• आसां नहीं होता | Ghazal Aasan Nahi Hota

    आसां नहीं होता ( Aasan Nahi Hota )   बज़ाहिर लग रहा आसां मगर आसां नहीं होता बहुत दुश्वार उल्फ़त का सफ़र आसां नहीं होता। ज़मीं एहसास की बंजर अगर इक बार हो जाये लगाना फिर मुहब्बत का शजर आसां नहीं होता। सुनो अहदे वफ़ा करना अलामत इश्क़ की लेकिन निभाना अहद यारों उम्र भर…

  • मेहरबान | Meherbaan

    मेहरबान ( Meherbaan ) उन मेहरबान शख़्सियत के बारे में क्या लिखूं, उनको अपना रहबर या फिर सायबान लिखूं, उनकी बातों में एक अजब जादू सा होता है , जो दिल-ओ-ज़हन को अपनी ओर खिंचता है, एक घने दरख़्त की मानिंद मुझ पर साया किया है, मान-मनाए के रिश्ते को दिल से निभाया किया है,…

  • हवाई महल | Kavita Hawai Mahal

    हवाई महल ( Hawai Mahal )   पानी मे लकीर बनती नही घड़े पर पानी ठहरता नहीं भरी हो नींद, खुली आँखों में जिनकी उनके आगे से कोई गुजरता नहीं खुद हि खुद मे गाफ़िल् हैं जो दीन दुनियां से बेखबर हैं जो पाले बैठे हैं खुद की हि समझदारी जो उनके मुह से कोई…

  • राजस्थान दिवस | Kavita Rajasthan Diwas

    राजस्थान दिवस ( Rajasthan Diwas )   चंबल की अदाओं पर,मरुस्थल की अंगड़ाई त्याग बलिदान शौर्य धरा, उत्सर्ग उपमित भव्य इतिहास । लोक कला संस्कृति अद्भुत, सर्वत्र दर्शन जन उल्लास । रजपूती माटी रज रज, अनंत सूरमा सुप्रभा जड़ाई । चंबल की अदाओं पर,मरुस्थल की अंगड़ाई ।। मिट्टी अंतर जोश उमंग, मलयज सम स्फूर्त बयार…

  • पुनर्जन्म | Kavita Punarjanm

    पुनर्जन्म ( Punarjanm ) मैंने सबसे कीमती वस्तु को, तलाशना चाहा,  हीरे-जवाहरात , मणि माणिक , सभी लगे मिट्टी के धूल समान,  मैं अपनी धुन में,  खोजता चला जा रहा था , दिन, महीने में बदलने लगे , महीने वर्ष में , लेकिन नहीं मिल सकी, वह कीमती तोहफा, जो संसार में सबसे कीमती हो।…

  • होली में बरसे रंग प्यार के | Kavita Holi me

    होली में बरसे रंग प्यार के ( Kavita Holi me Barse Rang Pyar ke )   होली मे बरसे रंग प्यार के, आओ रंग दे तुम्हें गुलाल से। ढोलक और चंग आज बजाएं, रंग दे तुम को हर एक रंग से।। जागी है मन में आज उमंग, बुराई का करेंगे हम तो दमन। हिन्दू मुस्लिम…

  • आनंदिता स्पंदन | Kavita Aanandita Spandan

    आनंदिता स्पंदन ( Aanandita Spandan ) आनंदिता स्पंदन, चिन्मय पथ पर नेह अंतर मंगल प्रवाह, सुख वैभव क्षणिक धार । तात्विक तथ्य गहन मंथन, ज्योतिर्मय दर्शन साकार । चंचल चितवन आरूढ़, नवल धवल भव रथ पर । आनंदिता स्पंदन, चिन्मय पथ पर ।। दृष्टि बिंब नैतिक सात्विक, आस्था स्पर्श अलौकिक छोर । क्रोध वैमनस्य मूल…

  • ख़्वाब में तुम | Ghazal Khwab mein Tum

    ख़्वाब में तुम ( Khwab mein Tum )   मेरे ख़्वाब में तुम आए थे या फ़क़त वहम था, तुम ही तुम दिख रहे थे ऐसा खोया ज़हन था, तुम्हारी कुर्बत का एहसास…कभी जाता नहीं, आँखें खुली तो दिल तन्हाईं से गया सहम था, ख़्वाब ही बेहतर लगते हैं मुझको हक़ीक़त से, ख़्वाब में सुकून…

  • दीवार | Kavita Deewaar

    दीवार ( Deewaar ) ( 2 ) होते थे कभी मकान मिट्टी के कच्चे मगर उनमे पलते थे प्यार पक्के आज बढ़ने लगे हैं मकान पक्के मगर रिश्ते दिल के हो गये हैं कच्चे कभी होते थे रिश्ते खून के अपने अब अपने ही करने लगे खून रिश्तों का चलने लगे हैं खेल चौसर के…

  • शिक्षा का आधार | Kavita Shiksha ka Aadhar

    शिक्षा का आधार ( Shiksha ka Aadhar )   इल्म की रौशनियाँ जग में जो फैलाते हैं, ज़िन्दगी जीने का गुर जो हमें सिखाते हैं, लड़खड़ाहती है , जब भी ज़ुबाने हमारी, शिक्षक ही हर्फ-बा-हर्फ हमको रटाते हैं, अलिफ़ से अल्लाह की पहचान कराते, गीता बाईबिल में , ख़ुदा वही दिखाते हैं, वालिदैन का दुनिया…