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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Ghazal Majboor
    ग़ज़ल

    मज़बूर | Ghazal Majboor

    ByAdmin April 4, 2024

    मज़बूर ( Majboor ) जिस्म से तो नहीं, सोच से मा’ज़ूर हुए हम, आख़िर नफ्स के आगे क्यों मज़बूर हुए हम, इन दुनियावी आसाईशों से, यूँ मुतासिर हुए, कि…..अपने रब्बे-इलाही से ही दूर हुए हम, आख़िर क्यों ख़ुशियाँ दस्तक देगी दर पे मेरे, कि..खुद ही ग़मों के अंधेरे से बे-नूर हुए हम, रोज़ शाम से…

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  • Geet Ped Raha na Rahe Parinde
    गीत

    पेड़ रहा न रहे परिंदे | Geet Ped Raha na Rahe Parinde

    ByAdmin April 4, 2024

    पेड़ रहा न रहे परिंदे ( Ped Raha na Rahe Parinde )   हमें बस दाल रोटी भर जैसे दे दे रब और इससे ज्यादा तुमसे मांगे हैं कब। थके मेरे इन हाथो में वो जोड़ नहीं है जूते सी कर जीते थे वो मोड़ नहीं है रही नहीं स्थिति पहले जैसी है अब। कहते…

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  • Kavita Charan Sparsh
    कविताएँ

    चरण स्पर्श क्यों | Kavita Charan Sparsh

    ByAdmin April 4, 2024

    चरण स्पर्श क्यों ( Charan Sparsh )   एक हि अग्निपिंड से है बना ब्रम्हांड होता रहता इनमे अखंड नाद रहती इक दूजे मे ऊर्जा सदा प्रवाहित करती आदान प्रदान निज गुणों के साथ होता कण कण प्रभावित इक दूजे से होकर देह से विसर्जित हो जाती वसुधा मे सिर शिखा से हो पद तल…

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  • Ghazal Yoon Nahi
    ग़ज़ल

    यूँ नहीं ये दिल दुखाना चाहिए | Ghazal Yoon Nahi

    ByAdmin April 4, 2024

    यूँ नहीं ये दिल दुखाना चाहिए ( Yoon nahi ye dil dukhana chahiye )   यूँ नहीं ये दिल दुखाना चाहिए अब बुलाया है तो आना चाहिए आज सबको नफ़रतों के दौर में प्यार का मतलब बताना चाहिए जो घरों से दूर पंछी आ गए अब उन्हें तो लौट जाना चाहिए दोस्ती करने से पहले…

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  • Kavita Prem Palega Jab Antas mein
    कविताएँ

    प्रेम पलेगा जब अंतस में | Kavita Prem Palega Jab Antas mein

    ByAdmin April 4, 2024April 4, 2024

    प्रेम पलेगा जब अंतस में ( Prem palega jab antas mein )   प्रेम पलेगा जब अंतस में,पीड़ा बारंबार मिलेगी निज स्वार्थ अस्ताचल बिंदु, समता भाव सरित प्रवाह । त्याग समर्पण उरस्थ प्रभा, स्पृहा मिलन दर्शन अथाह । पग पग कंटक शूल चुभन, पर मुखमंडल मुस्कान खिलेगी । प्रेम पलेगा जब अंतस में, पीड़ा बारंबार…

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  • Kavita Uthi Kalam
    कविताएँ

    उठी कलम | Kavita Uthi Kalam

    ByAdmin April 4, 2024April 4, 2024

    उठी कलम ( Uthi Kalam )   उठी कलम चली लेखनी कविता का स्वरूप हुआ। शब्द सुसज्जित सौम्य से काव्य सृजन अनूप हुआ। टांग खींचने वाले रह गए सड़कों और चौराहों तक। मन का पंछी भरे उड़ानें नीले अंबर आसमानों तक। छंद गीत गजलों को जाना कलमकारों से मेल हुआ। एक अकेला चला निरंतर अब…

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  • Mahakati Saanson Mein
    कविताएँ

    महकती सांसों में तुम्हें बसा लूं | Mahakati Saanson Mein

    ByAdmin April 4, 2024

    महकती सांसों में तुम्हें बसा लूं ( Mahakati Saanson Mein Tumhe Basa Loon ) मेरी महकती सांसों में तुम्हें बसाके रखूंगा। सांसों की सरगम सजीली बना के रखूंगा। महकती सी फुलवारी हो सजा दूं जो तुम कहो। दिल दीवाना प्यार का मंदिर बना दूं तुम कहो। हसीं वादियां तुमको पुकारे आजा मेरे दिल के द्वारे।…

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  • Ghazal Saath ke Pal
    ग़ज़ल

    साथ के पल | Ghazal Saath ke Pal

    ByAdmin April 3, 2024

    साथ के पल ( Saath ke Pal )   आज भी याद है तुमसे पहली मुलाकात के पल, कितने ख़ूबसूरत थे, वो मेरे तुम्हारे साथ के पल, थका-हारा जब लौटा करता था आशियाने पे मैं, तुम्हारी मासूम मुस्कुराहट भूला देती दर्द के पल, मेरे दिल की शहज़ादी तेरा दामन भर दूँ फूलों से, लम्हा-लम्हा करवट…

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  • Ghazal Ishq Vishk
    ग़ज़ल

    इश्क विश्क प्यार व्यार | Ghazal Ishq Vishk

    ByAdmin April 3, 2024

    इश्क विश्क प्यार व्यार (Ishq Vishk Pyaar Vyaar)   इश्क विश्क प्यार व्यार सब बेकार बातें है, मिलना जुलना कुछ वक्त की मुलाकातें है ! पानी के बुलबुले सी है चांदनी कुछ पल की, उसके बाद सिर्फ तन्हा स्याह काली रातें है ! अपने-अपने स्वार्थ से जुड़ते है सब यहां पर, मतलबी लोग, झूठे दुनिया…

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  • Thakur Anand Singh Shekhawat ji
    कविताएँ

    ठाकुर आनंद सिंह शेखावत जी | Thakur Anand Singh Shekhawat ji

    ByAdmin April 3, 2024

    ठाकुर आनंद सिंह शेखावत जी  ( Thakur Anand Singh Shekhawat ji )   सनातन संस्कृति के पोषक भरा दिव्य ज्ञान का भंडार। नवल कुंज हो संतों की सेवा बरसती हरि कृपा अपार। आनंदसिंह शेखावतजी मृदुभाषी गुणी अरू विद्वान। गोपालक गौ सेवक प्यारे कवियों का करते सम्मान। यज्ञ हवन देव पूजा अर्चना सनातन पुरुष जहां प्रधान।…

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