• शिव पार्वती | Shiva Parvati

    शिव पार्वती ( Shiva Parvati )   हो रहे विवाहितआज बाबा भोले आनंदित हुए संग पार्वती सजा महल हिमालय राज का सुर असुर सब बने बाराती शिव संग शक्ति मिलन परम जीवन का यही उत्तम धरम दिन ब्रह्मांड के एकाकार का रूप शाश्वत प्रभु के साकार का आदि भी शिव ,अंत भी शिव अणु भी…

  • भोर होने तक | Bhor Hone Tak

    भोर होने तक ( Bhor Hone Tak )   भोर तक तो चलना होगा रुकना और ठहरना होगा सफर है हमारी जिंदगी का लडखडाना और संभलना होगा हर मौसम के साथ रहना होगा हर मोड़ से हमें गुजरना होगा होंगे कईयों से गिले शिकवे भी सब में समझाना और समझना होगा धूप और छांव जरूरी…

  • मेरा भाई है वो | Mera Bhai Hai Wo

    मेरा भाई है वो ( Mera Bhai Hai Wo )   क्या कहूं, किसे कहूं, कौन है वो, मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि है वो, ना शिकायतें उसे मुझसे, ना शिकवा करे वो, मेरी हर बात बिन कहे ही समझ जाता वो, कब, कहां,कैसे पता नहीं, पर मेरे जीवन का सबसे अहम हिस्सा है…

  • हम हैं सशक्त नारी | Hum Hai Sashakt Nari

    हम हैं सशक्त नारी ( Hum Hai Sashakt Nari )    कई बार मैं सोचती हूं कि, अरमान ढेर सारे और विपदाएं भी हमारी, हाय रे नए भारत की हम हैं सशक्त नारी। नई-नई जीवन शैली में कदम रखा, बदले हुए हैं रंग ढंग सारे फिर हमारे सोच विचार की हमने सारी परंपराएं तोड़ डाली,…

  • जीवन ज्योत्स्ना है नारी | Jeevan Jyotsna Hai Nari

    जीवन ज्योत्स्ना है नारी ( Jeevan Jyotsna Hai Nari )   कोमल निर्मल सरस भाव, अंतर प्रवाह विमल सरिता । त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति, अनंता अत्युत्तम कविता । सृजन उत्थान पथ पर, सदा अनंत महिमा धारी । जीवन ज्योत्स्ना है नारी ।। स्नेहगार ,दया उद्गम स्थल, अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि का । पूजनीय कमनीय शील युत, नैतिक…

  • होलिया में रंग का उड़ाईं | Holiya me Rang ka Udai

    होलिया में रंग का उड़ाईं ( Holiya me Rang ka Udai )   खेतवा चरल नील- गाय, होलिया में रंग का उड़ाईं। सड़वा कै कवन बा उपाय, होलिया में रंग का उड़ाईं। (2) खेतवा के होंठवा कै सूखल ललइया, आलू, बैंगन,गोभी कै टूटल कलइया। अरे! सड़वा से खेतिया बिलाय, होलिया में रंग का उड़ाईं। सड़वा…

  • साथ | Saath

    साथ ( Saath )    मिलनेवाले तो मिल हि लेते हैं न मिलने वाले तो साथ रहकर भी मिल नही पाते खेल है सारा भावनाओं का बिन चाहत के हम जुड़ नही पाते साथ साथ चलना जरूरी नही होता दूर रहकर भी करीब रह लेते हैं लोग तन और धन का आखिर बजूद हि क्या…

  • बेटे का मकान | Bete ka Makan

    बेटे का मकान ( Bete ka Makan )    कभी रहती थी माँ गाँव में, बाबूजी के बनाए मकान में, अब रहने लगी है माँ, बेटे के बनाए मकान में | शहर की गगनचुंबी इमारतों में, तलाशती रहती है,थोड़ी सी धूप, मेरे दसवें माले के फ्लैट की बालकनी में| फ्लैट में सजाए बोनसाई में, याद…

  • औरत समपर्ण है | Aurat Samarpan Hai

    औरत समपर्ण है ( Aurat Samarpan Hai )   औरत को एक जन्म में समझना चाहते हो ग़लत फ़हमी में हो औरत को समझने के लिये एक जन्म नहीं, कई जन्म चाहिए औरत का दिल समन्दर की तरह है मोम की तरह है, पत्थर की तरह है औरत समपर्ण है आकर्षण है पारे जैसा दर्पण…

  • नेह | Neh

    नेह ( Neh )   अंतर हिलोरें उठ रहीं, नेह के स्पंदन में मन गंगा सा निर्मल पावन, निहार रहा धरा गगन । देख सौम्य काल धारा, निज ही निज मलंग मगन । कर सोलह श्रृंगार कामनाएं, दृढ़ संकल्पित लक्ष्य वंदन में । अंतर हिलोरें उठ रहीं ,नेह के स्पंदन में ।। नवल धवल कायिक…