• उड़त बा रंगवाँ | Urat ba Rangwa

    उड़त बा रंगवाँ ( Urat ba Rangwa )    उठावा न साया घड़ी-घड़ी, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। तोड़ा न सिग्नल,न तोड़ा कली, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। (2) गमकत बा तोहरो ई फुलवा की क्यारी, लाल-लाल हुई मिट्टी,लाल हुई साड़ी। लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी, लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी। भरी पिचकारी…

  • एडोल्फ हिटलर | Adolf Hitler

    एडोल्फ हिटलर ( Adolf Hitler ) प्रेम की प्यास में व्याकुल एक नवयुवक ऑस्ट्रिया की गलियों में घूमा करता। काश कोई तरुणी उसके दर्द को समझ पाती और करती प्रेम तो वह महान खून का प्यासा ना बनता तानाशाह। प्रेम की व्याकुलता लाती विछिप्तता उसी व्याकुलता में एक दिन अपनी प्रेयसी की याद को सीने…

  • विकास और बाजार | Vikas aur Bazaar

    विकास और बाजार  ( Vikas aur bazaar )    हमने मान लिया इंसान को भगवान और भगवान को पत्थर, पत्थर को रख कर लगा दिया बाजार और फिर शुरू हुआ विकास का क्रम, जमीने बिकने लगी औकात को देख कर लोग होने लगे बेघर सड़के चौड़ी होना शुरू हुई पेड़ कटने लगे उखड़ने लगे जड़…

  • मन्नत | Mannat

    मन्नत ( Mannat )   रूपसी हो तुम्हीं मेरी प्रेयसी हो ग़ज़ल हो मेरी तुम्हीं शायरी हो बहार हो तुम ही तन्हाई भी हो जीवन की मेरे शहनाई भी तुम्ही दो गज ज़मीन हो मेरी तुम ही तुम ही फलक की रोशनी भी कल्पना हो मेरे जज़्बातों की तुम ही नर्म चादर हो खुशियों की…

  • गौ सेवा | Gau Seva

    गौ सेवा ( Gau Seva )   भाग्योदय के द्वार खुलते, गौ सेवा भक्ति से संपूर्ण देव लोक उर वसित, समुद्र मंथन विमल रत्न । सदा पुलकित मनुज जीवन, कर तत्पर सेवा प्रयत्न । पावन मंगल भाव उपमा, सनातन गौरव दर्शन स्तुति से । भाग्योदय के द्वार खुलते, गौ सेवा भक्ति से ।। सिंग शोभा…

  • महिलाएं | Mahilayen

    महिलाएं ( Mahilayen )   महिलाएं एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं महिलाएं कभी ना थकती हैं कभी ना रूकती है ना जाने कैसे रहती हैं महिलाएं आधी आबादी कहलाती हैं महिलाएं माथे पर शिकन तक नहीं आने देती फिर भी रहती हैं शिकार शोषण का यौन अपराधों का जैसे उस पराशक्ति ने इन्हें…

  • शिव शंकर कैलाशपति | Shiv Shankar Kailashpati

    शिव शंकर कैलाशपति ( Shiv Shankar Kailashpati )   शिव शंकर कैलाशपति की, कर ले सेवा यार मेरा। औघड़ दानी भोला भंडारी, भर देगा भंडार तेरा। शिव शंकर कैलाशपति की जटा लपेटे सर्प की माला, नीलकंठ शंकर प्यारे। करै बैल असवारी बाबा, शीश पे शिव गंगा धारे। जल भर लोटा चढ़ावे शंभु, मिट जाए मन…

  • औरत | Aurat

    औरत ( Aurat )  ( 2 ) औरत फूलों की तरह….नाज़ुक सी होती है, मगर…काँटों को भी पलकों से वो चुनती है, उसके चरित्र की धज्जियां दुनिया उड़ाती है, फिर भी.मोहब्बतों से इसको वो सजाती है, रखी है जिसके पैरों के नीचे ख़ुदा ने जन्नत, उठाके चरित्र पे उँगली भेजते उसपे लानत, चलते हैं उसके…

  • शायर विनय साग़र जायसवाल के ग़ज़ल संग्रह पयामे-ज़ीस्त का लोकार्पण

    शायर विनय साग़र जायसवाल के ग़ज़ल संग्रह पयामे-ज़ीस्त का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन के बी एस प्रकाशन दिल्ली द्वारा साहित्य कार निरुपमा अग्रवाल के निवास प्रभात नगर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रणधीर प्रसाद गौड़ धीर ने की मुख्यातिथि रहे वरिष्ठ कवि गगन गौतम विशिष्ट अतिथि रहे हिमांशु श्रोतिय निष्पक्ष, कार्यक्रम…

  • बेपरवाही | Beparwahi

    बेपरवाही ( Beparwahi )   खंडहर बोलते तो नहीं कुछ फिर भी बयां कर देते हैं बहुत कुछ रही होगी कभी हवेली शानदार अपनों की किरदार में ही बचा ना कुछ समय मुंह से तो कुछ नहीं कहता कभी पर आगाह जरूर करते रहता है संभल जाते हैं जो वक्त के हालात पर नामो निशान…