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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Dr Dayashankar Jangid
    साहित्यिक गतिविधि

    डाॅ दयाशंकर जांगिड ‘‘शब्दाक्षर’’ राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत

    ByAdmin April 2, 2024April 2, 2024

    शेखावाटी के प्रसिद्ध सेवा के लिए समर्पित वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ दयाशंकर जांगिड को ‘‘शब्दाक्षर’’ राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने राजस्थान प्रदेश के लिए अध्यक्ष मनोनीत किया है। झुंझुनू जिला ‘‘शब्दाक्षर’’ के अघ्यक्ष कवि रमाकांत सोनी ने बताया कि डाॅ जांगिड एसोसियेशन आफ अलायंस क्लब्स के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष, लायंस क्लब के…

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  • Ghazal Kya Lena
    ग़ज़ल

    क्या लेना | Ghazal Kya Lena

    ByAdmin April 1, 2024

    क्या लेना ( Kya Lena )   है रौशनी तो मुझे तीरगी से क्या लेना चमक यूँ क़ल्ब में है चाँदनी से क्या लेना हर एक तौर निभाता हूँ दोस्ती सबसे मुझे जहाँ में कभी दुश्मनी से क्या लेना बुझा न पाये कभी तिश्नगी मेरे दिल की तो अब भला मुझे ऐसी नदी से क्या…

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  • स्पृहा नीरव पथ पर, नेह अमिय स्पंदन
    कविताएँ

    स्पृहा नीरव पथ पर, नेह अमिय स्पंदन

    ByAdmin April 1, 2024

    स्पृहा नीरव पथ पर,नेह अमिय स्पंदन   उर तरंग नवल आभा, प्रसून सदृश मुस्कान । परम स्पर्शन दिव्यता, यथार्थ अनूप पहचान । मोहक स्वर अभिव्यंजना, परिवेश सुरभि सम चंदन । स्पृहा नीरव पथ पर,नेह अमिय स्पंदन ।। अनुभूति सह अभिव्यक्ति , मिलन अहम अभिलाषा । कृत्रिमता विलोपन पथ, प्रस्फुटित नैसर्गिक भाषा। अंतर्नाद मंगल मधुर, नैतिकता…

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  • Geet Khub Rota Man
    गीत

    खूब रोता मन | Geet Khub Rota Man

    ByAdmin April 1, 2024

    खूब रोता मन ( Khub Rota Man )   कभी जब याद तुम आते, दृगों को घेर लेते घन । अकेले में छुपाकर तन, सिसकता खूब रोता मन ।। न कुछ अच्छा लगे जी में, उदासी का रहे पहरा । तुम्हारी पीर अंतर् में, चलाए तीर अब गहरा ।। गए जब छोड़ प्रिय तब से,…

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  • April Fool
    कविताएँ

    अप्रेल फूल | एक हास्य कविता

    ByAdmin April 1, 2024April 1, 2024

    अप्रेल फूल ( April Fool ) कुंवारे पन से जब मैं एक दिन ऊब गया, फिल्मी माहौल में तब पूरी तरह डूब गया! बॉलीवुड का जब मुझ पर था फितूर छाया, पड़ोसन को पटाने का ख़्याल दिल में आया! मेरे घर के सामने रहती थी खूबसूरत पड़ोसन, चाहने लगा था मैं तो उसे हर पल…

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  • Kavita Sahara
    कविताएँ

    सहारा | Kavita Sahara

    ByAdmin April 1, 2024

    सहारा ( Sahara )   लड़ा नही जाता अब हालातो से अब टूटते हुए सपनो के टुकड़ों को संभाला नही जाता मां की ममता का स्नेह अब बताया नही जाता अब बस दुआ वों का सहारा है मन्नतो का आसरा है वक्त के साये तले हर शक्स का बेनकाब चेहरा है अपनी तन्हाई में अब…

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  • नवरात्रि पर्व (चैत्र) सप्तम दिवस | Chaitra Navratri Parv
    कविताएँ

    नवरात्रि पर्व (चैत्र) सप्तम दिवस | Chaitra Navratri Parv

    ByAdmin April 1, 2024April 8, 2024

    नवरात्रि पर्व (चैत्र) ( Navratri Parv ) सप्तम दिवस भुवाल माता का स्मरण सदा साथी इस जग में कोई दूसरा न साथी है । भुवाल माता पर श्रद्धा मानो दीपक में है यदि स्नेह भरा तो जलती रहती बाती है । उसके अभाव में लौ अपना अस्तित्व नहीं रख पाती है । इस जग में…

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  • Kavita Akelapan
    कविताएँ

    अकेलापन | Kavita Akelapan

    ByAdmin April 1, 2024

    अकेलापन ( Akelapan )   आज कल अकेलापन महसूस कर रहा हूं ना जाने क्यूं ऐसा लगा दादी की कहानी दादा जी का लाड मां की ममता ओर खोया बहुत चिढाचारी का खेल जोहड़ के किनारे रिपटना गुल्ली डंडा बेट बोल का खेल सब खो गया ईंटों से घर बनाना रेत से घर बनाना सब…

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  • Kavita Murkh Divas
    कविताएँ

    मूर्ख दिवस | Kavita Murkh Divas

    ByAdmin April 1, 2024April 1, 2024

    मूर्ख दिवस ( Murkh Divas )   हम मुर्ख बने मुर्ख रहे आज भी मुर्ख बनें हैं मुर्ख हैं सोचे हि नहीं कभी तात्पर्य इस मूर्खता का कर लिए स्वीकार्य हंसकर चली गई चाल थी यह हमारी संस्कृत्ति के तोड़े जाने की पावन पुनीत चैत्र प्रतिपदा को मुर्ख दिवस साबित करने की हा, हम मुर्ख…

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  • Ghazal Bahu
    ग़ज़ल

    बहू निकली है पुखराज | Ghazal Bahu

    ByAdmin April 1, 2024

    बहू निकली है पुखराज ( Bahu Nikli Hai Pukhraj ) बज उठ्ठेगी घर -घर में फिर सबके ही शहनाई उधड़े रिश्तों की कर लें गर हम मिलकर तुरपाई जीत लिया है मन सबका उसने अपनी बातों से मेरे बेटे की दुल्हन इस घर में जब से आई घर में बहू की मर्ज़ी के बिन पत्ता…

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