• सच्चा भक्त | Sacha Bakht

    सच्चा भक्त ( Sacha bakht )    सच्चा भक्त ढोंग ढकोसला छल फ़रेब दिखावा मोह माया आडंबर व अंधविश्वास में कभी नहीं पड़ सकता कभी नहीं क्योंकि बखूबी वह वाक़िफ़ है जमीनी यथार्थ की सच्चाई से और इससे भी कि ये सभी चीजें विज्ञापन हैं बाजार हैं मूल्य नहीं।   नरेन्द्र सोनकर ‘कुमार सोनकरन’ नरैना,रोकड़ी,खाईं,खाईं यमुनापार,करछना,…

  • पता नहीं क्यों | Pata Nahi Kyon

    पता नहीं क्यों ( Pata nahi kyon )    घर छोटा कमरे भी कम थे रिश्ते नाते सब चलते थे फिर भी प्रेम बाकी था पता नहीं क्यों पति-पत्नी में प्यार बड़ा था एक दूजे को खूब समझा था आज खड़े हैं कोर्ट के द्वारे पता नहीं क्यों बहन भाई के झगड़े होते थे आपस…

  • यक्ष प्रश्न | Yaksha Prashna

    यक्ष प्रश्न ( Yaksha Prashna )    परिवार हि समाज की वह इकाई है जहां से ,स्वयं समाज और देश का निर्माण होता है व्यक्ति ही एक मे अनेक और अनेक मे एक का प्रतिनिधित्व करता है…. प्रश्न तभी है की क्या एक व्यक्ति ही समाज का आधार है या,समाज ही व्यक्ति का ? हां,दोनो…

  • क्यों | Kyon

    क्यों ? ( Kyon )    हाथ मिला उल्फत दिखलाते दिल मिलने से क्यों घबराते? हुस्न परस्ती के दीवाने वस्फ की राह नही वे जाते। दैर -ओ -हरम के ये बासिंदे नफ़रत की दीवार बनाते । बातिल साज़ी बहुत हुई अब कुछ तो वादे कभी निभाते । हरदम क्यूँ तकलीद करूं मैं | क्यूंँ मेरी…

  • थोड़े ही है | Thode hi Hai

    थोड़े ही है ( Thode hi hai )   जुल्मो – फ़रेब से हाशिल कामयाबी थोड़े ही है। है मज़हब अलग तो ये खराबी थोड़े ही है।   जिन्होंने इंसानियत का पाठ पढ़ाया दुनियाँ को, उनका ज्ञान महज़ किताबी थोड़े ही है।   जो जल रहा है नफ़रत की आग में रातो -दिन ‘सौमित्र ‘,…

  • ऐसा क्या है | Aisa Kya hai?

    ऐसा क्या है? ( Aisa Kya hai )    (एक) घर में परिवार में गली में मोहल्लें में गाॅंव में कस्बें में नगर में शहर में राज्य में देश में दुनिया में ब्रह्मांड में ऐसा क्या है? विश्वास, उम्मीद, प्रेम, या और कुछ? जिससे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं लोग। (दो) मंदिर में मस्जिद…

  • शुद्धि से सिद्धि तक | Shuddhi se Siddhi Tak

    शुद्धि से सिद्धि तक ( Shuddhi se siddhi tak )    शुद्धि से सिद्धि तक, विमल जीवन पथ मानव जीवन अहम ध्येय, सुख आनंद प्रति क्षण । सद्गुण आदर्श सर्व व्याप्त, सात्विकता रमण अक्षण । ऊर्जस्वित कदम अग्रसर, अर्जन मनुज मनोरथ । शुद्धि से सिद्धि तक, विमल जीवन पथ ।। तन मन स्वस्थ स्वच्छ, उत्पन्न…

  • संवाद | Samvad

    संवाद ( Samvad )    संवाद सदैव दो के बीच ही होता है किंतु ,उपस्थित हर व्यक्ति,उसे अपनी समझ और प्रसंगानुरूप ही समझने का प्रयास करता है…. उपस्थिति की जरूरत आपकी नही उठे प्रश्न और समाधान की है आपका योगदान ही आपके मूल्य को परिभाषित करता है…. आपका पद या अहम नही व्यवहार और निष्पक्ष…

  • विश्व शिक्षक दिवस | Vishva Shikshak Diwas

    विश्व शिक्षक दिवस ( Vishva Shikshak Diwas )   शिक्षक चेतना का चिराग मृदुल मृदु विमल वाणी, श्री चरण कमल वरदान । कृत कृत्य श्रेष्ठ उपमा, हृदय पुनीत संधान । दर्शन दिव्य दीप्त आभा , सुषुप्त सौभाग्य जाग । शिक्षक चेतना का चिराग ।। उर तरंग पावन झंकार, अलस सदा अति दूर । शोभित मन…

  • मिंतर चौक | Minter Chowk

    मिंतर चौक ( Minter Chowk )   आओ थानै आज घुमाल्यू, चालो मित्र चौक। जगदंबा दरबार सज्यो देओ माई शीतला धोक। सब्जी मंडी सारै लागै, विघ्नहर्ता गणपति राज। गोपीनाथ जी मंदिर साजै, सुधारै सगळा काज। नैणसुखा मोदी पंसारी, चिराणियां सर्राफ व्यापारी। सटोरिया को अड्डो ठाडो, चालै राजनीति बड़ी भारी। मंच सजा भाषण बाजी हो फेर…