बाटड़ल्यां जोवां निजरां सूं | राजस्थानी भाषा

बाटड़ल्यां जोवां निजरां सूं

 

बाटड़ल्यां जोवां निजरां सूं, नैणा सूं बतळावां म्हे।
आओ म्हारा प्यारा पांवणा, गीत सुरीला गावां म्हे।

पलक पांवड़ा राह बिछादयां, हेत घणों बरसावां म्हे।
मिजमानी मीठी बोल्या सूं, लाड घणों लडावां म्हे।

वीर जुझारू लड़या घणा ही, परचम न लहरावां म्हे।
तलवारां रां रो जोश घणो, केशरियो फहरावां म्हे।

आन बान शान सूं जीणो, ई माटी प मर ज्यावां म्हे।
कूद पड़ी जौहर ज्वाला म, पद्मिनी आन सुणावां म्हे।

हळदीघाटी याद करो, राणा प्रताप रा गुण गावां म्हे।
हिवड़ा म बसाकै राखां, माटी रो तिलक लगावां म्हे।

काकड़ी मतीरा खाल्यो, मोतीड़ा निपजावां म्हे।
चालो म्हारा खेत म, थानै घूमर घाल दिखावां म्हे।

गणगोरया म गजबण नाचे, चंग ढोल बजावां म्हे।
फाग खेलां सगळा मिलकै, तीज त्योंहार मनावां म्हे।

दीवाळी रो दीवलो रखल्यो, चौक च्यानणी गावां म्हे।
आओ म्हारा देश बटेऊ, कर कर मनुवार बुलावा म्हे।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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