल के हो गये हैं कच्चे कभी होते थे रिश्ते खून के अपने अब अपने ही करने लगे खून रिश्तों का चलने लगे हैं खेल चौसर के…

  • शिक्षा का आधार | Kavita Shiksha ka Aadhar

    शिक्षा का आधार ( Shiksha ka Aadhar )   इल्म की रौशनियाँ जग में जो फैलाते हैं, ज़िन्दगी जीने का गुर जो हमें सिखाते हैं, लड़खड़ाहती है , जब भी ज़ुबाने हमारी, शिक्षक ही हर्फ-बा-हर्फ हमको रटाते हैं, अलिफ़ से अल्लाह की पहचान कराते, गीता बाईबिल में , ख़ुदा वही दिखाते हैं, वालिदैन का दुनिया…

  • उमंग | Kavita Umang

    उमंग ( Umang ) भारतवर्ष हमारा है विकसित, सभ्यता,संन्कृति भी है उन्नत, षटॠतुऔं का होता आवाजाही हर ॠतु में आते पर्व,वर्चस्व,माही।। फाल्गुन पूर्णिमा में होली तौहार रंग,गुलाल का बासंती विहार, नाना उमंग का होता आप्लावन नई नवेली बधु के लिए,रास,धन।। संयोगी के लिए खास है परव, नानाविध पकवान का लुत्फ, इष्ट,मित्र मंड़ल संग होली,राम उमंग…

  • होली के रंग | Poem Holi ke Rang

    होली के रंग ( Holi ke Rang )   होली के इन्द्रधनुषी रंग, बड़े लाजवाब हैं। जो ऐंठे रहते हैं हरदम, और नाक पे गुस्सा, उनके लिये इस होली में बढ़िया जवाब है। रंगों से है परहेज़ जिन्हें, दुबके पड़े घर पर, निकलेंगे अगर बाहर तो खानाखराब है। ऐ दोस्त मेरे होली-ए-दस्तूर ग़ज़ब का, दो…

  • परख | Kavita Parakh

    परख ( Parakh )   न था आज कल से जुदा न होगा आज कल से होती नही स्थिरता जल में कभी हो रही नित हलचल से जुड़ा है धागा समय से घटनाएं हैं मनके जैसी हर मनके का है मूल्य अपना जीवन में हर एक सांस जैसी हर लम्हे दे जाते हैं कुछ हर…

  • टूटता आशियाना | Kahani Tootata Aashiyaana

    चारों तरफ अफरातफरी मची हुई है। पूरे मार्केट में सन्नाटा छाया हुआ है। सभी सर पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। सरकारी फरमान जारी हो चुका है। सभी के मकान दमीजोख होंगे। रामू ने अभी किसी प्रकार से नया घर बनाया था। उसकी बहुत चाहत थी कि रोड पर एक कुटिया बनाकर दाल रोटी का…

  • लोगआखिर क्यों आग लगाते हैं | Geet Log Aakhir

    लोगआखिर क्यों आग लगाते हैं ( Log Aakhir Kyon Aag Lagate Hain )   लोग आखिर क्यों आग लगाते हैं फिर मदद के लिए सामने आते हैंं। मैंने देखा है उन्हें चौराहे पर रोते जिनका जला है घर आंँखें भिगोते ऐसे वैसे और झूठे भी समझाते है। लोग आखिर क्यों आग लगाते हैं।। मजहब की…

  • सम्राटअशोक महान | Kavita Samrat Ashok

    सम्राटअशोक महान ( Samrat Ashok Mahan ) क्रांति की ताकत से, शांति का संदेश देवनांप्रिय चक्रवर्ती सम्राट, मौर्य राजवंश अनूप छवि । अखंड भारत साम्राज्य परिध, शक्ति ओज सदृश रवि । अंतर परिवर्तन बिंदु कलिंग, वरण बौद्ध धर्म नमन संजेश । क्रांति की ताकत से, शांति का संदेश ।। पितृसत्तात्मक शासन उपमा, लोक कल्याण परोपकार…

  • बाटड़ल्यां जोवां निजरां सूं | राजस्थानी भाषा

    बाटड़ल्यां जोवां निजरां सूं   बाटड़ल्यां जोवां निजरां सूं, नैणा सूं बतळावां म्हे। आओ म्हारा प्यारा पांवणा, गीत सुरीला गावां म्हे। पलक पांवड़ा राह बिछादयां, हेत घणों बरसावां म्हे। मिजमानी मीठी बोल्या सूं, लाड घणों लडावां म्हे। वीर जुझारू लड़या घणा ही, परचम न लहरावां म्हे। तलवारां रां रो जोश घणो, केशरियो फहरावां म्हे। आन…