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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Kavita Holi Purani
    कविताएँ

    होली ‌पुरानी | Kavita Holi Purani

    ByAdmin March 28, 2024

    होली ‌पुरानी ( Holi Purani )   याद है वो होली मुझको। बीच गांव में एक ताल था, ताल किनारे देवी मन्दिर, मन्दिर से सटी विस्तृत चौपाल, जहां बैठकर बुजुर्ग गांव के, सुलझा देते विवाद गांव के, फिर नाऊठाकुर काका का, आबालवृद्ध के मस्तक पर, पहला अबीर तब लगता था, फिर दौर पान का चलता…

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  • Tunn Tunnu ki Holi
    कविताएँ

    टुन्न टुन्नू की होली | Kavita Tunn Tunnu ki Holi

    ByAdmin March 28, 2024

    टुन्न टुन्नू की होली ( Tunn Tunnu ki Holi )   अबकी बेरिया होली मइहां, टुन्नू भइया पीकर भंग। चटक मटक होरिहारन संग, दिन भर रहे बजावत चंग। सांझ भई तो घर का पहुॅचे, देखि भये बड़कउनू दंग। मंझिला भौजी मिलीं दुवरिया, नैन मटक कर खींची टंग। छमिया भरी बाल्टी उड़ेली, ढलकि गये तब सगरे…

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  • Kavita Shekhawati Gandh
    कविताएँ

    शेखावाटी गंध | Kavita Shekhawati Gandh

    ByAdmin March 27, 2024

    शेखावाटी गंध ( Shekhawati Gandh )   खबरों की खबर है या वो बेखबर है। हमको भी सबर है उन्हें भी सबर है। कहीं आसपास दमके नव ज्योति उजाला। चमक रहा भास्कर मेरी किस्मत का ताला। मरूवेदना सुन लो आकर दर्द मेरे दिल का। आज तक जागरण हुआ मेरे जनमत का। शेखावाटी गंध फैली हिंदुस्तान…

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  • Kavita Amraiyan
    कविताएँ

    हाथों से छीनों न अमराइयाँ | Kavita Amraiyan

    ByAdmin March 27, 2024

    हाथों से छीनों न अमराइयाँ   सौदा परिंदों का हम न करेंगे, साँसों की रफ्तार घटने न देंगें। हाथों से छीनों न अमराइयों को, पर्यावरण बिनु कैसे जियेंगे? रोते हैं पेड़ देखो कुल्हाड़ियों से, हम सब बँधे उसकी साँसों की डोर से। हरियाली का प्याला कैसे पिएंगे, पर्यावरण बिनु कैसे जियेंगे? सौदा परिंदों का… बित्ताभर…

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  • इस होली का क्या कहना | Kavita Holi ka Kya kahna
    कविताएँ

    इस होली का क्या कहना | Kavita Holi ka Kya kahna

    ByAdmin March 27, 2024

    इस होली का क्या कहना ( Is holi ka Kya kahna )   देखो राधा संग खेले नंदलाल इस होली का क्या कहना देखो उड़े चहूँ ओर गुलाल इस होली का क्या कहना हर गोपी संग दिखते कान्हा इच्छा पूरी करते कान्हा चले सब पर मायाजाल इस होली का क्या कहना कौन है कान्हा समझ…

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  • कैसी हालत है खाने के लिए | Kaisi Halat
    गीत

    कैसी हालत है खाने के लिए | Kaisi Halat

    ByAdmin March 27, 2024

    कैसी हालत है खाने के लिए ( Kaisi halat hai khane ke liye )   कैसी हालत है खाने के लिए मारे – मारे फिरे दाने के लिए मेरी झोंपड़ी में चैन की शाम नहीं बच्चे रोते हैं खिलाने के लिए चूल्हे में देख लिया धुआंँ होता नहीं कहता सो जाने के लिए लोग अश्कों…

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  • आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन का अभिनव काव्य पाठ- बोट के अंदर “रंग तरंग “
    साहित्यिक गतिविधि

    आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन का अभिनव काव्य पाठ- बोट के अंदर “रंग तरंग “

    ByAdmin March 27, 2024

    विश्व प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था ” आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन ” के साहित्यकारों द्वारा होली उत्सव पर बोट क्लब पर ‘रंग तरंग’ साहित्यिक काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इंद्रधनुषी रंगों से छलकती इस शाम में बेंगलूरू(कर्नाटक) से पधारी डाक्टर नीलिमा दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं और अपने सुमधुर काव्य पाठ से सबका मन…

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  • Ilm ki Roshniyan
    शेरो-शायरी

    इल्म की रौशनियाँ | Ilm ki Roshniyan

    ByAdmin March 27, 2024

    इल्म की रौशनियाँ ( Ilm ki Roshniyan )   सही रास्ते की पहचान कराए इल्म की रौशनियाँ, गहरी खाई में हमें गिराए जहालत की तारीकियाँ, ज़िंदगी से कुछ लम्हे चुरा पनाह लेना किताबों में, बड़ा दिलफ़रेब पुरसुकूं होती किताबों की दुनियाँ, थक जाओ गर तुम रिश्ते की गिरहें सुलझाते हुए, किताबोंमें आराम पाएगी तुम्हारी बेबस…

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  • Kavita Murad
    कविताएँ

    मुराद | Kavita Murad

    ByAdmin March 27, 2024

    मुराद ( Murad )   एक तू ही नही खुदा के आशियाने मे कैद हैं और भी कई इसी अफसाने मे दर्द से हुआ है फरिग् कौन इस जमाने मे खोज ले जाकर भले अपने या बेगाने मे मन माफिक मुराद सभी को हासिल नही कैसे मान लिया कि तेरे लिए कोई मंजिल नही बेशक्,…

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  • तृष्णा | Kavita Trishna
    कविताएँ

    तृष्णा | Kavita Trishna

    ByAdmin March 27, 2024March 27, 2024

    तृष्णा (Trishna ) तृष्णाएं सदा संतृप्त, नेह से संसर्ग कर पगडंडियां व्याकुल दिग्भ्रमित, उच्चवाचन मरीचि प्रभाव । सुख समृद्धि मंगलता दूर, निर्णयन क्षमता अभाव । अथक श्रम सफलता चाहना, विराम पल उत्सर्ग कर । तृष्णाएं सदा संतृप्त ,नेह से संसर्ग कर ।। नैतिक आचार विचार, नित विमल कामना स्पंदन । कपट रहित धवल छवि, हृदय…

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