• बदगुमानी के धागे | Badgumani ke Dhage

    बदगुमानी के धागे ( Badgumani ke Dhage )   बदगुमानी के कुछ धागे गुथे-गुथे स्मृतियों के मोती बिखरे हुए जैसे किसी मियाद के किसी पृष्ठ में रखा सूखा गुलाब कोई अतीत-सा प्रतिचित्र कुछ चंद नज़्म कहीं रूठी-सी आधी अधूरी-सी। अनायास लिखते-लिखते कहीं से कोई सदा मन के शांत कोने में गुजर जाती है। ये तन्हा-सा…

  • पुनर्जन्म | Kahani Punarjanm

    ( 2 )  धीरे-धीरे महीने हो गए थे ।अभी बच्चे की आंख नहीं खुली ।उसके माता-पिता अपलक निहार रहें थे। उन्हें कुछ नहीं समझ में आ रहा था कि क्या किया जाए। बच्चे का शरीर सूख कर काटा हो चुका था। फिर भी माता-पिता की आशा थी कि मेरे लाल को कुछ नहीं होगा। मनुष्य…

  • सताया न कर | Sataya na Kar

    सताया न कर ( Sataya na Kar )   ज़ब्त रब का कभी आज़माया न कर बेवज़ह मुफ़लिसों को सताया न कर। है खफ़ा तो पता ये उसे भी लगे ख़ुद ब ख़ुद आदतन मान जाया न कर। रंजिशें दरगुज़र भी किया कर कभी तल्ख़ियां बेसबब यूं बढ़ाया न कर। तोड़ कर ख़्वाब ग़र तू…

  • हिफ़ाज़त वतन की | Watan par Shayari

    ( हिफ़ाज़त वतन की ) Watan par Shayari   करो हर क़दम पे हिफ़ाज़त वतन की करो सब वफ़ा से मुहब्बत वतन की अदू ख़ौफ़ खाए सदा भारत से ही बनो वो हमेशा ही ताक़त वतन की करे है मदद इक दूसरे की हमेशा बड़ी अच्छी है ही शराफ़त वतन की चलेगी मेरी सांस जब…

  • होली पर्व | Holi Parv

    होली पर्व ( Holi Parv )  ( 2 ) होली पर्व धर्म से निष्काम बनती आत्मा । होली पर्व पर धर्म से पल – पल होती विकसित आत्मा । होली पर्व पर धर्म से मन में समता सरसाये । होली पर्व पर धर्म से शुद्ध भावों के फूल खिले । होली पर्व पर धर्म से…

  • ये नवल धरा है रसिकों की | Nawal Dhara

    ये नवल धरा है रसिकों की  ( Ye Nawal Dhara Hai Rasiko Ki )    तुम लक्ष्मीकांत मैं रमाकांत, तुम गुणी पूज्य मैं भी हूं शांत। तुम हंसी ठहाकों की दुनिया, महफ़िल में रंग जमा जाना। ये नवल धरा है रसिकों की, तुम आकर पुष्प खिला जाना। मैं मनमौजी मतवाला गीतों में, फागुनी रस राग…

  • दिल तो दिल है | Dil to Dil Hai

    दिल तो दिल है ( Dil to Dil Hai )   चुभा हुआ है जो काँटा निकल भी सकता है ये दर्दनाक सा मंज़र बदल भी सकता है निज़ाम और भी चौकस बना दिया जाये तो हादसा कोई होने से टल भी सकता है इशारा देखिए हाकिम के आप लहजे का वो सारी भीड़ को…

  • होळी आई रे भोळा भंडारी | Holi Aayi re Bhola Bhandari

    होळी आई रे भोळा भंडारी ( Holi Aayi re Bhola Bhandari ) राजस्थानी धमाल   होळी आई रे भोळा भंडारी, भस्म रमा। होळी आई रे भांग घोटकर पीगो शंकर, आक धतूरा खागो। नाग लपेटयां नंद द्वार प, नीलकंठ जद आगो। कृष्ण कन्हैयो मदन मुरारी, मुरली मधुर बजाई रे। होळी आई रे भूत प्रेत पिशाच को…

  • द्वंद | Dvand

    वैसे वह एक हट्टा कट्टा नौजवान है । उसे जिम जाने का शौक बचपन से है । क्या मजाल किसी को की उसको कोई नीचा दिखा कर चला जाए? मोहल्ले में ऐसी धाक जमाया है पट्ठा कि पूछो मत। सब उसे देवता समझते हैं देवता। परंतु इस देवता के हृदय में जलने वाली अग्नि को…

  • जिजीविषा सदा विजयंत | Jijeevisha

    जिजीविषा सदा विजयंत   मानव जन्म सृष्टि पटल, अलौकिक अनुपम छवि । देवत्व प्रभा मुखमंडल, ओज पुंज सदृश रवि । स्नेह दया सहयोग मूल, सदा गमन नैतिकता पंत । जिजीविषा सदा विजयंत ।। दुःख कष्ट सम धूप छांव , प्रति पल परिवर्तन कारी । सुख आनंद नेह संविदा, धर्म आस्था अंतर धारी । जीव जंतु…