• मज़हब की दीवारें | Mazhab ki Deewaren

    आज दीपावली का त्यौहार है। प्रकृति में हर तरफ़ नव उत्साह एवं दिवाली का परमानंदित प्रकाश फैला हुआ है। यह दिव्य प्रकाश बिजली से जलने वाली लड़ियों एवं दीपों से आ रहा है अथवा लोगों के अंतर से-कह पाना बड़ा कठिन है, क्योंकि दोनों ने अपने-अपने स्वरूप को बिना किसी व्यवधान के एक-दूसरे में बड़ी…

  • दीप वर्तिकाएं | Deepawali Poem in Hindi

    दीप वर्तिकाएं   दीप वर्तिकाएं ज्योतिर्मय, राघव के अभिनंदन में *********** जन ह्रदय पुनीत पावन, सर्वत्र स्नेह प्रेम सम्मान। कलयुग रूप त्रेता सम, अयोध्या उपमित जहान। मर्यादा पुरुषोत्तम दिग्दर्शन, आराधना स्तुति वंदन में । दीप वर्तिकाएं ज्योतिर्मय, राघव के अभिनंदन में ।। चतुर्दश वर्ष वनवास इति श्री, रघुनंदन साकेत वापसी अनूप । मनुज सर्व जीव…

  • शुभ दिवाली | Subh Diwali

    शुभ दिवाली ( Subh Diwali )    ढ़ेरों खुशियां और सिखलाई देती है दिवाली, प्यार से रहना हम सबको सिखाती दिवाली। जगमगाती रहे ज़िन्दगी कहती यही दिवाली, हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है शुभ दिवाली।। नौ रोज़ नवरात्रा व दसवा दिन दशहरा होता, बीसवे दिन दीवाली का पावन पर्व ये आता। दरिद्रता से न रहता…

  • मज़दूरों की दिवाली और कामकाज

    कात्तक बदी अमावस आई, दिन था खास दिवाळी का कार्तिक के महीने में फसल व पशु बेचने से पैसा कमाकर उससे ताजा ब्याए हुए पशु (दुधारू गाय – भैस) को ख़रीद कर दूध-दही-घी व उनसे बने हुए पकवान खाने का आनंद लेते व किसान के घर धन आने का उल्लास अब धनतेरस है। अपने पशुओं…

  • बनना है तो दीपक बन | Deepak Ban

    बनना है तो दीपक बन ( Banna hai to deepak ban )    अगर बनना है तो दीपक बन, दिल जीतना है तो बाती बन। छू ही, लेते वह चाॅंद और तारें, भाव हो जिसके प्यारे ये मन।। जब ये जलता प्रकाश करता, लेकिन स्वयं अन्धेरे में रहता। दीपक से है यह बाती महान, जलती…

  • अकेला ही | Akela Hi

    अकेला ही ( Akela hi )    अकेले ही चलना पड़ता है मुश्किलों से संभलना पड़ता है तूफानों से जीतना है अगर खुद को सिकंदर बनना पड़ता है काटनी है अगर फसल भी तो धूप मे जलना पड़ता है आसान नहीं है अनाज को भी घर में ले आना ठंड भरी रातों में ठिठुरना पड़ता…

  • दीवाली मन गई | Diwali Man Gai

    दीवाली मन गई ( Diwali man gai )    दीपो की बारात आई तुमको अपने साथ लाई । खुशियों की सौगात पाई अब दीवाली मन गई । मेरी दीवाली मन गई । सुर बिना हो साज जैसे वैसे मै जीती रही । काम न था काज कुछ बन बांवरी फिरती रही । नाम जब तुमने…

  • भजन हनुमान जी का | Hanuman Bhajan lyrics

    भजन-हनुमान जी का   ओ भोले हनुमान मैं निशिदिन करूँ तुम्हारा ध्यान। सियाराम के प्यारे सबका करते तुम कल्यान।। प्रभु के संकट में भी तुमने उनके काज बनाए राम मुद्रिका सीता मय्या तक तुम ही पहुँचाए जला के लंका हिला दिया था रावण का अभिमान।। सियाराम के—– अपने भक्तों की विपदा में तुरंत दौड़ कर…

  • दीपोत्सव | Deepotsav

    दीपोत्सव ( Deepotsav )    कातिक मास अमावस रैन बिना घर कंत जले कस बाती। खेतन में पसरी बजरी डगरी बहु चोर फिरें दिन राती। गावत गान पिटावट धान कटी उरदी कृषिका पुलकाती। घात किए प्रिय कंत बसे परदेश न भेजत एकहुँ पाती।। चंचल चित्त चलै चहुँ ओर गई बरखा अब शीत समानी। छाछ दही…

  • दीप जले | Diwali Hindi Shayari

    दीप जले ( Deep Jale )    बरसों की रस्म पुरानी दीप जले है आयी वो रात सुहानी दीप जले है ख़ुशियों की है आज बहारें हर घर में महकी रात कि ही रानी दीप जले है चैधा वर्ष बाद लौटे है राम अयोध्या उत्सव की एक निशानी दीप जले है बचपन के दिन भी…