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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Mridul Vani
    कविताएँ

    मृदुल वाणी | Mridul Vani

    ByAdmin March 3, 2024

    मृदुल वाणी ( Mridul vani )    मृदुल वाणी मधुर वचन मन मोह लेते बोल सदेव मीठी वाणी मन मोह लेते मोर बोले मृदुल नाचे वन उपवन में मोरनी का मन भावन वन उपवन में मोर रंग रूप-स्वरूप सुंदर सुहाना सलोना मानव प्राणी सुन तान पावन सुहाना सलोना सुंदर स़ूरत मोहक मूर्त पग काले कलूटे…

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  • I Love you Mein
    कविताएँ

    आई लव यू में | I Love you Mein

    ByAdmin March 3, 2024

    आई लव यू में ( I Love you Mein ) प्रेम जप तप लगन , तन मन मुदित भाव । निहार अक्स आकर्षण, जीवन सौम्य शीतल छांव । शब्द अर्थ अभिव्यंजना , हृदय श्रोत मधुरता अथाह । आई लव यू में,अपनत्व का सरित प्रवाह।। अंतराल विलोप पथ, मैत्री चाहना परिवेश । हर पल आनंद जन्य,…

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  • Tum Kyon Nahi Aate
    कविताएँ

    तुम क्यों नहीं आते | Tum Kyon Nahi Aate

    ByAdmin March 3, 2024March 3, 2024

    तुम क्यों नहीं आते ( Tum Kyon Nahi Aate )    पलाश के फूल भी मौसम आने पर खिल जाते हैं धरती और अंबर भी एक वक्त पर मिल जाते हैं मगर हम तुम क्यों मिल नहीं पाते ? मन के फूल क्यों खिल नहीं पाते ? आओ देखो ! बाग़ों में महुआ महक रहा…

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  • Kisano ki Rahen
    कविताएँ

    किसानों की राहें | Kisano ki Rahen

    ByAdmin March 2, 2024

    किसानों की राहें! ( Kisano ki Rahen )   आँसू से लथपथ किसानों की राहें, कोई उनसे कह दे वो घर लौट जाएँ। सियासी अखाड़े उन्हें छोड़ दें अब, मुसीबत पहाड़ों की या तोड़ दें अब। लागत किसानों की तो वो दिलाएँ, कोई उनसे कह दे वो घर लौट जाएँ। आँसू से लथपथ किसानों की…

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  • Anusaran
    कविताएँ

    अनुसरण | Anusaran

    ByAdmin March 2, 2024

    अनुसरण ( Anusaran )   यह जरूरी नहीं कि आप हर किसी के साथ हर काम में साथ-साथ रहे किंतु यह जरूरी है कि मानसिक और भावनाओं में सदैव अपनों के साथ रहें  आर्थिक और व्यक्तिगत संबंध से अधिक  व्यावहारिक सहयोग जरूरी है  व्यस्तता और परेशानी सभी से जुड़ी है फिर भी उम्मीदें अपनों से…

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  • कवि हूँ कविता में जिन्दा रहता हूँ | Kavi Hoon
    कविताएँ

    कवि हूँ कविता में जिन्दा रहता हूँ | Kavi Hoon

    ByAdmin March 2, 2024March 2, 2024

    कवि हूँ, कविता में जिन्दा रहता हूँ ( Kavi Hoon Kavita me Jinda Rahta Hoon )    तुम समझ सको, शब्दों की भाषा, तुम जान सको, सपनों की आशा। बादलों का उड़ना, तुम देख सको, बहती हवा को, तुम महसूस करो। तुम डूब के जानो, सागर की गहराई, तुम उड़ के नापो, अम्बर की ऊँचाई।…

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  • International Women's Day
    विवेचना

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस | International Women’s Day

    ByAdmin March 2, 2024March 22, 2024

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर समस्त नारी शक्ति को नमन करते हुए मेरे भाव – आसमाँ को मुट्ठी में क़ैद करने की ख़्वाहिश, अपनी पहचान तलाशने, अपनी पहचान क़ायम करने का अरमान, रिश्ते-नाते,घर-आँगन को सहेजने का ज़िम्मा। रस्मों-रिवाजों को निभाने की हर कोशिश ,हर ज़िम्मेदारी आज एक माँ, संगिनी, बेटी, बहु,पत्नी,जननी आदि बन कर नारी बख़ूबी…

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  • अनुभूति | Anubhooti
    कविताएँ

    अनुभूति | Anubhooti

    ByAdmin March 2, 2024

    अनुभूति ( Anubhooti )   निशा थी नीरव था आकाश नयन कब से अलसाये थे। जान कर सोता हुआ मुझे चले सपनों में आये थे। हुई जो कुछ भी तुमसे बात, उसे कब जान सकी थी रात, गया था सारी सुधबुध भूल हृदय को इतना भाये थे। रहे थे जो अनगाये गीत तुम्हें अर्पित कर…

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  • बचपन की बातें : कुछ सुनहरी यादें
    कविताएँ

    बचपन की बातें : कुछ सुनहरी यादें

    ByAdmin March 2, 2024

    बचपन की बातें ( Bachpan ki baatein )   काग़ज़ की नाव बना फिर से तैराए, बारिश के पानी में छबकियां लगाए। दरवाजे के पीछे छुपकर सबको डराए, चलो फिर से एक बार बच्चे बन जाए। पापा की कमीज पहन कर हाथ छुपाए, इस कला को हम लोगों को जादू बताएं। खुद भी हँसे सभी…

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  • Shaam ke Baad
    कविताएँ

    शाम के बाद | Shaam ke Baad

    ByAdmin March 2, 2024

    शाम के बाद ( Shaam ke Baad )   हर शाम के बाद फकत अंधेरा ही नहीं होता पूनम का उजाला और प्रभात का भोर भी होता है आप बस सफर तय करते रहिए ठहर जाने पर दूरी तय नहीं होती भटक कर भी राह मिल ही जाती है लोग मिल ही जाते हैं मुकाम…

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