Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Kavita Mobile ki Mahima
    कविताएँ

    मोबाईल की महिमा | Kavita Mobile ki Mahima

    ByAdmin April 3, 2024

    मोबाईल की महिमा ( Mobile ki Mahima )   कितना प्यारा है कितना न्यारा है सबके आंखों का तारा है तू! क्या बच्चे क्या व्यस्क क्या बालायें क्या बूढे उंगलियां उनके नीचे सदा दिन-रात घनघनाती बच्चे गेम्स में व्यस्क चैट कर वूढें यूट्यूब पर झूमते-गाते रहते! वनिता ओं के कहने शरमों-हया को धता बता कर…

    Read More मोबाईल की महिमा | Kavita Mobile ki MahimaContinue

  • Kavita Aam Chunav
    कविताएँ

    आमचुनाव | Kavita Aam Chunav

    ByAdmin April 3, 2024

    आमचुनाव ( Aam chunav )   फिर आमचुनाव ये आया है, सरकार ने बिगुल बजाया है। मतदारों कुछ तो नया करो, देश का कुछ तो भला करो। डीजल, पेट्रोल फिर हो सस्ता, हालत देखो कितनी खस्ता। डी. ए. पी. का है भाव चढ़ा, कितना अरहर का दाम बढ़ा। कुछ तो हमारी मया करो, देश का…

    Read More आमचुनाव | Kavita Aam ChunavContinue

  • Ghazal Pagdandiya
    ग़ज़ल

    पगडंडियाँ | Ghazal Pagdandiya

    ByAdmin April 3, 2024

    पगडंडियाँ ( Pagdandiya )   जिनके पांव जिंदगी के पगडंडियों पर नहीं चलते राहें राजमहल का ख्वाब सब्जबाग जैसा उन्हें दिखता जिनके सपने धरा की धूलों को नहीं फांकते साकार नामुमकिन सा उन्हें हो जाता है जिन्दगानी में समर की इबारत न लिखी जरा सुहाने सफर की कल्पना थोती रह जाती है मुस्कान की अरमान…

    Read More पगडंडियाँ | Ghazal PagdandiyaContinue

  • Kavita Uski Aukat
    कविताएँ

    उसकी औकात | Kavita Uski Aukat

    ByAdmin April 3, 2024

    उसकी औकात ( Uski Aukat ) करते हैं काम जब आप औरों के हित में यह आपकी मानवता है करते हैं आपके लिए लोग जब काम तो यह आपकी महानता है बड़े खुशनसीब होते हैं वो लोग जिन्हे फ़िक्र और की होती है बदनसीब तो बेचारे खुद के लिए भी कुछ कर नही पाते इच्छाएं…

    Read More उसकी औकात | Kavita Uski AukatContinue

  • अप्रैल फूल बनाना पड़ा महंगा
    संस्मरण

    “अप्रैल फूल” बनाना पड़ा महंगा

    ByAdmin April 3, 2024

    मजाक की अपनी एक सीमा होती है। कुछ पल के लिए उसे बर्दाश्त किया जा सकता है जब तक की किसी को शारीरिक/मानसिक या आर्थिक हानि ना पहुँचे। यादों के झरोखों से एक किस्सा  साझा कर रहा हूँ। यह उन दिनों की बात है जब हम स्कूल में सिक्स्थ स्टैंडर्ड में पढ़ते थे। इत्तेफाक से…

    Read More “अप्रैल फूल” बनाना पड़ा महंगाContinue

  • सियासत के इस दौर में तो पलटूओं की भीड़ है
    ग़ज़ल

    सियासत के इस दौर में तो पलटूओं की भीड़ है

    ByAdmin April 3, 2024

    सियासत के इस दौर में तो पलटूओं की भीड़ है   कैसे मेरा दिल कह दे कि जंगजूओं की भीड़ है, सियासत के इस दौर में तो पलटूओं की भीड़ है। घुट रहा है दम सभी का, नफ़रतों के धुएं में, कह रहा है राजा फिर भी, खुशबूओं की भीड़ है। एक बाज़ीगर जो आ…

    Read More सियासत के इस दौर में तो पलटूओं की भीड़ हैContinue

  • How to stay healthy in old age in Hind
    विवेचना

    वृद्धावस्था में स्वस्थ कैसे रहे | विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष

    ByAdmin April 2, 2024

    जीवन में वृद्धावस्था अवश्यंभावी है इस सत्य से लोग डरते है। साठ वर्ष के बाद के समय को ही वृद्धावस्था मानते है। वृद्धावस्था में सुखी व स्वस्थ कैसे रहे यह हमारा अधिकार है। वैसे तो हर रोग इस उम्र में हो सकता है लेकिन शारीरिक कमजोरी की वजह से ज्यादा तकलीफ देता है वृद्धावस्था में…

    Read More वृद्धावस्था में स्वस्थ कैसे रहे | विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेषContinue

  • Kahani Kab Ayegi Mai
    कहानियां

    कब आएगी माई | Kahani Kab Ayegi Mai

    ByAdmin April 2, 2024

    दिव्यांश अभी 2 वर्ष का भी नहीं हुआ था कि उसकी दादी नहीं रही। वह दादी को माई ही कहकर बुलाया करता था। दादी को न देखकर पूछता कि पापा दादी कब आएंगी। उस अबोध बालक को उसके पिता कैसे समझाते कि उसकी दादी अब इस दुनिया में नहीं रही। अक्सर वह झूठ बोल दिया…

    Read More कब आएगी माई | Kahani Kab Ayegi MaiContinue

  • Jeevan ki Shuruaat
    कविताएँ

    जीवन की शुरुआत | Jeevan ki Shuruaat

    ByAdmin April 2, 2024

    जीवन की शुरुआत ( Jeevan ki Shuruaat ) हम हरदम ही हारे ज़माना हमेशा हमसे जीत गया, हार जीत के इस खेल को खेलते जीवन बीत गया, सारे दाव-ओ-पेंचों को समझने में उम्र निकल गया, खेल के इख़्तिताम पे तन्हा थे दूर हर मनमीत गया, रिश्तों की उलझी गिरहें सुलझाने में खुद यूँ टूट गए,…

    Read More जीवन की शुरुआत | Jeevan ki ShuruaatContinue

  • Kavita Pahchan
    कविताएँ

    पहचान | Kavita Pahchan

    ByAdmin April 2, 2024

    पहचान ( Pahchan )   हम खामोश ही रहे और वो बोलते चले गए शुरू हि किया था हमने बोलना और वो उठकर चले गए यही हाल है आजकल के अपनों का न गिला रखते हैं न शिकायत करते हैं माहिर हो गए हैं वो वक्त के बस बोलने की कला रखते हैं उम्मीद रख…

    Read More पहचान | Kavita PahchanContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 256 257 258 259 260 … 838 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search