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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Akhand Bharat
    कविताएँ

    अखंड भारत | Akhand Bharat

    ByAdmin October 4, 2023October 4, 2023

    अखंड भारत  ( Akhand Bharat )   अखंड भारत , अद्भुत अनुपम नजारा अनूप वंदन सनातन धर्म, कर्म धर्म मोहक पावन । मानवता सदा श्री वंदित, सर्वत्र समृद्धि बिछावन । स्नेह प्रेम अपनत्व अथाह, सदाचारित परिवेश सारा । अखंड भारत,अद्भुत अनुपम नजारा ।। नदी पर्वत मैदान पुनीत, समरसता मृदुल स्वर । सत्य नित्य मनुज संगी,…

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  • महफिल | Mehfil
    कविताएँ

    महफिल | Mehfil

    ByAdmin October 4, 2023

    महफिल ( Mehfil )   महफिले आम न कर चाहत मे अपनी लुटेरों की बस्ती मे न बसा घर अपना बच के रह जरा ,बेरुखी जहां की नजर से इस महफिल का उजाला भी शराबी है घरौंदे से महल के ख्वाब ,ठीक नही होते दीए का उजाला भी ,भोर से कम नहीं होता ये महफिल…

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  • मातृत्व की साक्षात मूर्ति : कस्तूरबा गांधी
    विवेचना

    मातृत्व की साक्षात मूर्ति : कस्तूरबा गांधी

    ByAdmin October 4, 2023

    दुनिया में जो इतने दुख बढ़ गए हैं उसे मां के मातृत्व भरे आंचल में ही शांति प्राप्त हो सकती है । कोई भी व्यक्ति कितना भी महान क्यों ना हो वह मां के उपकारों का बदला नहीं चुका सकता। महात्मा गांधी की महानता के पीछे मां पुतलीबाई का जितना बड़ा योगदान है उससे कम…

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  • प्रयाग के गौरव : पंडित रमादत्त शुक्ल
    विवेचना

    प्रयाग के गौरव : पंडित रमादत्त शुक्ल

    ByAdmin October 4, 2023

    प्रयाग की धरती बड़ी पुण्य शीला है। यहां अनेको ऐसी महान विभूतियां हुए हैं जिनका जन्म यहां तो नहीं हुआ परंतु जब वह प्रयागराज की भूमि पर आए तो यही के होकर रह गए। महाप्राण निराला एवं पंडित रमादत्त शुक्ल ऐसी ही दिव्य महापुरुष है । जिससे प्रयागराज के गौरव की ही वृद्धि होती है…

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  • सांस्कृतिक चेतना के उद्घारक : आचार्य रामचंद्र शुक्ल
    विवेचना

    सांस्कृतिक चेतना के उद्घारक : आचार्य रामचंद्र शुक्ल

    ByAdmin October 4, 2023

    एक ऐसा अजेय लेखक जिसके नाम से एक युग की शुरुआत होती है वे थे आचार्य रामचंद्र शुक्ल । वे हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ पुरुष थे कि जिसको लांघकर निकल जाना किसी के बस की बात नहीं थी। उनके द्वारा लिखित हिंदी साहित्य का इतिहास आज तक भी कोई दूसरा नहीं लिख सका है…

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  • पालक | Paalak
    कविताएँ

    पालक | Paalak

    ByAdmin October 4, 2023October 4, 2023

    पालक ( Paalak )   जीवित रहना तो उम्र गुजारना है आपके जीवन का निष्कर्ष तो कर्म और व्यवहार से ही प्रतिपादित होता है….. ऊंचा आसन या प्रतिष्ठित कुल मे बनाम लेना आपके प्रारब्ध का फल है हो रहा क्षीण जो पल प्रति पल भविष्य निर्णय तो वर्तमान की नींव पर ही होता है…. किसी…

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  • शक | Shak
    कहानियां

    शक | Shak

    ByAdmin October 4, 2023

    और दिनों से थोड़ा अलग आज कृति काॅलेज से आती हुई थोड़ा ज़्यादा की ख़ुश नज़र आ रही थी । घर आकर उसने अपना बैग रखा ही था कि तभी उसकी माँ अमिता की नज़र उसके मुस्कुराते हुए चेहरे और कलाई पर बंधी घड़ी पर पड़ी । अमिता ने अचानक से उसका हाथ पकड़ लिया…

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  • दिनकर समर्पित अंतरराष्ट्रीय काव्यांजलि
    साहित्यिक गतिविधि

    दिनकर समर्पित अंतरराष्ट्रीय काव्यांजलि

    ByAdmin October 4, 2023October 4, 2023

    ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रांति के उद्गायक राष्ट्रकवि रामधारी सिंह “दिनकर” के सम्मान में “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था) के तत्वावधान में उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए संस्था के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र नाथ शुक्ल की अध्यक्षता एवं संस्थापक महासचिव डॉ. मुन्ना लाल प्रसाद के संचालन में श्रद्धांजलि स्वरूप गूगल मीट के…

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  • कहां हो मेरे पुरखों | Kahan ho Mere Purakhon
    कविताएँ

    कहां हो मेरे पुरखों | Kahan ho Mere Purakhon

    ByAdmin October 3, 2023

    कहां हो मेरे पुरखों ( Kahan ho mere purakhon )    मैं आऊंगा नहीं कभी भी लौटकर यह ध्यान रखना, चला गया हूं ध्यान रखना सदा के लिए तुम्हें छोड़कर। याद आ रही है आपकी हर वक्त हर पल, भूले से भी नहीं भूल पा रहे साथ रहकर। याद आ रहा है हमेशा परछाईं की…

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  • Dost ya Dushman
    ग़ज़ल

    दोस्त या दुश्मन | Dost ya Dushman

    ByAdmin October 3, 2023October 5, 2023

    दोस्त या दुश्मन ( Dost ya dushman )    लबों पे है तबस्सुम , दिल में नफ़रत बीज बोते है अदब ऐसा अग़र, ना वो कभी भी दोस्त होते हैं ॥ मिलाते हाथ यूँ ,लगती तबीयत जोशजन उनकी घुमाते पीठ पीछे साजिशे – मोती पिरोते  हैं ॥ फ़रेबी रग में इनके इस क़दर ख़ाता हिलोरे…

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