• उमंग | Kavita Umang

    उमंग ( Umang ) भारतवर्ष हमारा है विकसित, सभ्यता,संन्कृति भी है उन्नत, षटॠतुऔं का होता आवाजाही हर ॠतु में आते पर्व,वर्चस्व,माही।। फाल्गुन पूर्णिमा में होली तौहार रंग,गुलाल का बासंती विहार, नाना उमंग का होता आप्लावन नई नवेली बधु के लिए,रास,धन।। संयोगी के लिए खास है परव, नानाविध पकवान का लुत्फ, इष्ट,मित्र मंड़ल संग होली,राम उमंग…

  • होली के रंग | Poem Holi ke Rang

    होली के रंग ( Holi ke Rang )   होली के इन्द्रधनुषी रंग, बड़े लाजवाब हैं। जो ऐंठे रहते हैं हरदम, और नाक पे गुस्सा, उनके लिये इस होली में बढ़िया जवाब है। रंगों से है परहेज़ जिन्हें, दुबके पड़े घर पर, निकलेंगे अगर बाहर तो खानाखराब है। ऐ दोस्त मेरे होली-ए-दस्तूर ग़ज़ब का, दो…

  • परख | Kavita Parakh

    परख ( Parakh )   न था आज कल से जुदा न होगा आज कल से होती नही स्थिरता जल में कभी हो रही नित हलचल से जुड़ा है धागा समय से घटनाएं हैं मनके जैसी हर मनके का है मूल्य अपना जीवन में हर एक सांस जैसी हर लम्हे दे जाते हैं कुछ हर…

  • टूटता आशियाना | Kahani Tootata Aashiyaana

    चारों तरफ अफरातफरी मची हुई है। पूरे मार्केट में सन्नाटा छाया हुआ है। सभी सर पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। सरकारी फरमान जारी हो चुका है। सभी के मकान दमीजोख होंगे। रामू ने अभी किसी प्रकार से नया घर बनाया था। उसकी बहुत चाहत थी कि रोड पर एक कुटिया बनाकर दाल रोटी का…

  • लोगआखिर क्यों आग लगाते हैं | Geet Log Aakhir

    लोगआखिर क्यों आग लगाते हैं ( Log Aakhir Kyon Aag Lagate Hain )   लोग आखिर क्यों आग लगाते हैं फिर मदद के लिए सामने आते हैंं। मैंने देखा है उन्हें चौराहे पर रोते जिनका जला है घर आंँखें भिगोते ऐसे वैसे और झूठे भी समझाते है। लोग आखिर क्यों आग लगाते हैं।। मजहब की…

  • सम्राटअशोक महान | Kavita Samrat Ashok

    सम्राटअशोक महान ( Samrat Ashok Mahan ) क्रांति की ताकत से, शांति का संदेश देवनांप्रिय चक्रवर्ती सम्राट, मौर्य राजवंश अनूप छवि । अखंड भारत साम्राज्य परिध, शक्ति ओज सदृश रवि । अंतर परिवर्तन बिंदु कलिंग, वरण बौद्ध धर्म नमन संजेश । क्रांति की ताकत से, शांति का संदेश ।। पितृसत्तात्मक शासन उपमा, लोक कल्याण परोपकार…

  • बाटड़ल्यां जोवां निजरां सूं | राजस्थानी भाषा

    बाटड़ल्यां जोवां निजरां सूं   बाटड़ल्यां जोवां निजरां सूं, नैणा सूं बतळावां म्हे। आओ म्हारा प्यारा पांवणा, गीत सुरीला गावां म्हे। पलक पांवड़ा राह बिछादयां, हेत घणों बरसावां म्हे। मिजमानी मीठी बोल्या सूं, लाड घणों लडावां म्हे। वीर जुझारू लड़या घणा ही, परचम न लहरावां म्हे। तलवारां रां रो जोश घणो, केशरियो फहरावां म्हे। आन…

  • लोटे की जाति | Kavita Lote ki Jati

    लोटे की जाति ( Lote ki Jati ) एक दुकान पर, बहुत से लोटे रखें हैं, दुकान पर, लोटा बस लोटा है, उसकी कोई जाति नहीं है, लेकिन मनुष्य ने, लोटे की भी जाति बना दिया है, अब जिस जाति का व्यक्ति, लोटा खरीदेगा, वह उस जाति का, लोटा हो जाएगा। मनुष्य के इस पागलपन…

  • हनुमान जी | Kavita Hanuman Ji

    हनुमान जी  ( Hanuman Ji )   मैं नादान मैं नकारा आया आपके द्वार हे प्रभु हनुमान, तेरी मुआख़जा में रहूं मुवाजहा हो मेरे प्रभु हनुमान। तू नबी है क़ासिद है विष्णु का मुझे नशा तेरा नबीज़ जैसा, मैं तेरी अमानत रहूं सदा वदीअत भी हो तेरी प्रभु हनुमान। मैं फ़ाजिर हूं तेरा तलबगार हूं…

  • साहित्य संकल्प कवि संवाद मंच

    साहित्य संकल्प कवि संवाद मंच के तत्वावधान में आदरणीय आदित्यजी के निर्देशन में एक शानदार कवि सम्मेलन का आनालाइन प्लेटफार्म जूम पर आयोजन हुआ। जिसमें मुम्बई के प्रख्यात कवि एव गीतकार श्री रामकेश यादव जी, गुरुग्राम से आदरणीया कवयित्री सुशीला यादव जी, उन्नाव के प्रख्यात कवि एवं गज़लकार श्री सरल कुमार वर्मा जी, कानपुर से…